: राष्ट्रीय फलक पर शिरोधार्य हुए थे पूज्य किलाधीश जी महाराज
Mon, Mar 18, 2024
26 पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर स्मृति पर्व में संस्थापक आचार्य जी के रचित ग्रन्थों का हुआ पारायण
पाठ करते संत साधक
पारायण पाठ करते किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भंजनानंदी संत हुए हैं। उन्हीं संतो में एक थे रसिकोपासना के आचार्य परमपूज्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज। जिनकी 26वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में मनाया जा रहा है। पुण्यतिथि के पुनीत अवसर पर मंदिर में चल रहें पाठ का पारायण हुआ।
रसोपासना के आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज ग्राम्यांचल की भक्ति धारा से लेकर विश्वविद्यालयीय विचार और आलोचना तक आपकी वाणी ने अपना जादू बिखेरा। एक प्रसंग के अनुसार दक्षिण के वयोवृद्ध विद्वान ने अयोध्या की पहचान की कहा कि स्वामी सीताराम शरण जी वाली अयोध्या स्वाध्याय प्रवचन की वाचिक परम्परा के साथ ही टीका व्याख्या और पद रचना के साथ ही पूर्वाचार्यों के साहित्य का सम्पादन-प्रकाशन भी स्वामी सीताराम शरण जी महाराज का उल्लेखनीय अवदान रहा। चार दशक तक पीठ का सक्रिय आचार्यत्व निभाकर सन 1997 के वसन्त ऋतु में आचार्य श्री का साकेतवास हो गया।
आचार्य श्री की पुण्यतिथि समारोह सोमवार को मनाया जाएगा किलाधीश जी का वैभव पूरे फलक पर रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथली रमण शरण जी कहते है पूज्य गुरुदेव द्धारा रचित ग्रन्थ नाम, महिमा, धाम, महिमा हमारी अमूल्य धरोहर है। जिसका स्वाध्याय निरंतर करते रहते है। पुण्यतिथि के अवसर पर नाम,रुप,लीला व धाम सहित तमाम ग्रन्थों का सस्वर पारायण पाठ किया जा गया। सोमवार पूज्य गुरुदेव का स्मरण पूरे फलक पर रहेगा।
महंत मैथली रमण शरण ने कहा कि तप, स्वाध्याय और शरणागति की विलक्षण स्थितियों का अनुभव करने वाले पूर्वाचार्यों ने शास्त्रों का मथितार्थ कृपापूर्वक सुलभ कराया है। अपने आश्रितवात्सल्य का मान रखते हुये श्रीकिशोरी जू सबको स्वीकार करके प्रभु के सम्मुख कर देती हैं।
पारायण पाठ करते हुए प्रख्यात साहित्यिक हनुमत निवास के पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नन्दनी शरण हनुमत निवास कहते है कि पूज्य किलाधीश महाराज का गायन अद्वितीय रहा उनकी कथा विश्वविद्यालयों से लेकर खेती किसानी करने वालों के लिए रही जो अपने आप में अद्भुत है। व्यवस्था में मंदिर के अधिकारी युवा संत सूर्य प्रकाश शरण लगे हुए है।
: खड़ेश्वरी महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे:महंत रामप्रकाश दास
Mon, Mar 18, 2024
रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष स्वामी दिलीप दास त्यागी महाराज ने आए हुए संत-महंताें का स्वागत-सत्कार किया
अयाेध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्रीरामवैदेही खड़ेश्वरी मंदिर नयाघाट के पूर्वाचार्य महंत भगवान दास खड़ेश्वरी महाराज काे पुण्यतिथि पर संताें ने शिद्दत से याद किया। मंदिर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर संत-महंताें द्वारा श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया। अयाेध्याधाम के विशिष्ट संत-महंताें ने साकेतवासी महंत के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। रविवार की सुबह सर्वप्रथम मंदिर में स्थापित श्रीराम वैदेही जू का पंचामृत, फलाें का रस और सुगंधित औषधियों से अभिषेक-पूजन किया गया। तदुपरांत उन्हें नवीन वस्त्र धारण कराकर भव्य श्रृंगार हुआ। उसके बाद भगवान श्रीराम वैदेही सरकार को छप्पन भाेग लगाकर पूजन-अर्चन, आरती किया गया। तत्पश्चात मठ के पूर्वाचार्यों की आरती उतारी गई। फिर बड़ी संख्या में संत-महंत, भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया। अंत में श्रीरामवैदेही खड़ेश्वरी मंदिर पीठाधीश्वर महंत रामप्रकाश दास और रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष स्वामी दिलीप दास त्यागी महाराज ने आए हुए संत-महंताें का स्वागत-सत्कार किया। खड़ेश्वरी मंदिर पीठाधिपति महंत रामप्रकाश दास महाराज ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि काे मठ में दाे कार्यक्रम पड़ता है। पहला मंदिर में विराजमान भगवान श्रीराम वैदेही जू के वार्षिकोत्सव और दूसरा कार्यक्रम पूर्वाचार्य महंत भगवान दास खड़ेश्वरी महाराज के पुण्यतिथि महाेत्सव का। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी तिथि के अनुसार यह दाेनाें कार्यक्रम आश्रम में श्रद्धापूर्वक मनाया गया।उन्हाेंने कहा कि गुरूदेव भगवान दास खड़ेश्वरी महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे। वह त्याग, तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे। संतत्व ताे उनमें देखते ही झलकता था। वह गाै और संत सेवी रहे। उन्हाेंने मठ का सर्वांगीण विकास किया। जब वह अयोध्या आए। ताे मां सरयू की गोद में एक छोटी सी झोपड़ी डालकर एक पैर पर दिन-रात खड़े होकर कई वर्षों तक तपस्या किया। उस समय सरयू मैया की धारा श्रीराम वैदेही मंदिर के गेट को छूकर बहती थी। उनकी पूजा-आराधना से ऐसी शक्ति प्राप्त थी कि जो कोई इस मंदिर पर जाकर अपना अपील करता था। ताे उसके काम जल्द पूरा हो जाते थे। वह प्रतिदिन बंदरों, गौ, पंछियों, संताें की सेवा किया करते रहे। गुरूदेव समय-समय पर पशु-पक्षी और जानवरों की आवाज में बोली बोलकर अपने स्थान पर बुला लेते थे। वह अपने स्थान से कहीं जाते नही रहे। 2003 में उनका शरीर छूटने के बाद उनके शिष्य रामप्रकाश दास को सर्वसम्मत से श्रीराम वैदेही मंदिर का महंत बनाया गया। तब से आज तक वह गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलकर निरंतर मठ का विकास करते चले आ रहे हैं। आश्रम निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर है। जहां सभी उत्सव, समैया, त्याैहार परंपरागत रूप से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जा रहा है। इस अवसर पर रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी दिलीप दास त्यागी, महंत माधवदास रामायणी, महंत रामबालक दास, महंत तुलसीदास नव्यन्यायाचार्य, महंत सीताराम दास, आचार्य नारायण मिश्र, आचार्य वरूण दास, स्वामी दिवाकराचार्य, आचार्य नीरज शास्त्री, नंदकुमार मिश्र, रामरतन आदि उपस्थित रहे।
: श्री लाल साहेब दरबार में संतों ने ठाकुरजी संग खेली फूलों की होली
Sun, Mar 17, 2024
हम सब रसिक संत जन ठाकुर जी संग फूलों एवं अबीर-गुलाल की होली खेलते हैं: महंत रामनरेश शरण
अयोध्या। रंग पंचमी पर्व पर कनक भवन परिसर स्थित मंदिर प्रसिद्ध पीठ श्रीलाल साहेब दरबार में संतों ने ठाकुरजी संग फूलों और अबीर-गुलाल की होली खेली। रंगोत्सव से पूरा मंदिर प्रांगण पुलकित रहा। महोत्सव को पीठ के पीठाधीश्वर महंत रामनरेश शरण महाराज सानिध्य प्रदान कर रहे थे। सायंकाल श्रीलालसाहेब सरकार का पूजन- अर्चन, भोग, आरती हुआ। उसके बाद पीठ के महंत ने श्रीलालसाहेब सरकार को अबीर-गुलाल लगाकर फूलों की होली खेली। यह दृश्य देखकर सभी हर्षोल्लासित हो उठे। मंदिर में मौजूद साधु-संत, भक्तगणों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया। पूरा माहौल भक्तिमय वातावरण में रंगा रहा। मंदिर परिसर श्रद्धालु और संतों से भरा हुआ था। रामनगरी के नामचीन कलाकारों ने होली खेलें रघुवीरा अवध में....आदि अनेकानेक होली गीत गाकर उत्सव में चार-चांद लगा दिया। उन्होंने उत्सव की महफिल सजा दी। इससे साधुसंत, भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए। गायन-वादन का कार्यक्रम रात्रि तक चलता रहा। संतों तथा श्रद्धालुगणों ने श्रीलालसाहेब सरकार के दिव्य रंगोत्सव झांकी का दर्शन कर अपना जीवन धन्य बनाया। महंत रामनरेश शरण ने कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष फाल्गुन शुक्ल पंचमी, जिसे रंगपंचमी भी कहा जाता है। इस तिथि पर मंदिर में फूलों और अबीर-गुलाल की होली का कार्यक्रम होता है। हम सब रसिक संत जन ठाकुर जी संग फूलों एवं अबीर-गुलाल की होली खेलते हैं और भाव के अनतरंग में आनंदित भी होते हैं। उसी परिप्रेक्ष्य में इस बार भी रंगपंचमी पर रंगोत्सव का कार्यक्रम हुआ। हम सबने श्रीलालसाहेब सरकार संग अबीर-गुलाल, फूलों की होली खेली। 20 मार्च को रंगभरी एकादशी पर भी मंदिर में सायंकाल होली का कार्यक्रम होगा।