: रामानंद सम्प्रदाय की ध्वाजा देशभर में फहराई
Thu, Sep 21, 2023
संत,धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को देगे श्रद्धांजलि, स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी होगी चर्चा
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो अपना संपूर्ण जीवन भगवत भजन में ही समर्पित कर दिया उन संतों में एक के परम पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज। हरिधाम गोपाल पीठ स्वामीजी की तपोस्थली आज भी अपने वैभव को समेटे हुए आध्यात्मिकता को चार चांद लगा रहा है। रामनगरी का आध्यात्मिक जगत जिन आचार्यों से आलोकित है उनमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज एक है। विशिष्टताद्वौत के साथ-साथ श्री हनुमत उपासना का अद्भुत संयोग उनके व्यक्तित्व का आभूषण था। उन्होंने जगद्गुरु के रूप में देश में दशकों तक रामानंद संप्रदाय की ध्वजा फहराई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी को शुक्रवार को उनकी 16वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। श्री हरिधाम गोपालपीठ मंदिर स्थित उनकी तपोस्थली पर पुण्यतिथि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संत- धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को अपनी श्रद्धांजलि देगें। इस अवसर पर स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी चर्चा होगी।
सिद्धार्थनगर जिले में मघा नक्षत्र में जन्मे बालक हरिनाथ त्रिपाठी किशोरावस्था में अयोध्याजी आ गये। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत रामबालक दास जी महाराज के शिष्य के रूप में वेद, वेदांत एवं व्याकरण में विशिष्टता हासिल की। कर्मकांड, ज्योतिष, वाल्मीकि रामायण, गीता व गोस्वामी तुलसीदास के द्वादश ग्रंथों का वे अध्यापन भी शिक्षार्थियों को कराते रहे।उन्होंने अयोध्या के कई संस्कृत विद्यालयों में प्राचार्य पद को सुशोभित किया। भगवान सीताराम जी की आराधना व हनुमान जी की सेवा उनके चिंतन में सदैव रची-बसी रही। स्वामी हर्याचार्य जी को सन् 1989 के प्रयाग कुंभ में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विभूषित किया गया।
महाराज श्री ने हनुमत कवच व ब्रह्मासूत्र, गीता भक्ति दर्शन का 12वां अध्याय, वेदों में अवतार रहस्य, श्री संप्रदाय दर्शन तथा श्रीरामचरित मानस में वैदिकत्व सहित दो दर्जन पुस्तकों की रचना कर हिंदू धर्म-संस्कृति को समृद्ध किया। सन् 2008 में भाद्र शुक्ल सप्तमी उनका साकेतवास हुआ। उनके उत्तराधिकारी रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते हैं कि महाराज श्री नारियल सदृश थे। यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी। महाराज के सिद्धांतों का अनुसरण करते जीवन जाय, यही प्रार्थना श्री हनुमान जी से अनवरत होती रहती है।
: गुरु सेवा के नायक महंत संजय दास का जन्म दिन मना सेवा दिवस के रुप में
Thu, Sep 21, 2023
संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मनाया सेवा दिवस,अंध विद्यालय, वृद्धा आश्रम, कुष्ठ आश्रम में फल अन्न व वस्त्र किया गया वितरण
महंत संजय बाबा का जन्म दिवस का उद्देश्य गरीबों असहायों व दीन दुखियों के सेवा से जुड़ा रहा: पुजारी हेमंत दास
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्ताराधिकारी संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास के जन्मदिन को संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास जी ने विशाल सेवा दिवस के रुप में मनाया। इस सेवा दिवस के मूल में गरीबों असहायों व दीन दुखियों के सेवा से जुड़ा रहा। जिसमें सबसे पहले हनुमानगढ़ी पर विशेष पूजा अर्चना किया गया और हनुमत यज्ञशाला के हवन कुंड में आहुतियां डाली गई। इसके बाद कनक बिहारी सरकार का पूजन हुआ। इसके बाद श्रीराम अस्पताल में भर्ती मरीजों को फल वितरण किया और उनका हालचाल जाना,वृद्धा आश्रम पहुंचकर वृद्ध महिलाओं को फल वितरण किया गया और विकलांग अंध विद्यालय में विकलांगों की सेवा की गई। सेवा दिवस में अनवरत चल रहे श्री ज्ञान अन्नक्षेत्र को और भी भव्य वृहद रुप से आज संचालित किया गया। इसके बाद बाकायदा भगवताचार्य स्मारक सदन में गोष्ठी व विशाल भंडारे का भव्य आयोजन किया गया।जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संतों ने महंत संजयदास को आशीर्वाद दिया।
सेवा दिवस के प्रणिता गुरु सेवा के नायक आदर्श संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि सनातन धर्म का मूल मंत्र सेवा है। यही हम अपने परम पूज्य गुरुदेव महंत ज्ञान दास जी महाराज से सीखे है। आज हम जो भी कुछ है वो पूज्य गुरुदेव भगवान के कृपा से है। इसलिए आज अपने जन्म दिवस पर हम सभी लोग सेवा दिवस के रुप में मना रहें है।निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्री महंत मुरली दास ने कहा संकट मोचन सेना का मुख्य उद्देश्य सेवा है। महंत संजय दास बहुत बधाई के पात्र है आज समाज में सेवा प्रकल्प की वजह से लोगो के दिलो में संजय दास ने जगह बनाया है। रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि संजय दास नये साधुओं के लिए एक मिशाल है। रामानंद सम्प्रदाय में सेवा ही परिचय है। बड़ा भक्त माल के महंत अवधेश दास महाराज महंत संजय दास को बधाई देने पहुंचे। बधाई देते हुए महंत अवधेश दास ने कहा सनातन धर्म की ध्वज पताका फहराने में हनुमानगढ़ी के संतो का विशेष योगदान रहा है। आज इसका नेतृत्व महंत संजयदास जी कर रहें है। महंत संजयदास जी की गुरु सेवा बहुत ही अनुकरणीय है। आज के साधु संत इनसे सीखे कि कैसे अपने गुरु की सेवा करनी चाहिए। आज हम सभी इस सेवा दिवस के शामिल होकर लोगों की सेवा कर रहें है।
गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास ने कहा संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास महाराज निरंतर उत्तरोत्तर अयोध्या में सेवा का कार्य करते रहे है। इनका जन्मोत्सव सेवा महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है वह बहुत ही सराहनीय है और मैं आशा करता हूं की निरंतर यह सेवा का कार्य अयोध्या की धरती से पूरे भारत में चलता रहेगा।संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने कहा मैं हनुमान जी से निवेदन करता हूं दिन प्रतिदिन पूज्य महंत संजय बाबा जी के ऊर्जा और उत्साह में संवर्धन करते रहें जिससे निरंतर समाज में सेवा का कार्य चलता रहे। हम सभी का संजय बाबा सदैव मार्गदर्शन ऐसे ही करते रहें जिससे लोगों की सेवा ऐसे रोती रहें। इस मौके पर इस मौके पर जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, महंत जनार्दन दास, महंत हरिभजन दास, महंत मनीष दास, कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र करण भूषण शरण सिंह,महंत रामदास, महंत छविराम दास, महंत अजीत दास, महंत सत्यदेव दास, प्रेम मूर्ति कृष्णकांत दास,अंकित दास, शिवम जी, कल्लू जी, अभिषेक दास, विराट दास, अभय दास, संगीतज्ञ राजूजी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
: मानवता व अध्यात्म का संदेश दे रहा स्वामी नारायण सम्प्रदाय
Tue, Sep 19, 2023
मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया
नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को बढ़ा रहे आगे
सनातन धर्म की ध्वज पताका लहरा रहा स्वामी नारायण सम्प्रदाय: अखिलेश्वर दास
अयोध्या। भगवान स्वामीनारायण के जन्म स्थली छपिया है जहां पर भगवान का जन्म हुआ तो अयोध्या में भगवान स्वामीनारायण का बाल्यकाल की लीला की। वैसे भी अयोध्या को सभी तीर्थों का मस्तक कहा जाता है। ऐसे में स्वामी नारायण सम्प्रदाय जिसका डंका आज पूरे विश्व में फैला है।
स्वामी नारायण सम्प्रदाय का स्वर्णिम इतिहास बिना नर नारायण देव गादीपति आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद सम्भव ही नही है। महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी ने स्वामी नारायण सम्प्रदाय का डंका न सिर्फ भारत अपितु पूरी दुनिया में बजाया है। मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के बारे में लोगो को रुबरु कराया। गुजरात के गलियों गलियो में घर घर जाकर भगवान स्वामी नारायण जी की महिमा का गुणगान कर लोगो को सम्प्रदाय से जोड़ा। आज वर्तमान में उनके बेटे नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज उनकी विरासत को समेटे हुए सम्प्रदाय को आगे बढ़ा रहे है। अयोध्या के समीप गोंडा की अलख गुजरात तक पहुंच कर पूरी दुनिया को मानवता व अध्यात्म का संदेश देने वाले स्वामी नारायण सम्प्रदाय के आराध्यदेव बाल स्वरूप घनश्याम प्रभु की जन्मस्थली छपिया से 60 किलोमीटर दूर रामनगरी अयोध्या में नूतन भव्य भवन का निर्माण है जो स्वामी नारायण मंदिर रायगंज के नाम से सुप्रसिद्ध है।
स्वामीनारायण का जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप में हुआ था। 1792 में उन्होंने नीलकंठ वर्णी नाम को अपनाते हुए 11 वर्ष की आयु में भारत भर में सात साल की तीर्थ यात्रा शुरू की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कल्याणकारी गतिविधियां की और इस यात्रा के 9 वर्ष और 11 महीने के बाद वह 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में उन्हें अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हें साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया। 1802 में अपने गुरु के द्वारा उनकी मृत्यु से पहले उन्हें उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया गया। सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजित की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से वह स्वामीनारायण के रूप में जाने जाते हैं। उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप में जाना जाता है।सम्प्रदाय के विभिन्न ऐतिहासिक मठ मंदिर आज अपने आराध्य के प्रति अपनी आस्था को प्रदर्शित कर रहा हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय आज अपने शिखर पर है ऐसे में राम नगरी अयोध्या का स्वामीनारायण मंदिर अपनी सेवा त्याग के लिए जानी जाती है। अयोध्या के स्वामीनारायण मंदिर के महंत स्वामी शास्त्री अखिलेश्वर दास जी कहते है भगवान श्री स्वामी नारायण जी महाराज अयोध्या में बाल लीला किए थे क्योंकि उनका जन्म स्थान अयोध्या से लगभग 60 किलोमीटर दूर गोंडा स्थित छपिया नामक स्थान पर हुआ था। वर्तमान समय में स्वामीनारायण मंदिर के संस्थान पूरे देश के सभी धार्मिक स्थलों पर विद्वान हैं। शास्त्री अखिलेश्वर दास जी महाराज ने बताया कि श्री स्वामीनारायण संप्रदाय सनातन धर्म को हमेशा मजबूत करने के साथ विस्तार का काम कर रहा है और स्वामीनारायण संप्रदाय सनातन धर्म से अलग नहीं है वर्तमान समय में जितनी भी कवायत सनातन धर्म को लेकर के समाज में छिड़ी हुई हैं इससे हमें आपस में लड़ने से लोग कमजोर करेंगे और सभी संप्रदाय और पंथ सनातन धर्म से ही निकले हैं कहीं ना कहीं उनका भी केंद्र बिंदु सनातन धर्म ही है और उन्होंने बताया कि ढाई सौ वर्ष पहले स्वामी रामानंद महाराज के शिष्य घनश्याम जी महाराज स्वामी नारायण संप्रदाय को समाज की सेवा के लिए स्थापित किया जो वर्तमान समय में पूरे भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने में सेवा के लिए जाना जाता है वर्तमान समय में श्री महाराज जी के बाद सातवीं पीढ़ी स्वामी नारायण संप्रदाय का संचालन कर रही है।स्वामी नारायण मंदिर रायगंज मे आचार्य मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद व नर नारायण देव गादीपति आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज के सानिध्य में मंदिर अपने शिखर की ऊचाई को छूएगा। मंदिर में जो सेवाएं यहां चलती हैं वह निरंतर चलती रहेगी।