: मुक्ति पाने के लिए श्रीमद् भागवत कथा ही और भगवत भक्ति ही उत्तम साधन: रामानुजाचार्य
Thu, Mar 23, 2023
अशर्फी भवन में सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत कथा का छाया उल्लास
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्री अशर्फी भवन में चैत्र रामनवमी के अवसर पर सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में 151 आचार्य द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण का सस्वर पाठ किया गया। वेद पाठ संत अभ्यागत सेवा के साथ-साथ व्यास पीठ पर विराजमान अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने भागवत कथा का श्रवण कराते हुए परीक्षित महाराज के जन्म की कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि शरणागत रक्षक हैं भगवान राजेंद्र परीक्षित प्रभु चरणों में शरणागति किए तो भगवान ने मां उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा की परीक्षित जी जैसे ही गर्भ से बाहर निकलते हैं परमपिता परमात्मा की छवि उनके नेत्रों से ओझल हो जाती है। जिस दिव्य रूप का आनंद परीक्षित ने गर्भ में किया उस परमपिता परमात्मा को सामने ना देख कर के परीक्षित जी रुदन करने लगते हैं भगवान श्री कृष्ण सभी लोगों के देखते देखते स्वधाम को गमन कर जाते हैं।स्वामीजी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के जाते ही पृथ्वी पर घोर कलयुग व्याप्त हो जाता है राजेंद्र परीक्षित अपने पूर्वजों की भांति प्रजा का पालन करते हैं एक दिन परीक्षित जी नगर भ्रमण के लिए जाते हैं रास्ते में वृषभ को देखते हैं जिसके चारों पैर कटे हुए हैं और एक काला कलूटा पुरुष धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए हुए समीप में खड़ा है वृषभ को रुदन करते हुए देख कर परीक्षित जी धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं कलयुग बड़ा ही बुद्धिमान है दौड़ करके परीक्षित के चरणों में लेट जाता है कलयुग के शरणागति करने पर परीक्षित जी कहते हैं कि काल रूपी भयावह दिखने वाले तुम कौन हो और इस वृषभ को क्यों मारना चाहते हो तुम मेरे राज्य को यथाशीघ्र छोड़कर के चले जाओ रुदन करता हुआ कलयुग परीक्षित जी से कहता है हे राजन् संसार में सभी और आपका राज्य व्याप्त हैं मैं कहां जाऊं राजा परीक्षित कहते हैं जो लोग प्रातः काल उठकर दंतधावन नहीं करते हैं सूर्य उदय के बाद तक सोते हैं ऐसी जगह पर जाकर तुम निवास करो।जगद्गुरु जी ने कहा कि जिस- घर में शुद्धता से प्रभु का भोजन नहीं बनाया जाता बर्तन झूठे पड़े रहते हैं ऐसी जगह जाकर तुम निवास करो कलयुग ने कहा हे राजन् यह दोनों जगह तो अत्यधिक निंदनीय है इसलिए एक कोई अच्छी जगह भी मेरे लिए बताइए परीक्षित ने कहा अन्याय से अर्जित स्वर्ण में भी मैं तुम्हें वास देता हूं ऐसा कह कर परीक्षित वन में आगे बढ़ें प्यास से व्याकुल होकर के शमीक ऋषि के आश्रम में प्रवेश किए शमीक ऋषि ध्यान में बैठे थे कली के प्रभाव के कारण याचना करने पर जल नहीं मिलने पर राजेंद्र परीक्षित क्रोधित हो गए मरा हुआ सर्प शमीक ऋषि के गले में डाल दिया शमीक ऋषि के पुत्र श्रंगी स्नान करने के लिए नदी पर गए हुए थे लौट कर जब आश्रम में आए पिता के गले में मरा हुआ सर्प देखकर अत्यधिक क्रोधित हो गए और श्राप दिया जिस व्यक्ति ने भी मेरे पिता श्री का यह अपमान किया है उस व्यक्ति के 7 दिन में तक्षक नाग के काटने से मृत्यु हो जाए। परीक्षित जी ने जैसे ही राजभवन में प्रवेश किया मुकुट को उतार के रखा स्मरण आया कि आज मेरे से बड़ा घोर अपराध हो गया मैंने एक देव ऋषि का अपमान कर दिया है दुखित होकर रुदन करने लगे एक क्षण में अपने राज्य को छोड़ कर के अपराध से मुक्त होने के लिए ऋषि जनों के मध्य गए राजेंद्र परीक्षित के कल्याण हेतु सुखदेव जी महाराज सभा में उपस्थित होकर राजेंद्र परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हैं। यह वही कथा है जिसका श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित का उद्धार हुआ प्रभु भक्त वांछा कल्पद्रुम हैं अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रभु इस संसार में आते हैं 5 वर्ष के अबोध बालक ध्रुव मां सुरुचि से अपमानित होकर वन में गए देव ऋषि नारद से नवधा भक्ति का ज्ञान प्राप्त किया मंत्र दीक्षा ली और तपस्या की ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भक्त ध्रुव को दर्शन देने पृथ्वी पर आते हैं। भगवान श्री हरि का सामीप्य पाकर साधक संसार के सभी सुख प्राप्त कर लेता है भक्त ध्रुव के जैसी अविरल भक्ति यदि साधक के अंदर व्याप्त हो जाए तो इस घोर कलयुग में बी सतयुग का वास हो जाएगा कलयुग में मुक्ति पाने के लिए श्रीमद् भागवत कथा ही और भगवत भक्ति ही उत्तम साधन है सभी भक्तजन कथा का श्रवण कर के आनंदित हो रहे।
: श्रीराम महायज्ञ में लिया गया विश्व शांति का संकल्प: महंत परशुराम दास
Thu, Mar 23, 2023
महायज्ञ में आचार्यों द्वारा अरणी मंथन कर अग्नि देवता को किया गया प्रकट
अयोध्या। कायाकल्पि बर्फानी दादा के आशीर्वाद और सिद्ध पीठ संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज के सानिध्य में जगत कल्याण के लिए चल रहे 9 दिन से श्री सीताराम नाम महायज्ञ में आचार्यों द्वारा अरणी मंथन कर अग्नि देवता को प्रकट किया गया। उनके विधिवत पूजन अर्चन के बाद हवन कुंड में 21000 आहुतियां डाली गई। 30 मार्च प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव तक प्रतिदिन विद्वानों द्वारा आहुतियां डाली जाएंगी।
महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से 2011 से प्रारंभ हुई श्री सीताराम नाम महायज्ञ का यह 12 वर्ष है फैसला आने के बाद यह निर्णय लिया गया की महायज्ञ को बंद नहीं किया जाएगा बल्कि मानव कल्याण और जगत कल्याण के लिए यह अनुष्ठान प्रभु श्री राम लला के जन्मोत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष निरंतर चलता रहेगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्व शांति के लिए भी संकल्प लिया गया है क्योंकि मानवता के ऊपर बहुत बड़ा संकट है विश्व में उथल-पुथल मचा हुआ है जगह-जगह युद्ध हो रहे हैं लोग एक दूसरे को मार काट रहे हैं इसलिए प्रभु श्री राम लला से यह प्रार्थना की गई है कि विश्व में शांति हो और प्रत्येक मनुष्य एक दूसरे के साथ प्रेम भाव से विचरण करें। आचार्य कुलदीप तिवारी,दिलीप तिवारी,अंकित मिश्र सहित 11 वैदिक विद्वानों द्वारा डाली जा रही है आहुतियां।
: प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन से निकली शोभायात्रा
Thu, Mar 23, 2023
श्री माधव भवन में सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद भागवत कथा का हुआ भव्य शुभारंभ
वृंदावन, वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट,ओमकारेश्वर से 151 वैदिक आचार्य श्रीमद्भागवत महापुराण पाठ वश्री रामचरितमानस पारायण वेद पारायण का कर रहे पाठ
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन के भव्य श्री माधव भवन में चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर आयोजित सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। प्रसिद्ध पीठ श्री अशर्फी भवन में देश के विभिन्न स्थानों से श्री वृंदावन, वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट, ओमकारेश्वर से पधारे 151 विद्वानों द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण पाठ नवान व श्री रामचरितमानस पारायण वेद पारायण एवं भगवान का पंचारात्र आगम पद्धति से पूजन अर्चन के साथ-साथ श्रीमद् भागवत कथा का लाइव प्रसारण आस्था भजन मे चल रहा। व्यास पीठ पर विराजित अनंत श्री विभूषित जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा के प्रारंभ में सभी भक्तों को नववर्ष की शुभकामनाएं शुभ आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वैदिक पद्धति से वेद शास्त्रों के मतानुसार हम सभी जीवो को पर्व संवत्सर और त्योहार मनाने चाहिए। इसी से भगवान प्रसन्न होते हैं कथा का प्रारंभ भागवत महात्म्य से किया महाराज श्री ने भागवत का महत्व बताते हुए कहां सत चित आनंद कंद भगवान को हम सब प्रणाम करते हैं। जो सृष्टि कर्ता और सृष्टि पालक हैं ऐसे प्रभु के चरणों में बारंबार प्रणाम जन्म जन्मांतर जब पुण्य उदय होते हैं तभी सप्तपुरीओं में प्रतिष्ठित है श्री अवधपुरी में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त होता है। एक बार मृत्युलोक में भ्रमण करते हुए देवर्षि नारद कर्नाटक गुजरात होते हुए वृंदावन धाम में पहुंचे मूर्छित अवस्था में पड़े हुए ज्ञान वैराग्य और मां भक्ति से मिलन हुआ परोपकारी नारद ने मां भक्ति से ज्ञान वैराग्य के दुख का कारण पूछा नारद जी ने ज्ञान वैराग्य की मूर्छा खोलने हेतु वेद शास्त्रों गीता का पाठ किया लेकिन ज्ञान वैराग्य की मूर्छा नहीं खुली नारद जी बड़े दुखी हुए आकाशवाणी को सुनकर सनत सनंदन सनातन सनत कुमार जी के द्वारा श्रीमद भागवत कथा का श्रवण ज्ञान वैराग्य को कराया। भागवत कथा को सुनकर मूर्छित अवस्था में पढ़े हुए ज्ञान वैराग्य की निद्रा भंग हो गई नृत्य करने लगे चिंता मणि को पाकर केवल लौकिक सुख प्राप्त कर सकते हैं। कल्पवृक्ष स्वर्ग में सुख दिला सकता है लेकिन सद्गुरु की कृपा यदि जीवन में हो जाए तो वैकुंठ की प्राप्ति होती है। आत्म देव और धुंदली की कथा श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा प्रेत रूप में पढ़े हुए धुंधकारी के उद्धार के लिए गोकर्ण जी ने गया में श्राद्ध किया तिलांजलि दान किया लेकिन धुंधकारी को मुक्ति नहीं मिली वेद विद्या के ज्ञाता गोकर्ण जी ने श्रीमद् भागवत कथा का समायोजन किया भागवत कथा को श्रवण करके प्रेत रूप में पड़े हुए धुंधकारी की मुक्ति हो गई श्रीमद् भागवत कथा प्रेत पीड़ा विनाशिनी है। भागवत के प्रमुख श्रोता राजेंद्र परीक्षित के जन्म की कथा का इतिहास बताते हुए महाराज श्री ने कहा भगवान शरणागत की रक्षा करते है उत्तरा के गर्भ में भगवान अश्वत्थामा के द्वारा चलाए गए ब्रह्मास्त्र से राजेंद्र परीक्षित की रक्षा करते है जन्म जन्मांतरों के जब पुण्य उदय होते हैं। तब श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त होता है। वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे हुए सभी भक्तजन श्री अवध धाम में भागवत कथा का रसपान करके अपने जीवन को कृतार्थ कर रहे हैं। कथा का समय मध्यान्ह 3 बजे से शाम 7 बजे तक है।