Monday 7th of September 2026

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: जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य परम तपस्वी, युगांतकारी दार्शनिक एवं समन्वयवादी संत थे: महंत जगदीश दास

बमबम यादव

Sat, Feb 3, 2024

भक्ति आंदोलन के प्रणेता एवं श्री रामानंद संप्रदाय के प्रवर्तक जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य जयंती पर हनुमान बाग में हुआ विशाल भंडारा

अयोध्या। 14वीं सदी के वैष्णव भक्ति के कवि संत जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामानंदाचार्य की जयंती आज रामनगरी में बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में आचार्य श्री की जयंती पर विशाल भंडारे के साथ रामानन्दी संतों का अभिनन्दन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हनुमान बाग पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि युगांतकारी व समन्वयवादी जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य की जयंती आज हम लोग मना रहें है।उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रणेता एवं श्री रामानंद संप्रदाय के प्रवर्तक जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य परम तपस्वी, युगांतकारी दार्शनिक एवं समन्वयवादी संत थे।  उनका जन्म 14वीं शताब्दी में माघ कृष्ण सप्तमी को प्रयागराज के धर्मनिष्ठ कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में हुआ था। प्रारंभ में उनका नाम रामदत्त था। वह बाल्यावस्था से ही अत्यंत विलक्षण प्रतिभा संपन्न थे। उन्हें 5 वर्ष की आयु में ही 'वाल्मीकि रामायण एवं 'श्रीमद्भगवदगीता' आदि ग्रंथ कंठस्थ हो गए थे। महंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि संत कबीर को काशी में कोई संत-महात्मा नाम दीक्षा देने के लिए तैयार नहीं था। अत: वह ब्रह्ममुहूर्त में पंचगंगा घाट की सीढिय़ों पर आकर लेट गए। रामानंदाचार्य जब तड़के गंगा स्नान हेतु जा रहे थे तो उनके पैर अंधेरे में संत कबीर पर पड़ गए। उन्होंने कबीर को उठाकर अपने गले से लगा लिया। संत कबीर ने रामानंदाचार्य महाराज से दीक्षा प्राप्त करने के बाद जाति-पांति, ऊंच-नीच, पाखंड और अंधविश्वासों का आजीवन पुरजोर विरोध किया। महंत जी ने कहा कि जगद्गुरू जी इस बात को भी स्वीकार किये कि उन्हें यह शक्ति अपने गुरुदेव से ही प्राप्त हुई है। वह कहा करते थे कि 'कासी में हम प्रगट भये, रामानंद चेताये। उन्होंने अपनी साखियों में प्रभु से अधिक अपने गुरु की महत्ता का गायन किया। स्वामी रामानंदाचार्य के अंतज शिष्यों में संत कबीर एवं सवर्ण शिष्यों में स्वामी अनंताचार्य प्रमुख थे। इसके अलावा उनके शिष्यों में रैदास, पीपा, सुखानंद, सुरसुरानंद, पद्मावती, नरहरि, भगवानंद, धन्नाभगत, योगानंद, अनंतसेन एवं सुरसरि आदि भी थे। आज के कार्यक्रम की व्यवस्था में पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री समेत हनुमान बाग सेवा संस्थान के शिष्य परिवार कर मौजूद रहें।

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