: रामलीला के आधुनिक शिल्पकार को शिद्दत से किया गया शिरोधार्य
Mon, Dec 5, 2022
पत्थर मंदिर में मना महंत जयराम दास की 5वीं पुण्यतिथि, संत धर्माचार्यों अर्पित किया श्रद्धा सुमन
अयोध्या। रामनगरी ही नहीं पूरी दुनिया में अयोध्या की रामलीला का संजीव चित्रण कर राम के चरित्र का रामलीला में दर्शन कराने वाले महंत जयराम दास जी महाराज को उनके 5वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी के संत धर्माचार्यों ने शिद्दत से शिरोधार्य करते हुए नमन किया। नगरी के प्राचीन मंदिर पत्थर मंदिर में महंत जयराम दास श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया गया। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि महंत जयराम दास जी महाराज रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के चरित्र को पूरी दुनिया दर्शन कराया। कार्यक्रम के संयोजक मंदिर के वर्तमान मंहत मनीष दास व राम कचेहरी के महंत शशिकांत दास जी ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर रामनगरी के संत धर्माचार्यों ने आचार्य श्री को नमन किया।इस मौके पर आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, अधिकारी राजकुमार दास जी महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, महंत मिथलेश नन्दनी शरण, महंत गौरीशंकर दास, महंत सुरेश दास, महंत रामदास, महंत रामकुमार दास,महंत बालयोगी श्रीधर दास, दिलीप दास त्यागी, महंत बालयोगी रामदास, महंत गिरीश दास, महंत अवधेश दास, विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा, पुजारी पार्षद रमेश दास, भाजपा नेता विकास सिंह, संजय शुक्ला सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।
: श्रीमद्भागवत कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने की कथा है: प्रभंजनानन्द
Mon, Dec 5, 2022
प्रसिद्ध पीठ श्री सियारामकिला झुनकी घाट में धूमधाम से श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ, मंदिर से निकली शोभायात्रा
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या के मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित प्रसिद्ध पीठ श्री सियारामकिला झुनकी घाट जो झुनझुनियां बाबा की तपोभूमि के नाम से सुविख्यात है। आज सियारामकिला झुनकी घाट में धूमधाम से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व मंदिर से शोभायात्रा निकाली। जो मां सरयू के पावन तट गई जहां पर विधिवत पूजन अर्चन किया गया इसके बाद शोभायात्रा पुनः मंदिर वापस आई। व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा सियारामकिला के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज प्रभुजी कर रहें है। कथा के प्रथम दिवस प्रभंजनानन्द शरण जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा शरणागति की कथा है शरणागति का अर्थ है भगवान के चरणों में समर्पित हो जाना और भगवान के चरणों में समर्पित होने के लिए सबसे बड़ी बात है अपने आप का परित्याग कर देना। उन्होंने कहा कि जब आप अपने अहम का परित्याग करके भगवान के शरण आप होते हैं तब एक समर्थ गुरु सुखदेव जी महाराज जैसा प्रगट हो करके आपके जीवन के उन तमाम झंझावात को खत्म करके आपके जीवन में भक्ति की ज्योति जला देता है। स्वामीजी ने कहा कि गुरु की शरणागति जीवन में मृत्यु के बंधन को काटकर मोक्ष की ओर आपके मार्ग को प्रशस्त करती है। श्रीमद्भागवत की कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने की कथा है।यह महोत्सव सियारामकिला के महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन आयोजक विकास कुमार हथदह पटना ने किया। यह कथा महोत्सव स्व मुरारी सिंह जी की पावन स्मृति में हो रहा है। इस मौके पर सियारामकिला झुनकी घाट के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: गीता जयंती पर वाल्मीकि भवन में गूंजे भागवत के श्लोक
Sun, Dec 4, 2022
सैकड़ों वैदिक आचार्यों के साथ हजारों वेदपाठियों ने किया सामूहिक गीता का पाठ
महंत कमलनयन दास, प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री व आचार्य आनंद शास्त्री ने आचार्यों, वेदपाठियों का किया स्वागत
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार मणिरामदास जी की छावनी के वाल्मीकि भवन में गीता के श्लोक समवेत स्वर में गूंजे तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। अवसर था गीता जयंती का। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज के अध्यक्षता व उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास जी महाराज के संयोजन में आयोजित गीता जयंती महोत्सव में 2500 सौ से अधिक वैदिक विद्वानों ने गीता पाठ किया।
मणिरामदास जी की छावनी में भव्यता पूर्वक गीता जयंती का महोत्सव मनाया गया। छह दिसंबर 1992 को जब विवादित ढांचा ध्वंस हुआ था, तब भी गीता जयंती थी, जिसके बाद से गीता जयंती को भव्यता पूर्वक मनाने का क्रम शुरू हुआ।
इस आयोजन में दो हजार से अधिक वैदिक विद्वान शामिल रहे। कार्यक्रम में मौजूद विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि 6 दिसंबर 1992 को जब विवादित ढांचा को कारसेवकों ने गिराया था उस दिन भी गीता जयंती ही थी। आज 4 दिसंबर रविवार को बड़े ही धूमधाम के साथ गीता जयंती मनाई गई। गीता जयंती को उत्सव के रूप में मनाते आ रहे हैं। इस बार हजारों की संख्या में विद्वानों ने गीता का पाठ कर सभी भव्य दिव्य राम मंदिर का निर्माण हो।
प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी ने गीता जयंती महोत्सव पर भक्तों से अपील करते हुए कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए रामायण व गीता का प्रचार-प्रसार जरूरी है। गीता हमें संदेश देती है कि हमें कर्म के प्रति उदासीन नहीं होना चाहिए क्योंकि कर्म के अनुसार ही हमें फल की प्राप्ति होती है। हर मनुष्य को अपने-अपने धर्म के अनुसार कर्म करना चाहिए। गीता के उपदेश में लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र भी निहित हैं बसे इन्हें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। इस दौरान आचार्य राधेश्याम शास्त्री, पंजाबी बाबा सहित अन्य मौजूद रहे।