: जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य परम तपस्वी, युगांतकारी दार्शनिक एवं समन्वयवादी संत थे: महंत जगदीश दास
Sat, Feb 3, 2024
भक्ति आंदोलन के प्रणेता एवं श्री रामानंद संप्रदाय के प्रवर्तक जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य जयंती पर हनुमान बाग में हुआ विशाल भंडारा
अयोध्या। 14वीं सदी के वैष्णव भक्ति के कवि संत जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामानंदाचार्य की जयंती आज रामनगरी में बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में आचार्य श्री की जयंती पर विशाल भंडारे के साथ रामानन्दी संतों का अभिनन्दन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हनुमान बाग पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि युगांतकारी व समन्वयवादी जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य की जयंती आज हम लोग मना रहें है।उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रणेता एवं श्री रामानंद संप्रदाय के प्रवर्तक जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य परम तपस्वी, युगांतकारी दार्शनिक एवं समन्वयवादी संत थे। उनका जन्म 14वीं शताब्दी में माघ कृष्ण सप्तमी को प्रयागराज के धर्मनिष्ठ कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में हुआ था। प्रारंभ में उनका नाम रामदत्त था। वह बाल्यावस्था से ही अत्यंत विलक्षण प्रतिभा संपन्न थे। उन्हें 5 वर्ष की आयु में ही 'वाल्मीकि रामायण एवं 'श्रीमद्भगवदगीता' आदि ग्रंथ कंठस्थ हो गए थे। महंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि संत कबीर को काशी में कोई संत-महात्मा नाम दीक्षा देने के लिए तैयार नहीं था। अत: वह ब्रह्ममुहूर्त में पंचगंगा घाट की सीढिय़ों पर आकर लेट गए। रामानंदाचार्य जब तड़के गंगा स्नान हेतु जा रहे थे तो उनके पैर अंधेरे में संत कबीर पर पड़ गए। उन्होंने कबीर को उठाकर अपने गले से लगा लिया। संत कबीर ने रामानंदाचार्य महाराज से दीक्षा प्राप्त करने के बाद जाति-पांति, ऊंच-नीच, पाखंड और अंधविश्वासों का आजीवन पुरजोर विरोध किया। महंत जी ने कहा कि जगद्गुरू जी इस बात को भी स्वीकार किये कि उन्हें यह शक्ति अपने गुरुदेव से ही प्राप्त हुई है। वह कहा करते थे कि 'कासी में हम प्रगट भये, रामानंद चेताये। उन्होंने अपनी साखियों में प्रभु से अधिक अपने गुरु की महत्ता का गायन किया। स्वामी रामानंदाचार्य के अंतज शिष्यों में संत कबीर एवं सवर्ण शिष्यों में स्वामी अनंताचार्य प्रमुख थे। इसके अलावा उनके शिष्यों में रैदास, पीपा, सुखानंद, सुरसुरानंद, पद्मावती, नरहरि, भगवानंद, धन्नाभगत, योगानंद, अनंतसेन एवं सुरसरि आदि भी थे। आज के कार्यक्रम की व्यवस्था में पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री समेत हनुमान बाग सेवा संस्थान के शिष्य परिवार कर मौजूद रहें।
: रामानंदाचार्य महाराज वैष्णव भक्तिधारा के महान संत थे: विंदुगाद्याचार्य
Sat, Feb 3, 2024
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व संतों ने जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य महाराज को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया
हनुमत संस्कृत महाविद्यालय हनुमानगढ़ी के प्राचार्य डॉ. महेश दास ने किया ऐलान रामानन्द सम्प्रदाय के लिए संकट मोचन सेना हमेशा तैयार
अयोध्या। अयाेध्याधाम के सब्जी मंडी समीप स्थित भगवदाचार्य स्मारक भवन में शुक्रवार को जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य महाराज की 724वीं जयंती हर्षोल्लास पूर्वक मनाई। सर्वप्रथम स्वामी रामानंदाचार्य के चित्रपट पर दीप प्रज्लवन संग कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आयाेजित संगाेष्ठी की अध्यक्षता करते हुए दशरथ महल विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने कहा कि जगद्गुरू स्वामी रामानंदाचार्य महाराज वैष्णव भक्तिधारा के महान संत थे। उन्होंने हिन्दू धर्म को संगठित-व्यवस्थित करने का अथक प्रयास और वैष्णव संप्रदाय को पुनर्गठित किया। वैष्णव साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया। जिनके शिष्य संत कबीर व रविदास जैसे संत रहे हों। तो वह कितने महान रहे होंगे। धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के उत्तराधिकारी एवं संकटमोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास महाराज ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य महाराज का जन्म माघ माह की सप्तमी संवत 1356 अर्थात ईस्वी सन् 1300 को कान्यकुब्ज ब्राह्मण कुल में हुआ था। इनके पिता का नाम पुण्य शर्मा तथा माता का नाम सुशीला देवी रहा। उन्होंने वाराणसी पंच गंगाघाट के स्वामी राघवानंदाचार्य से दीक्षा प्राप्त किया। तपस्या तथा ज्ञानार्जन के बाद बड़े-बड़े साधु व विद्वानों पर उनके ज्ञान का प्रभाव दिखने लगा। यदि हम सभी उनके जीवन दर्शन को आत्मसात कर लें। तो हमारे देश व समाज की अनेक बुराइयों का खात्मा हो जायेगा। जगद्गुरू स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य महाराज ने भारतीय वैष्णव भक्ति धारा को पुनर्गठित किया। उन्होंने भक्ति के जिस विशिष्टाद्वैत सिद्धांत का प्रवर्तन किया। उसके बारे में कहा जाता है कि उसकी प्रेरणास्रोत मां जानकी हैं। हनुमत संस्कृत महाविद्यालय हनुमानगढ़ी के प्राचार्य डॉ. महेश दास ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य महाराज ने विभिन्न मत-मतांतरों एवं पंथ-संप्रदायों में फैली वैमनस्यता को दूर करने के लिए समस्त हिंदू समाज को एक सूत्र में पिरोया। साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को अपना आदर्श मानकर सरल राम भक्ति के मार्ग को प्रशस्त किया। रामचरितमानस विद्यापीठ के महंत कमलादास रामायणी ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य की शिष्य मंडली में जहां जाति-पांति, छुआ-छूत, वैदिक कर्मकांड, मूर्ति पूजा आदि के कट्टर विरोधी निर्गुण संत थे। तो वहीं दूसरी ओर अवतारवाद के पूर्ण समर्थक सगुण उपासक भी रहे। वह अपने 'तारक मंत्र की दीक्षा पेड़ पर चढ़कर दिया करते थे, ताकि वह सभी जाति-संप्रदायों व मत-मतांतरों के लोगों के कानों में पड़ सके। उनका कहना था कि 'जाति-पांति पूछे नहि कोई, हरि को भजे सो हरि का होई। उन्होंने आजीवन भक्ति और सेवा का संदेश दिया। संगाेष्ठी में निर्वाणी अनी के श्रीमहंत मुरली दास, खाकचाैक श्रीमहंत बृजमोहन दास, महंत अयोध्या दास, महंत रामकृष्ण दास रामायणी, महंत रामअवतार दास रामायणी, महंत नव्यन्यायाचार्य तुलसीदास, कथावाचक भगवान शरण, आचार्य सत्यदेव दास, महंत सियाराम शरण, महंत रामजी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस माैके पर हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, पहलवान राजेश दास, पहलवान मनीराम दास, महंत रामपत दास, प्रेममूर्ति कृष्णकांत दास, शिवम श्रीवास्तव, महेंद्र त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।
: सपा ने अवधेश प्रसाद को बनाया लोकसभा प्रत्याशी
Wed, Jan 31, 2024
पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
अयोध्या। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव की पहली लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में फैजाबाद लोकसभा सीट से मुलायम के साथी रहे अवधेश प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है। अवधेश प्रसाद ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व ने उन पर विश्वास जताया है. इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का आभार है. इसके साथ ही फैजाबाद लोकसभा सीट को लेकर अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह सीट भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में जानी जाती है. इस पर मुझे समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया है. मैं शीर्ष नेतृत्व अखिलेश यादव को धन्यवाद देता हूं. इसके साथ ही अवधेश प्रसाद ने कहा कि फैजाबाद की जनता की सेवा करना मर्यादा की नगरी में मर्यादा के साथ विकास प्राथमिकता रहेगी।राष्ट्रीय अध्यक्ष ने टिकट दिया है वही अवधेश प्रसाद ने कहा कि मै इतिहास कायम करूंगा जिसमें बेरोजगारों, गरीबों और सभी समाज के लोगों के लिए निरंतर काम करूंगा। उन्होंने कहा कि मेरे रोम रोम में राम है उन्हीं की कृपा से मैं फ़ैजाबाद सीट से 9 बार के विधायक औऱ 6 बार मंत्री रहा चुका हूँ। बता दे कि मूलरूप से सोहावल तहसील क्षेत्र के गौहनिया सुरुवारी के रहने वाले अवधेश प्रसाद ने वर्ष 1977 में जनता पार्टी के बैनर तले सियासत की शुरूआत की थी. तब जनपद की सुरक्षित विधासभा रही सोहावल विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की..फिर वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद सोहावल सु. विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व खत्म हुआ और मिल्कीपुर विधानसभा को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया तो अवधेश प्रसाद ने मिल्कीपुर को अपनी सियासी जमीन बनायी। वर्ष 2012 की सपा लहर में मिल्कीपुर क्षेत्र से विधायक चुने गये और कैबिनेट मंत्री भी बने. हालांकि वर्ष 2017 की बीजेपी लहर में सियासत के महारथी माने जाने वाले प्रसाद अपनी सीट बचा नहीं सके और हार का स्वाद चखना पड़ा, लेकिन उस हार को प्रसाद ने 2022 में जीत में बदल नौवीं बार विधायक बन गये।