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: रामकथा भगवान के लीला, चरित्र, गुणों की गाथा है: रामानन्दाचार्य

बमबम यादव

Sun, Dec 11, 2022

नन्दीग्राम भरत कुंड में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास चरम पर

हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए, हर घर में रामचरित मानस हो: बिंदुगाद्याचार्य

अयोध्या। अयोध्या के नन्दीग्राम भरत कुंड जहां पर भरत जी ने 14 साल भगवान राम के लिए तपस्या करते हुए अयोध्या का देखभाल किया उसी नन्दीग्राम भरत कुंड के श्रीराम जानकी मंदिर में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी के श्री मुख से हो रहा है। कथा के द्धितीय दिवस में रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। श्री रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान के लीला चरित्र गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। पूज्य महाराज जी ने कहा कि किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है  लेकिन यह भगवान की कथा है सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है। इसे बार-बार कहने एवं सुनने की इच्छा हमेशा बनी रहती है।

महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी ने कहा कि भगवान राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघन के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है। हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए हर घर में रामचरित मानस हो तथा नित्यदिन इसको पढ़े व लोगों को श्रवण कराएं। इस दिव्य महोत्सव का संयोजन करते हुए दशरथ राज महल बड़ा स्थान के बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेन्द्र प्रसादाचार्य के उत्ताराधिकारी मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी ने कहा कि हनुमान जी को रामनाम प्रिय है जहां भी रामकथा होती है वहां वे कथा सुनने आते हैं। हनुमान जी के हृदय में श्रीराम का निवास है। भगवान कभी जन्म नही लेते है हमेशा अवतार होता है। व्यासपीठ का पूजन संतों ने किया।व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री रहे। इस मौके पर सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।

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