: कृषि मंत्री ने निकाय चुनाव की रणनीति व तैयारियों की ली जानकारी
Sun, Dec 11, 2022
नगर निगम चुनाव संचालन समिति के साथ की बैठक
अयोध्या। प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सहादतगंज स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी की नगर निगम चुनाव संचालन समिति के साथ बैठक किया। बैठक के दौरान उन्होने महानगर की संगठनात्मक स्थिति, चुनाव को लेकर बनायी गयी रणनीति व तैयारियों के बारे में जानकारी हासिल की। इससे पहले पार्टी कार्यालय पहुंचने पर पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने कृषि मंत्री का स्वागत किया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही नगर निगम चुनाव के प्रभारी भी है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को सम्पर्क और संवाद की प्रक्रिया को और बढ़ाना है। संचालन समिति लगातार चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों व उसके क्रियान्वयन की समीक्षा करें। प्रत्येक पदाधिकारी को मिली जिम्मेदारियों का निर्वाहन पूरे सामथ्य से करना चाहिए। महानगर जिलाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने बताया कि चुनाव संचालन समिति की बैठक के दौरान विभिन्न विषयों पर गम्भीरता से चर्चा हुई। कृषि मंत्री संचालन समिति के सदस्यों से तैयारियों के बारें में सवाल भी पूछे। केन्द्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की वजह से आम जनता में उत्साह का माहौल है। इस अवसर पर नगर निगम चुनाव संयोजक कमलेश श्रीवास्तव, अरविंद सिंह, प्रतीक श्रीवास्तव, देवेश तिवारी, प्रमोद साहू, राम कुमार सिंह राजू उपस्थित रहे।
: रामकथा भगवान के लीला, चरित्र, गुणों की गाथा है: रामानन्दाचार्य
Sun, Dec 11, 2022
नन्दीग्राम भरत कुंड में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास चरम पर
हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए, हर घर में रामचरित मानस हो: बिंदुगाद्याचार्य
अयोध्या। अयोध्या के नन्दीग्राम भरत कुंड जहां पर भरत जी ने 14 साल भगवान राम के लिए तपस्या करते हुए अयोध्या का देखभाल किया उसी नन्दीग्राम भरत कुंड के श्रीराम जानकी मंदिर में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी के श्री मुख से हो रहा है। कथा के द्धितीय दिवस में रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। श्री रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान के लीला चरित्र गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। पूज्य महाराज जी ने कहा कि किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है लेकिन यह भगवान की कथा है सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है। इसे बार-बार कहने एवं सुनने की इच्छा हमेशा बनी रहती है।
महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी ने कहा कि भगवान राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघन के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है। हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए हर घर में रामचरित मानस हो तथा नित्यदिन इसको पढ़े व लोगों को श्रवण कराएं। इस दिव्य महोत्सव का संयोजन करते हुए दशरथ राज महल बड़ा स्थान के बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य के उत्ताराधिकारी मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी ने कहा कि हनुमान जी को रामनाम प्रिय है जहां भी रामकथा होती है वहां वे कथा सुनने आते हैं। हनुमान जी के हृदय में श्रीराम का निवास है। भगवान कभी जन्म नही लेते है हमेशा अवतार होता है। व्यासपीठ का पूजन संतों ने किया।व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री रहे। इस मौके पर सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: प्रभंजनानन्द
Sun, Dec 11, 2022
श्रीमहंत करुणानिधान शरण जी महाराज के पावन अध्यक्षता में बह रही भागवत कथा की रसधार
अयोध्या। रामनगरी को संतो की सराह भी कही जाती है यहां अनेक भजनानंदी संत हुये है जिनकी त्याग तपस्या साधना उच्च कोटि की रही। उन्हीं संतों में एक थे परमपूज्य झुनझुनियां बाबा जी महाराज। झुनझुनियां बाबा की तपोस्थली के रुप मे सुविख्यात श्री सियारामकिला झुनकी घाट पर इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव की अमृत वर्षा हो रही है। जिसमें व्यासपीठ से भागवत कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक प्रेममूर्ति स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज कर रहे है। यह महोत्सव मंदिर के श्रीमहंत करुणानिधान शरण जी महाराज के पावन अध्यक्षता में चल रहा है। कथा के छटवें दिवस पर कथा में सुदामा व परमात्मा श्री कृष्ण की मित्रता की कथा सुनाते हुए कथा व्यास स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी ने कहा कि यदि मित्रता करना सीखना है तो हमें सुदामा की त्याग और परमात्मा के समर्पण की कथा अवश्य सुनना चाहिए। मित्रता निस्वार्थ व निष्काम भाव से करना चाहिए। मित्रता में जहां स्वार्थ आता है वहां मित्रता मित्रता नहीं रह जाती। बल्कि एक स्वार्थ से परिपूर्ण संबंध बन करके रह जाता है। उन्होंने कहा कि मित्रता में त्याग और समर्पण अत्यधिक आवश्यक है एक तरफ जहां सुदामा अत्यंत गरीब होते हुए भी परमात्मा श्री कृष्ण से स्वार्थ नहीं रखता है जबकि सुदामा परमात्मा श्री कृष्ण का बालसखा है। वहीं दूसरी ओर परमात्मा श्री कृष्ण जब सुदामा जी को अपने पास आया हुआ देखते हैं तो मित्र को किसी भी प्रकार की ग्लानि न हो यह ध्यान रखते हुए सुदामा के दिए हुए चावल अत्यंत प्रेम के साथ खाते हैं और अपना सर्वस्व सुदामा के लिए समर्पित कर देते हैं। कथा वाचक ने कहा कि जहां पर त्याग और समर्पण की भावना है मित्रता वही है और मित्रता का असली स्वरूप भी यही है।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन आयोजक विकास कुमार हथदह पटना ने किया। यह कथा महोत्सव स्व मुरारी सिंह जी की पावन स्मृति में हो रहा है।कार्यक्रम में सियारामकिला से जुडे शिष्य परिकर मौजूद रहे।