: विपत्ति में भी जो अपने धैर्य का त्याग न करे वह धीर पुरुष कहा जाता: विद्याभास्कर
Fri, Mar 24, 2023
कोशलेशसदन मंदिर के सभागार रामानुजीयम में राम कथा की हो रही अमृत वर्षा
अयोध्या। नौ दिवसीय रामनवमी मेले के तीसरे दिन रामनगरी के दर्जनों मंदिरों में चल रही रामकथाओं में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। कोशलेशसदन मंदिर राम जन्म महोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा है।
कोशलेशसदन मंदिर के सभागार रामानुजीयम में कथा का क्रम आगे बढ़ाते हुए जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर ने रावण के कुत्सित साम्राज्यवाद की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि रावण भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता था और इसके लिए उसने किष्किंधा और यहां के शासक बालि को माध्यम बनाया। यद्यपि बालि बहुत वीर था और रावण को पराजित कर चुका था पर रावण ने कूटनीति का आश्रय लेकर बालि से मित्रता का ढोंग किया। रावण ने बालि से मित्रता की आड़ में किष्किंधा को अपने उपनिवेश के तौर पर विकसित करना शुरू किया। वे भगवान राम थे, जिन्होंने रावण का अंत करने से पूर्व उसकी इस साजिश का उन्मूलन किया।जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी ने अपनी रामकथा के तीसरे सत्र में कहा कि जब भक्त के पास धैर्य की धीरता व संयम का साहस हो तो सुख व आनंद स्वयं पास आ जाते हैं और परीक्षा की घड़ी समाप्त हो जाती है। विपत्ति में भी जो अपने धैर्य का त्याग न करे वह धीर पुरुष कहा जाता है। उन्होंने कहा कि धीरता आत्मा का गुण है। शूरता शरीर का, धीरता आत्मा का व वीरता मन के बल हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम धीरशाली हैं और वे प्रजा के हित को ही अपना हित मानते हैं। बुद्धिमान, मतिमान एवं प्रतिभावान इन तीनों में श्री राघवेंद्र सरकार पारंगत हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम सर्वप्रिय हैं। उनके धैर्य, साहस, संयम, त्याग व प्रेम का हर किसी ने सम्मान किया। कथा श्रवण करने पहुंचे श्रीमहंत धर्म दास महाराज का स्वागत किया गया।
: श्रीराम धर्म के विग्रह हैं: बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य
Fri, Mar 24, 2023
दशरथ राजमहल बड़ा स्थान में श्री सत्यम पीठाधीश्वर नरसिंह दास भक्तमाली जी कर रहे रामकथा की अमृत वर्षा
महोत्सव का दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे
अयोध्या। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में रामजन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। जिसमें व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा सत्यम पीठाधीश्वर नरसिंह दास भक्तमाली जी कर रहे है।इस पूरे आयोजन का दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे है। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीराम धर्म के विग्रह हैं। वे जो करते हैं, कराते हैं अर्थात उनका पूरा जीवन व उसकी क्रियाएं साक्षात धर्म ही हैं। उन्होंने कहा कि धरा धाम से सबसे लंबा अवतार श्रीराम का रहा। उनके जीवन का एक-एक पल आदर्श व मर्यादा का अद्भुत समन्वय है।
: अयोध्या विश्व की सबसे प्राचीनतम नगरी है: शीतल दीदी
Fri, Mar 24, 2023
राम कृष्ण मंदिर में इन दिनों राम जन्मोत्सव की धूम मची है
अयोध्या। रामकोट स्थित राम कृष्ण मंदिर में इन दिनों राम जन्मोत्सव की धूम मची है। पूरे मंदिर में बधाई गायन चल रहा है। मंदिर में रामकथा की अमृत वर्षा महंत शीतल दीदी जी कर रही है। कथाव्यास शीतल दीदी की रामकथा में जैसे ही कथा के दौरान अयोध्या में प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया भये प्रकट कृपाल दिन दयाला के स्वर गूंज उठे। इसके साथ ही दशरथ नंदन कौशल्या नंदन रामलला के जयकारों के साथ गौशाला में मौजूद संत साधक झूम उठा। उन्होंने मुनि शतरूपा जय विजय के साथ नारद चरित्र की कथा भी सुनाई। शीतल जी ने कहा की जीवन में विनम्रता होना जरूरी है और जब आप बड़े हो जाते हैं या बड़े लोगों के साथ रहते हैं तो यह और जरूरी है। बड़ा बनाना या ऊंचे पद पर पहुंचना आसान है लेकिन वहां पर टिके रहना आसान नहीं है। इसके लिए तप चाहिए। बड़े आप बने हो तो आप की परीक्षा तो होगी। रामकृष्ण मंदिर में राम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर रामकथा का दिव्य आयोजन किया गया है। कथा के तृतीय दिवस पर कथा प्रेमियों को कथा का रसास्वादन करा रहे महंत शीतल जी ने कहा कि अवध का अर्थ है अवधि अस्यामिति अवध:।तात्पर्य जिसकी सुन्दरता की सीमा न हो जो अप्रतिम सौन्दर्य सम्पन्न हो वो अयोध्या है।उन्होंने कहा कि युद्ध रहित अपराजेय और असीमित सौन्दर्य से युक्त इस नगरी की शोभा अनुपमेय है।इसे विश्व की सबसे प्राचीनतम नगरी होने का गौरव प्राप्त है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया।यह महोत्सव महामंडलेश्वर गणेशानंद महाराज के संयोजन में हो रहा है।