: जन्मकल्याणक महाेत्सव में निकली विशाल शोभायात्रा
बमबम यादव
Tue, Mar 4, 2025
जन्मकल्याणक महाेत्सव में निकली विशाल शोभायात्रा
जन्मोत्सव की रस्म स्वर्णजड़ित संदूक में भगवान ऋषभदेव की छोटी प्रतिमा प्राप्त किए जाने से संपादित होती है
अयोध्या वैष्णवों के साथ जैन धर्म की भी आस्था के केंद्र है:पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी
अयोध्या ।दिगंबर जैन मंदिर की शीर्ष पीठ रायगंज स्थित भगवान ऋषभदेव मंदिर में साेमवार काे धूमधाम से जन्मकल्याणक महाेत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण से गाजे-बाजे, घाेड़े और रथ संग विशाल ऐतिहासिक शाेभायात्रा निकाली गई। जैसे सूर्य के उदित होने की आहट से तारे टिमटिमाते लगते हैं, उसी तरह महासूर्य रूपी भगवान के जन्म लेने की आहट से इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है और पद-प्रतिष्ठा से लेकर अपना सिंहासन बचाने को आतुर इंद्र उसी समय से भगवान की खुशामद में लग जाते हैं।भगवान ऋषभदेव के जन्मोत्सव के साथ यह पटकथा रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मोहक नाट्य के रूप में प्रस्तुत हुई। न केवल स्वर्ग की आभा-प्रभा और वैभव का भान कराते मंच, बल्कि कलाकारों का परिधान, उनकी भाव-भंगिमा और सधा अभिनय कुछ पल के लिए सृष्टि के आरंभ के उसी दौर में खींच ले गई, जब भगवान ऋषभदेव ने गर्भ धारण किया होगा। आस्था का गहन संचार करती मोहक प्रस्तुति से जीवंत गर्भ कल्याणक के संस्कार का शीघ्र समापन होता है और जन्म कल्याणक के साथ जैन मंदिर का विशाल प्रांगण आस्था के नए सूर्य से जगमग होता है। जन्मोत्सव की रस्म स्वर्णजड़ित संदूक में भगवान ऋषभदेव की छोटी प्रतिमा प्राप्त किए जाने से संपादित होती है। इसी के साथ मंदिर का विशाल प्रांगण मंगल गीतों, भांति-भांति के वाद्यों, पुष्प वर्षा और बधाई के आदान-प्रदान के प्रवाह से आच्छादित हो उठता है। कुछ पलों की तैयारी के बाद मंदिर से नर्तकों-नाट्यकर्मियों, वादकों, गायकों, श्रमण-श्रमणियों से लेकर श्रद्धालुओं की अनेक मंडलियों से युक्त भव्य शोभायात्रा प्रस्थान करती है। जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती माता की प्रेरणा और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माता तथा दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष एवं दर्जनों मंदिरों की श्रृंखला से युक्त पीठ के अधिपति रवींद्रकीर्ति स्वामी के मार्गदर्शन में निकली शोभायात्रा आस्था का संचार करती हुई सरयू तट तक पहुंची और वहां से वापस अयोध्या की धरा तथा यहां की आबोहवा शिरोधार्य करती हुई वापस जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अमरचंद जैन, मंत्री विजयकुमार जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन, जैन दर्शन के मर्मज्ञ डा. जीवनप्रकाश जैन, मनोज जैन, पंकज जैन, लल्ला जैन आदि के रूप में प्रबंधन से जुड़े प्रमुख घटकों सहित उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र तक के हजारों श्रद्धालु शामिल रहे।छह मार्च तक प्रस्तावित पंचकल्याणक महोत्सव 30 कालों और पराजगत में हुए सभी 24 तीर्थंकरों की 720 प्रतिमाओं सहित भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्रों तथा कर्म के अनुसार विभिन्न लोकों में गति प्राप्त करते प्रसंगों को अभिव्यंजित करतीं 727 प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा के क्रम में संयोजित है।
शोभायात्रा में पूरे उत्साह और प्रसन्नता से शामिल हुए जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि अयोध्या वैष्णवों के साथ जैन धर्म की भी आस्था के केंद्र में है और हम सभी को मिलकर अयोध्या को शिरोधार्य करना है। उन्होंने कहा, यह अनुभूति बहुत गौरवान्वित करती है कि श्रीराम प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव के वंशज थे और कई अन्य तीर्थंकर श्रीराम की तरह इक्ष्वाकु वंश में ही पैदा हुए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रथम तीर्थंकर के अलावा अयोध्या दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ, चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ, पांचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ तथा चौदहवें तीर्थंकर अनंतनाथ की भी जन्मभूमि है और यहां इनके मंदिर भी तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने संरक्षित कर रखे हैं।
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