: मुझे नहीं लगता था कि यज्ञ होगा लेकिन कनक बिहारी जी की प्रेरणा ने दिखा दिया : चंपत राय
Fri, Feb 16, 2024
कनक बिहारी महाराज की प्रेरणा और रघुवंशी समाज की संकल्प शक्ति,अभूतपूर्व साहस एवं उत्साह से यज्ञ पूर्णता की ओर है।
रामकथा श्रवण करते रघुवंशी समाज के रामभक्त
अयोध्या। यज्ञ सम्राट कनकबिहारी दास जी महाराज ने जब पहली बार अयोध्या में मुझ से यज्ञ के संबंध में चर्चा की थी तो मुझे एक पल के लिए ही विश्वास नहीं हो रहा था कि यह दुबला पतला साधु अयोध्या में विराट महायज्ञ को संपन्न करेगा। भले ही महाराज जी का शरीर अब मौजूद नहीं है, लेकिन आज उनकी प्रेरणा और रघुवंशी समाज की संकल्प शक्ति,अभूतपूर्व साहस एवं उत्साह से यज्ञ पूर्णता की ओर है। यह बात शुक्रवार को अयोध्या की बड़ी छावनी परिक्रमा मार्ग में आयोजित हो रहे रघुवंशी समाज के 2121 कुंडीय श्री राम महायज्ञ के कथा मंच से धर्म सभा को संबोधित करते हुए राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कही।इस मौके पर यज्ञ समिति की ओर से जगतद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी कामदगिरि पीठाधीश्वर चित्रकूट रामस्वरूपाचार्य महाराज ने चंपतराय का पुष्प मालाओं और शाल से सम्मान किया। उन्होंने कहा कि रामलाल का यह मंदिर एक व्यक्ति का नहीं नहीं बल्कि आप सबका है। आज अयोध्या में 3000 से अधिक मंदिर हैं लेकिन भगवान राम ने जहां जन्म लिया है वह सिर्फ एक है और वह रामलला का भव्य और दिव्य मंदिर है जिसे आप सब सनातनियों की लड़ाई से संवैधानिक तरीके से प्राप्त किया गया है। सप्त दिवसीय श्री राम कथा को संबोधित करते हुए कामदगिरि पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कथा मंच को संबोधित करते हुए कहा कि संतान को मरते समय संपत्ति नहीं, बल्कि संस्कार देना चाहिए। बाली ने मरते समय अपने पुत्र अंगद को राज्य ना सौंपकर,बल्कि राम के हाथ में सौंप दिया,जिसके कारण आज रामायण में अंगद श्रद्धा के पात्र हैं। यज्ञ समिति के मीडिया प्रभारी देवेंद्र रघुवंशी ने बताया कि कथा के दौरान बड़ा भक्तमाल के वयोवृद्ध महंत कौशल किशोर दास महाराज, सोनकच्छ से ब्रह्मचारी मनोहर दास, महंत रामकिशोर किशोर महाराज, कथा वाचिका रमाकिशोरी, कनकधाम के महंत श्यामदास महाराज,लखनदास छोटे बाबा, लालदास बाबा,पटेल बाबा, आचार्य प्रेम नारायण शास्त्री बनारस आचार्य विवेक मिश्र सहित अयोध्या के अन्य संत मंच की शोभा बढ़ा रहे थे।
: महात्मा 18 वर्षों तक लगातार पंचाग्नि तपस्या का लेता है संकल्प: महंत परशुराम दास
Fri, Feb 16, 2024
श्री संकट मोचन हनुमान किला में संतों ने पंचाग्नि तपस्या अनुष्ठान को समारोह पूर्वक किया प्रारंभ
धूनी थापते करते त्यागी संत
अयोध्या। अयोध्या तपस्या की भूमि है, यहां पर अनेक तपस्वी संत हुए है। जिन्होंने अपने जप तप के बल पर पूरी दुनिया में अपने प्रभुत्व को स्थापित किया है। वैष्णो त्यागी संतो महात्माओं में पंचाग्नि में बैठकर साधना करने का बहुत महत्व है। यह साधना बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर गंगा दशहरा तक चलती है।जो महात्मा पंचाग्नि तपस्या का संकल्प लेता है, उसे यह तपस्या 18 वर्षों तक लगातार करनी होती है। किसी कारण बस एक भी दिन खंडित होने पर पुनः यह प्रक्रिया एक से प्रारंभ होकर 18 वर्षों तक चलेगी। यह साधना खुले आसमान में होती है इसमें अपने चारों तरफ आग का गोला बनाकर सर पर अग्नि रखकर जपतप अनुष्ठान करना होता है। अयोध्या में त्यागी संतो के आश्रमों में बसंत पंचमी के पावन तिथि से अनुष्ठान प्रारंभ हो गया है। इसी क्रम में धर्मपथ पर स्थित श्री संकट मोचन हनुमान किला में संतों ने पंचाग्नि तपस्या अनुष्ठान को प्रारंभ कर दिया है जो प्रतिदिन सुबह लगभग 10 बजे इस तपस्या में बैठते हैं और जब सूर्य भगवान अपनी पूर्ण ऊष्मा प्रदान करते हैं, तब तक यह तपस्या करते हैं माघ मास से प्रारंभ होकर यह तपस्या फागुन चैत्र वैशाख ज्येष्ठ मास में जब सूर्य भगवान पृथ्वी पर सबसे अधिक उसका प्रदान करते हैं उसे समय भी यह तपस्या होती है और इसका विश्राम बरसात प्रारंभ होने के पहले गंगा दशहरा के अवसर पर समापन किया जाता है पुनः अगले वर्ष बसंत पंचमी से यह तपस्या प्रारंभ होती है।
अवध उत्थान समिति के अध्यक्ष पंचाग्नि साधक संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास ने बताया कि श्रीसंकट मोचन हनुमान किला मंदिर में बसंत पंचमी को लगभग आधा दर्जन संतों ने संकल्प के साथ पंचाग्नि तपस्या का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इसको संतों की भाषा में धूनी तपस्या भी कहा जाता है और जब ठंड का मौसम समाप्त होता है। बसंत ऋतु प्रारंभ होती है और वर्षा ऋतु तक यह तपस्या की जाती है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में दर्जनों संत इस तपस्या को करते हैं और कई संत तो ऐसे हैं जो एक बार 18 वर्ष का संकल्प पूरा करके दूसरी बार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुरुदेव भगवान और प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से मैं भी यह साधना कर रहा हूं और इसका विश्राम गंगा दशहरे के दिन सभी संत मां सरयू के पूजन हवन यज्ञ तर्पण के साथ करते हैं।
: उदासीन संगत ऋषि आश्रम में लगी आग, सामान खाक
Fri, Feb 16, 2024
महंत डॉ भरत दास के कमरे में लगी आग,सूचना पाते ही पंजाब गए श्रीमहंत वापस लौटे
अयोध्या। उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली में श्रीमहंत डॉ भरत दास के कमरे में अज्ञात कारणों से आग लग गई। मठ में मौजूद लोगों को जब तक मामले की जानकारी होती तब तक कमरे में मौजूद रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया। फायर ब्रिगेड के पहुंचने के पहले लोगों ने आग पर काबू पा लिया। जानकारी मिलने पर एसपी एसपी सिटी और कोतवाल सहित फायर विग्रेट के अधिकारी पहुंचे। महंत ने बताया कि वे कुछ दिन पहले वे पंजाब में गए थे। उनका कमरा पूरी तरह बंद था। बुधवार की रात लगभग एक बजे अज्ञात कारणों से आग लग गई। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी उन्हें शिष्यों द्वारा मिली तो वह तत्काल अयोध्या के लिए निकल पड़े। उन्होंने बताया आज के कारण कुछ महत्वपूर्ण चीजें जल गई हैं। इधर मठ में मौजूद लोगों ने प्रांगण में लगे सबमर्सिबल के माध्यम से आग पर काबू पाया। महंत ने आग लगने का अंदेशा सीसीटीवी कैमरे की लगे वायर में शॉर्ट सर्किट बताया है।