Wednesday 6th of May 2026

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श्रद्धालुओं के साथ हर किसी आमजन को हनुमानजी महाराज का दिव्य प्रसाद भोजन के रुप मे उपलब्ध करा रहें महंत बलराम दास

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: रामजन्म के दिन अयोध्या में तीर्थों का कुंभ लगता है: स्वामी चिदम्बरानन्द

बमबम यादव

Fri, Jan 19, 2024

राम महल वैदेही भवन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में राम कथा की बह रही रसधार, धूमधाम से मनाया गया रामजन्मोत्सव

अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होने के कुछ घंटे शेष है अयोध्या के चारों तरह खुशियां बयां हो रही है। मंदिर में कथा प्रवचन चल रहा है। रामनगरी के राममहल वैदेही भवन में रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से मुम्बई से चलकर आये सनातन धर्म प्रचारक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक व संस्थापक चिद्ध्यानम आश्रम व गौशाला, चिदसाधना साध्यम ट्रस्ट, मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज कथा कह रहें है। कथा के तृतीय दिवस स्वामीजी ने कहा कि मानस में निहित भगवान श्री राम का चरित ,भक्ति भावना ,धर्म निरूपण ,दर्शन ,जीवन दर्शन तथा नीति आदि के हर पृष्ठ पर ऐसे सुंदर पुष्प विद्यमान हैं जिनसे  निरंतर लोकमंगल की मनोहारी सुगंध निकलती रहती है।उन्होंने कहा कि जय और विजय जब रावण और कुम्भकर्ण के रूप में जन्म लेते हैं, तब उसके मूल में अहंकार की प्रधानता है। पर जब प्रतापभानु रावण बनता है, तब उसके मूल में लोभ की मुख्यता है। इसके सांकेतिक तात्पर्य यह है कि गोस्वामीजी मानो व्यक्ति को सावधान कर देना चाहते हैं कि वह यह सोचकर निश्चिन्त न हो जाय कि रावण एक बुरा व्यक्ति था, बल्कि यह जान ले कि रावणत्व किन परिस्थितियों में जन्म लेता है और यदि उसी प्रकार की मनःस्थिति और परिस्थिति हमारे जीवन में आती है, तो हम भी रावण बन सकते हैं। इसी प्रकार रुद्रगणों की गाथा के माध्यम से यह बतलाया गया है कि परदोष-दर्शन से भी रावणत्व का जन्म होता है तथा वृन्दा की गाथा यह प्रदर्शित करती है कि जब व्यक्ति धर्म से प्राप्त शक्ति को अधर्म के संरक्षण में लगाता है, तो उससे भी रावणत्व पैदा होता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन भूमि में निश्चित रूप से यह गौरव का क्षण है जब भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रतीक श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव है ऐसे समय में राम जन्मोत्सव मनाना बड़े सौभाग्य का विषय है।कथाव्यास ने कहा कि जब धारा पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्त अपने सारे संबंधों की रस्सी बनाकर भगवान के चरणाविंद से बांध देता है बांध कर खींच लेता है तो भगवान अपने आप को रोक नहीं पाते और अवतार ग्रहण कर लेते हैं। जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा।

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