: महापौर के साथ बड़ा भक्तमाल मंदिर में संतों ने की बैठक
Tue, Mar 4, 2025
महापौर के साथ बड़ा भक्तमाल मंदिर में संतों ने की बैठकमंदिर की सम्पत्ति भगवान के नाम है तो फिर टैक्स कैसा: महंत अवधेश दाससंतों ने उठाया बिजली बिल अधिक आने का मसला, हाउस टैक्स को लेकर संतों में रोषसीवर जल्द से जल्द सफाई के दिए निर्देशअयोध्या। महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने बड़ा भक्तमाल मंदिर परिसर में आयोजित संतों की बैठक में उनकी समस्याएं सुनी और समाधान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिरों का गृह कार्य एवं जलकर माफ कर रखा कर दिया है। इस कारण मंदिर परिसर में चलने वाली अन्य गतिविधियों से संबंधित टैक्स लिया जाएगा। उन्होंने संतों को बताया कि मंदिरों से प्रतीकात्मक धनराशि ही ली जाएगी। मंदिर के जगमोहन, गौशाला, धर्मशाला, पाठशाला, यज्ञशाला, पाकशाला, परिक्रमा पथ, महंत का आवासीय परिसर आदि का टैक्स निर्धारित नहीं किया जाएगा। केवल गेस्ट हाउस, बारात घर अथवा दुकानों से संबंधित टैक्स लिया जाएगा।संतों ने बिजली बिल अधिक आने का मसला भी उठाया। इस पर महापौर ने मुख्य अभियंता विद्युत से दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने संतों की समस्याओं के समाधान का निर्देश दिया। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास ने कहा कि मंदिर की सम्पत्ति भगवान के नाम है उसका बैक भी वैल्यू नही लगाता है तो फिर टैक्स कैसा। हाउस टैक्स को लेकर संतों में रोष रहा। इस मौके पर माघ मेले में हनुमानगढ़ी, अमावा मंदिर, रामकचहरी, रामनिवास मंदिर आदि इलाके में सीवर की सफाई का भी मुद्दा सामने आया, जिसे जल्द से जल्द समाधान का वादा महापौर ने किया। इस मौके पर महंत अवधेश दास, संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण,महंत शशिकांत दास, महंत राम लखन दास, नागा रामलखन दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,शिवम श्रीवास्तव सहित कई संत मौजूद थे।
: जन्मकल्याणक महाेत्सव में निकली विशाल शोभायात्रा
Tue, Mar 4, 2025
जन्मकल्याणक महाेत्सव में निकली विशाल शोभायात्राजन्मोत्सव की रस्म स्वर्णजड़ित संदूक में भगवान ऋषभदेव की छोटी प्रतिमा प्राप्त किए जाने से संपादित होती हैअयोध्या वैष्णवों के साथ जैन धर्म की भी आस्था के केंद्र है:पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामीअयोध्या ।दिगंबर जैन मंदिर की शीर्ष पीठ रायगंज स्थित भगवान ऋषभदेव मंदिर में साेमवार काे धूमधाम से जन्मकल्याणक महाेत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण से गाजे-बाजे, घाेड़े और रथ संग विशाल ऐतिहासिक शाेभायात्रा निकाली गई। जैसे सूर्य के उदित होने की आहट से तारे टिमटिमाते लगते हैं, उसी तरह महासूर्य रूपी भगवान के जन्म लेने की आहट से इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है और पद-प्रतिष्ठा से लेकर अपना सिंहासन बचाने को आतुर इंद्र उसी समय से भगवान की खुशामद में लग जाते हैं।भगवान ऋषभदेव के जन्मोत्सव के साथ यह पटकथा रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मोहक नाट्य के रूप में प्रस्तुत हुई। न केवल स्वर्ग की आभा-प्रभा और वैभव का भान कराते मंच, बल्कि कलाकारों का परिधान, उनकी भाव-भंगिमा और सधा अभिनय कुछ पल के लिए सृष्टि के आरंभ के उसी दौर में खींच ले गई, जब भगवान ऋषभदेव ने गर्भ धारण किया होगा। आस्था का गहन संचार करती मोहक प्रस्तुति से जीवंत गर्भ कल्याणक के संस्कार का शीघ्र समापन होता है और जन्म कल्याणक के साथ जैन मंदिर का विशाल प्रांगण आस्था के नए सूर्य से जगमग होता है। जन्मोत्सव की रस्म स्वर्णजड़ित संदूक में भगवान ऋषभदेव की छोटी प्रतिमा प्राप्त किए जाने से संपादित होती है। इसी के साथ मंदिर का विशाल प्रांगण मंगल गीतों, भांति-भांति के वाद्यों, पुष्प वर्षा और बधाई के आदान-प्रदान के प्रवाह से आच्छादित हो उठता है। कुछ पलों की तैयारी के बाद मंदिर से नर्तकों-नाट्यकर्मियों, वादकों, गायकों, श्रमण-श्रमणियों से लेकर श्रद्धालुओं की अनेक मंडलियों से युक्त भव्य शोभायात्रा प्रस्थान करती है। जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती माता की प्रेरणा और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माता तथा दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष एवं दर्जनों मंदिरों की श्रृंखला से युक्त पीठ के अधिपति रवींद्रकीर्ति स्वामी के मार्गदर्शन में निकली शोभायात्रा आस्था का संचार करती हुई सरयू तट तक पहुंची और वहां से वापस अयोध्या की धरा तथा यहां की आबोहवा शिरोधार्य करती हुई वापस जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अमरचंद जैन, मंत्री विजयकुमार जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन, जैन दर्शन के मर्मज्ञ डा. जीवनप्रकाश जैन, मनोज जैन, पंकज जैन, लल्ला जैन आदि के रूप में प्रबंधन से जुड़े प्रमुख घटकों सहित उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तक के हजारों श्रद्धालु शामिल रहे।छह मार्च तक प्रस्तावित पंचकल्याणक महोत्सव 30 कालों और पराजगत में हुए सभी 24 तीर्थंकरों की 720 प्रतिमाओं सहित भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्रों तथा कर्म के अनुसार विभिन्न लोकों में गति प्राप्त करते प्रसंगों को अभिव्यंजित करतीं 727 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा के क्रम में संयोजित है।शोभायात्रा में पूरे उत्साह और प्रसन्नता से शामिल हुए जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि अयोध्या वैष्णवों के साथ जैन धर्म की भी आस्था के केंद्र में है और हम सभी को मिलकर अयोध्या को शिरोधार्य करना है। उन्होंने कहा, यह अनुभूति बहुत गौरवान्वित करती है कि श्रीराम प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव के वंशज थे और कई अन्य तीर्थंकर श्रीराम की तरह इक्ष्वाकु वंश में ही पैदा हुए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रथम तीर्थंकर के अलावा अयोध्या दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ, चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ, पांचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ तथा चौदहवें तीर्थंकर अनंतनाथ की भी जन्मभूमि है और यहां इनके मंदिर भी तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने संरक्षित कर रखे हैं।
: 1800 प्रतिमाओं का पंचकल्याणक संस्कार महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ
Mon, Mar 3, 2025
1800 प्रतिमाओं का पंचकल्याणक संस्कार महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभतीर्थंकरों के साथ ऋषभदेव के 101 पुत्रों की प्रतिमाएं होंगी प्रतिष्ठित,भगवान ऋषभदेव के गर्भधारण की बेला में उत्सव मनाने के लिए शामिल हो रहेजीवन, संस्कार और देशना के प्रसाद स्वरूप संपूर्ण मानवता का अभिषेक है: साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताअयोध्या।श्री दिगंबर जैन मंदिर की शीर्ष पीठ रायगंज स्थित भगवान ऋषभदेव के मंदिर में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत 30 विभिन्न काल एवं लोक में हुए सभी 24 तीर्थंकरों की 720 प्रतिमाओं, भगवान ऋषभदेव के सभी 101 पुत्रों की प्रतिमाओं तथा कर्म के अनुसार विभिन्न लोकों में गति प्राप्त करते प्रसंगों की 727 प्रतिमाओं सहित कुल 1800 प्रतिमाओं का पंचकल्याणक संस्कार रविवार 2 मार्च से प्रारंभ हो गया है जो 6 मार्च तक चलेगा और इस संस्कार के फलस्वरूप पाषाण की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए चिन्मय-चैतन्य हो उठेंगी। इन प्रतिमाओं के लिए जैन मंदिर के विशाल प्रांगण में तीन भव्य मंडप बनाए गए हैं। एक साथ एक हजार आठ सौ प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के दुर्लभ अवसर मंदिर के विशाल प्रांगण में पग-पग पर दिखाई दे रहा है और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालु पूरे भाव से उत्सव में शामिल हो रहे हैं।
उत्सव में सैकड़ों दंपती पौराणिक पटकथा के अनुसार इंद्र-इंद्राणी का स्वरूप ग्रहण कर भगवान ऋषभदेव के गर्भधारण की बेला में उत्सव मनाने के लिए सन्नद्ध होते हैं।तो उन युवक-युवतियों की संख्या इंद्र-इंद्राणियों का स्वरूप धारण किए श्रद्धालुओं से कई गुणा अधिक होती है, जो पूरी शास्त्रीयता और अवसर की भावना के अनुरूप मर्यादित नृत्य की प्रस्तुति से पंच कल्याणक महोत्सव का आनंद परिभाषित कर रहे होते हैं। रविवार को सुबह छह बजे ही भगवान ऋषभदेव के उत्सव विग्रह के पंचामृत अभिषेक से प्रारंभ होता है और देखते-देखते जैन मंदिर के 25 बीघा का प्रांगण आस्था, आदर्श, विश्वास, वैभव और भावना तथा भक्ति से तरंगायित हो उठता है।
अभिषेक के बाद जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता के उद्बोधन में बताया कि भगवान श्री तो अपने अपूर्व, अद्भुत, अलौकिक और अनंत तपश्चर्या से शाश्वत अभिषिक्त हैं, वस्तुत: यह अभिषेक उनके माध्यम से- उनके जीवन, संस्कार और देशना के प्रसाद स्वरूप संपूर्ण मानवता का अभिषेक है। हम संकल्पित हों उनके बताए रास्ते पर बढ़ने के लिए स्वयं के मस्तिष्क-प्रज्ञा और विवेक को इसके लिए तैयार कर सकें।परम पद को प्राप्त तीर्थंकर तो वापस इस जगत में नहीं आते, किंतु हमारे लिए उनकी प्रेरणा ही बहुत काम आ सकती है। उन्होंने इस अवसर को विश्व शांति और अहिंसा की प्रतिष्ठा का भी बताया।1800 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा का महापर्व विश्व में अहिंसा और शांति की स्थापना के संकल्प का है। अभिषेक के बाद सैकडों महिलाएं सिर पर मंगल कलश के साथ उस मंडप में प्रवेश करती हैं, जिसे स्वर्ग की तरह सज्जित किया गया होता है। कलश स्थापना और अखंड दीप के प्रज्वलन से यह संकल्प और घनीभूत होता है।
अभिषेक कलश यात्रा के बाद दूसरी बेला में विभिन्न धार्मिक उपक्रमों एवं कर्मकांडों के माध्यम से भगवान का गर्भ कल्याणक सम्पन्न हुआ और दिगंबर जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष एवं पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने अपने उद्बोधन में बताया कि गर्भ कल्याणक जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान में सहभागी बनने का अवसर भगवान ऋषभदेव को आत्मस्थ करने का अवसर है। जैन दर्शन के तरफ ध्यान आकृष्ट कराते हुए उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कल हमारे सत्कर्म उन ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं, जहां से हम भी भगवान ऋषभदेव की तरह मोक्षगामी हो सकें, किंतु अभी हम उन्हें आत्मस्थ कर उनके मूल्यों और आदर्शों के साथ जीवन जीने का गौरव तो हासिल ही कर सकते हैं।