कहा, भगवान रामलला के आगमन का जो सुंदर नवविहान हम देख रहे हैं, अद्भुत, अनुपमेय है। हम भाग्यशाली हैं कि हमने भगवान को स्वगृह में प्रवेश करते देखा
गुरुवार की कथा में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी जी का जन्म दिवस बड़ी ही भव्यता के साथ मनाया जाएगा
अयोध्या। भगवान रामलला के विराजमान होने के बाद से ही पूरी रामनगरी में एक गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर आयोजित महोत्सव अब अपने विश्राम की ओर है। राम महल वैदेही भवन में चल रहें भव्य श्री रामकथा महोत्सव समापन की ओर है। कथा के सप्तम दिवस महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज हर घर में परमात्मा के आगमन का जो सुंदर नवविहान हम देख रहे हैं, वह अद्भुत, अनुपमेय है। हम भाग्यशाली हैं कि हमने भगवान को स्वगृह में प्रवेश करते देखा। उन्होंने कहा कि ऐसा लगा, जैसे संपूर्ण भारतवर्ष के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का वैभव अयोध्या में ही उतर आया है, राम आ गए हैं। उत्तरकांड में कहा गया है अमित रूप प्रगटे तेहिकाला जथा जोग मिले सबहि कृपाला।। आज हर घर में परमात्मा के आगमन का जो सुंदर नवविहान हम देख रहे हैं, वह अद्भुत, अनुपमेय है। हम भाग्यशाली हैं कि हमने भगवान को स्वगृह में प्रवेश करते देखा।स्वामीजी ने कहा कि भगवान राम का बालरूप बेहद मनोहारी है। बाल रूप में वह दशरथ जी के आंगन में खेलते हैं। अयोध्या में स्थापित प्रतिमा बाल रूप और उनके युवा रूप के बीच के माधुर्य को प्रकट करती है। भक्तों, पर्यटकों, विद्वान जिज्ञासुओं के लिए अयोध्या-धाम अब दर्शन और शोध का विषय बना रहेगा, क्योंकि 'हरि अनंत' हैं, तो हरिकथा भी 'अनंता' है। पौराणिक-ऐतिहासिक पुनरुद्धार के अब तक के जितने भी कार्यक्रम हुए हैं, रामलला के मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम उन सबसे अनूठा, सबसे भव्य रहा ! मानो जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि । उत्तर दिसि बह सरजू पावनि ।। की जो कल्पना की गई थी, वह साकार हो उठी हो। तुलसीदास जी ने कहा है, जानें बिनु न होइ परतीती। बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती ॥ आज प्रतीति भी हो गई और प्रीत तो ऐसी जगी है कि मन अयोध्या जी से निकलने को तैयार ही नहीं। रामलला का मंदिर हमारे सांस्कृतिक मूल्य-बोध का एक ऐसा स्थल बन रहा है, जहां हम अपने पुरातन इतिहास को सुरक्षित रखते हुए उसे विश्व-गौरव की पराकाष्ठा पर ले जाएंगे। यह स्थल भारत के लिए एक श्रेष्ठ मार्गदर्शक का काम करेगा, जिसके आधार पर हम अपने भारत का नवविहान अर्जित कर पाएंगे।
मुम्बई से चलकर आये सनातन धर्म प्रचारक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक व संस्थापक चिद्ध्यानम आश्रम व गौशाला, चिदसाधना साध्यम ट्रस्ट, मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हमारी संस्कृति में, किसी व्यक्ति के सदाचरण की जितनी भी कल्पनाएं की जा सकती हैं, वे सारे आचरण, वे सारी सत्य-निष्ठाएं प्रभु राम के जीवन में हैं। पराक्रम के साथ क्षमाशीलता, हृदय की सौम्यता और कर्तव्य- पालन में स्व की आहुति देने की मिसाल भी अगर कहीं देखने को मिलती है, तो प्रभु राम के जीवन में ही मिलती है। उनमें जो न्याय है, करुणा है, सद्भाव है, निष्पक्षता है, सहिष्णुता है, वह वर्तमान समाज की आवश्यकता है। हम अहंकार, स्वार्थ, भेदभाव में इतने ज्यादा बहक गए हैं कि हमें न तो अपना बोध है, न अपनी पुरातन संस्कृति का, तो कैसे हमारे अंदर राम आएंगे ? भरत के राम तो उनके अगाध प्रेम के वशीभूत होकर अयोध्या लौट आए थे, हमारे रामलला पांच सौ वर्षों बाद अपने घर में आ गए हैं, लेकिन अपने भीतर उन्हें सही मायने में लाने के लिए हमें भरत जैसा अपना चरित्र बनाना होगा। जिसमें त्याग, संयम होगा, सहनशीलता व सहिष्णुता होगी, सभी लोगों की रक्षा करने का भाव होगा, वही राम को अपने मन मंदिर में बसा सकेगा। गुरुवार की कथा में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी जी का जन्म दिवस बड़ी ही भव्यता के साथ मनाया जाएगा।