: भव्य अद्वितीय शोभायात्रा 'कलश' के साथ 2121 कुडंयी श्रीराम महायज्ञ का हुआ शुभारंभ
Sun, Feb 11, 2024
कलशयात्रा में 1100 कलशधारी महिलाओं के साथ 5100 भक्त हुए शामिल
कलशयात्रा में शामिल भक्त व आचार्य देव मुरारी जी
राममहायज्ञ में 1 करोड़ 25 लाख मंत्रों और 180 क्विंटल हवन सामग्री से डाली जायेगी आहुतियां
अयोध्या के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा यज्ञ हो रहा: देव मुरारी
महायज्ञ का पोस्टर
अयोध्या। रामनगरी भगवान रामलला की भव्य दिव्य प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर रामलला के वंशज रघुवंशी समाज द्धारा 2121 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ का आगाज कलश यात्रा के साथ हो गया। पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित बड़ी छावनी के बाग में रविवार से 2121 कुंडों में आहुति पड़ेगी। यद्यपि यज्ञ का आरंभ शनिवार को कलश यात्रा से हो गया। कलशयात्रा में 1100 कलशधारी महिलाओं के साथ 5100 भक्त शामिल हुए।कलश यात्रा संत तुलसीदास घाट पर सरयू जल लेकर भव्य शोभायात्रा के रूप में यज्ञ स्थल पर पहुंची। यज्ञ के आयोजन समिति के सदस्य आचार्य देवमोरारी बापू ने बताया कि अयोध्या के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा यज्ञ हो रहा है। यज्ञ में 1 करोड़ 25 लाख मंत्रों और 180 क्विंटल हवन सामग्री से आहुतियां दी जाएंगी। यज्ञाचार्य की भूमिका में काशी के डा. प्रेमनारायण शास्त्री हैं एवं यज्ञ के मुख्य यजमान मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी मुनिराज पटेल हैं। इस अनुष्ठान का संयोजन साकेतवासी महंत कनकबिहारीदास के उत्तराधिकारी श्यामदास व लखनदास 'छोटे बावा' कर रहे हैं। यज्ञ के संरक्षक मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अजय सिंह हैं। कलशयात्रा में रामकिशोरशरण, पटेल बाबा, चक्रपाल सिंह, नारायण सिंह पटेल, अंगद सिंह पटेल, कपिल रघुवंशी, दान सिंह, घनश्याम सिंह रघुवंशी, रामकुमार सिंह रघुवंशी, अजब सिंह रघुवंशी प्रमुख रूप से शामिल रहे।यज्ञ में नौ दिवसीय अनुष्ठान को रामकथा ज्ञानयज्ञ से पूर्णता प्रदान की जाएगी। कथाव्यास के रूप में प्रख्यात कथाव्यास एवं चित्रकूट स्थित कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य होंगे। जबकि सहायक कथा वक्ता के रूप में आचार्य देवमोरारी बापू, रामकिशोर दास, वालव्यास रमाकिशोरी होंगी। कथा रविवार को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी।
: श्रीराम जानकी खलवा मंदिर के नये महंत बने रामबिहारी दास
Sat, Feb 10, 2024
अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की दी मान्यता
तिलक देते डाडिया पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंत गिरीश दास व आचार्य गौरव शास्त्री
पूज्य गुरुदेव भगवान सेवा भाव की प्रतिमूर्ति थे: महंत रामबिहारी दास
अयाेध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्रीराम जानकी खलवा मंदिर रायगंज स्वर्णखनी कुंड का नया महंत रामबिहारी दास काे बनाया गया। शनिवार को एक महंताई समाराेह के दरम्यान अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता की। साथ ही साथ महज्जरनामा पर हस्ताक्षर भी किया। खलवा मंदिर के सेवा के प्रतिमूर्ति के रुप में सुविख्यात वयाेवृद्ध महंत रहे रामध्वज दास चेला स्व राम इकबाल दास का साकेतवास हो जाने से आश्रम की गद्दी खाली चल रही थी। जिस पर महंत रामबिहारी दास चेला स्व. महंत रामध्वज दास की ताजपाेशी की गई। महंत रामध्वज दास जी ने जीवनकाल में ही पंजीकृत वसीयत द्वारा सुयाेग्य शिष्य रामबिहारी दास काे अपना उत्तराधिकारी नामित कर दिया था। शनिवार को महंत रामध्वज दास जी का तेरहवीं भंडारा भी रहा। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में महंताई समाराेह का आयोजन हुआ, जिसमें संताें व सद् गृहस्थाें ने रामबिहारी दास काे श्रीराम जानकी खलवा मंदिर का महंत एवं सर्वराहकार घाोषित किया। नवनियुक्त महंत रामबिहारी दास ने कहा कि वह अपने समस्त दायित्वों का कुशलता पूर्वक निर्वहन करेंगे। साथ ही मंदिर की सम्पूर्ण सम्पत्तियाें काे अक्षुण्ण बनाए रखने का आजीवन सतत प्रयत्न करते रहेंगे। महंत रामबिहारी दास ने बताया कि गुरु भगवान के आशीर्वाद से मंदिर में चलने वाली सेवाएं निरंतर चलती रहेगी और मैं सनातन वैष्णव परंपरा और अयोध्या के पूज्य संतों महंतों वह साधु संतों के आशीर्वाद से निरंतर मंदिर के विकास और सेवा को आगे बढ़ाता रहूंगा। उन्होंने बताया कि गुरुदेव भगवान का साकेत वास 26 जनवरी को हो गया था पूरे संत परंपरा के अनुसार उनका संस्कार किया गया और आज अयोध्या के संतो महंतों ने मुझे गुरुदेव भगवान के स्थान पर श्रीराम जानकी खलवा मंदिर का महंत बनाया है। मैं सभी संतो महंतों के निर्देशों का पालन करूंगा। अंत में हरिधाम गोपाल पीठ के गौरव शास्त्री ने आए हुए संताें का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत-सत्कार किया। महताई समारोह में मुख्य रूप से जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास,श्रीरामबल्लाभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, मंगल भवन सुंदर धाम पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास, रामकथाकुंज महंत डॉ. रामानंद दास, महंत संतराम दास,महंत रामकुमार दास, महामंडलेश्वर महंत गिरीश दास,विष्णु दास पुजारी बड़ी छावनी, महंत सूरज दास, महंत भरत दास,महंत अजय दास, महंत बलराम दास, तुलसीदास छावनी महंत जनार्दन दास, महंत अर्जुन दास, महंत आशुतोष दास, स्वामी छविरामदास, नागा रामलखन दास, महंत रामजी शरण, महंत मनीष दास,जगन्नाथ दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: जानकीवर शरण महाराज अप्रतिम के धनी संत रहे: महंत सियाकिशोरी शरण
Sat, Feb 10, 2024
सिद्धपीठ सद्गुरू सदन के पूर्वाचार्य को किया नमन
अयोध्या। सिद्धपीठ सद्गुरु सदन, गोलाघाट के पूर्वाचार्य पंडित राज श्री जानकीवर शरण महाराज को पुण्यतिथि पर संतों ने नमन किया। शनिवार मंदिर परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संत-महंतों द्वारा पूर्वाचार्य को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। साथ ही संतों ने उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। पुण्यतिथि पर मठ में कई धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। सगुरु सदन के महंत सियाकिशोरी शरण महाराज द्वारा आए हुए संत- महंत, विशिष्टजनों का स्वागत- सम्मान किया गया। सदुरु सदन पीठाधीश्वर महंत सियाकिशोरी शरण महाराज ने कहा कि इस आश्रम की गणना प्राचीनतम पीठों में होती है। जहां एक से एक बड़े-बड़े सिद्ध, तपस्वी, विद्वान संत हुए हैं। जिन्होंने मठ का कार्यभार संभाला। उन्हीं में से एक थे, पूर्वाचार्य पंडित राज श्री जानकीवर शरण महाराज। जिनकी पुण्यतिथि आश्रम में श्रद्धा के साथ मनाई गई। वह अप्रतिम के धनी संत रहे। संतत्व तो उनमें देखते ही झलकता था। जो भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। उनकी गणना भजनानंदी संतों में होती थी। भगवान सीताराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति रही। श्रीसीताराम के वह अनन्य उपासक थे। जो गौ और संत सेवी रहे। जिन्होंने मठ का सर्वांगीण विकास किया। जीवन भर मंदिर की उत्तरोत्तर समृद्धि में लगे रहे, जिसकी गणना अयोध्यानगरी के प्रमुख पीठों में होती है। आश्रम में गौ, संत, विद्यार्थी तथा अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया, त्यौहार भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। पुण्यतिथि पर सद्गुरु सदन के अधिकारी बालमुकुंद शरण, पुजारी अंबरीष शरण समेत अयोध्याधाम के अन्य विशिष्ट संत-महंत व मंदिर से जुड़े हुए शिष्य-परिकर, अनुयायी मौजूद रहे।