: शतरंज प्रतियोगिता में सीजल वसीम व सौरभ को मिला प्रथम स्थान
Sat, Dec 3, 2022
कैरम में रुद्राणी जयसवाल व धर्मवीर वर्मा रहे प्रथम
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय आवासीय परिसर के क्रीड़ा विभाग में अन्तर्विभागीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के शुक्रवार को कैरम, शतरंज व म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता का आयोजन पदमश्री अरुणिमा सिन्हा भवन, स्टूडेन्ट एमिनिटी सेन्टर में किया गया। कुलपति बिग्रेड व कुलसचिव बिग्रेड म्यूजिकल चेयर पुरुष प्रतियोगिता में कुलपति बिग्रेड से डॉ दीपक कुमार वर्मा प्रथम स्थान तथा कुलसचिव बिग्रेड के श्री अमित वर्मा द्वितीय स्थान प्राप्त किया इसी क्रम में महिला वर्ग में कुलपति बिग्रेड से डॉ प्रियंका सिंह प्रथम स्थान तथा कुलसचिव बिग्रेड से श्रीमती मधुबाला द्वितीय स्थान पर रही अंतर विभागीय कैरम (महिला) प्रतियोगिता मैं रुद्राणी बीए की छात्रा ने प्रथम स्थान तथा बीएससी की छात्रा श्वेता द्विवेदी द्वितीय स्थान प्राप्त की इसी क्रम में पुरुष वर्ग के धर्मवीर वर्मा, एम ए प्रथम स्थान तथा नवनीत कुमार तिवारी, एमबीए के द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अंतर विभागीय शतरंज (महिला) प्रतियोगिता मैं सीजल वसीम, एम. पी.एड. की छात्रा ने प्रथम स्थान तथा काजल पांडेय एम. ए. द्वितीय स्थान प्राप्त किया इसी क्रम में पुरुष वर्ग के सौरभ एम.एस.सी. प्रथम स्थान तथा हिमांशु कसौधन बीटेक के द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अंतर विभागीय शतरंज वा कैरम प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि प्रोफेसर तोहिना वर्मा तथा कुलपति व कुलसचिव बिग्रेड की म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि प्रो राजीव गौड़ जी ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त प्रतियोगिता का शुभारंभ किया निर्णायक में के रूप में राघवेंद्र तिवारी, कुमार मंगलम सिंह, वरुण सिंह, आदर्श सिंह, समीर पटेल रहे। क्रीडा प्रभारी डॉ मुकेश कुमार वर्मा ने बताया कि दिनांक 3 दिसम्बर को छात्र छात्रा वर्ग में बैडमिंटन और कुलपति कुलसचिव ब्रिगेड के मध्य बैडमिंटन प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इस अवसर पर डॉ दिनेश सिंह, डॉ स्नेहा पटेल,अमितेश पंडित, अनुराग सोनी, डॉ मोहन तिवारी, डॉ राजेश सिंह, आलोक मिश्रा, संतोष मौर्य,देवव्रत सिंह, आशुतोष सिंह राणा, मनीष यादव, आयुषी याशिनी दीक्षित , मुकुल द्विवेदी, गौरव सिंह, आनंद मौर्या , महेंद्र शुक्ल, कन्हैया सहित और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
: रामराज्य दिग्विजय रथ यात्रा के संतों ने की रामकोट की परिक्रमा
Fri, Dec 2, 2022
राष्ट्र की एकता अखंडता के लिये रामलला से की प्रार्थना
अयोध्या। रामराज्य दिग्विजय यात्रा ने शुक्रवार को राम जन्मभूमि परिसर की परिक्रमा किया। विगत प़ांच अक्टूबर को श्री मणिराम दास की छावनी से प्रारंभ होकर 60 दिनों में भारत एवं नेपाल होकर महामंडलेश्वर श्रीशक्ति शांतानंद महर्षि के संयोजन में तीस नवंबर को अयोध्या वापस पंहुची। यह ऐतिहासिक यात्रा में सम्मलित संत धर्माचार्यों व भक्तों ने एक दर्जन वाहन व रथ के साथ प्रातः रामकोट की परिक्रमा कर रामराज्य की पुनर्स्थापना और सामाजिक समन्वय के साथ ही राष्ट्र की एकता अखंडता के लिये रामलला से प्रार्थना की। ज्ञातव्य हो के रल के प्रसिद्ध संत शक्ति शान्तानंद के मार्गदर्शन और संयोजन में श्रीराम की दिग्विजय रथयात्रा संपूर्ण भारतवर्ष के सताइस राज्यों में सामाजिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता,समता को बल प्रदान करने के उद्देश्य को लेकर प्रारंभ हुई थी। शुक्रवार को मणिराम दास छावनी के राम कथा मंडप परिसर से प्रातःरामकोट परिक्रमा के लिये प्रारंभ हुई यात्रा का नयाघाट, श्रृंग़ारहाट ,हनुमान गढी,बिड़ला धर्मशाला, टेढ़ीबाजार, असर्फी भवन ,मतगजेन्द्र,पोस्ट आफिस तिराहे पर स्थानीये रामभक्तों संत धर्माचार्यों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान यात्रा आयोजन समिति सदस्य शरद शर्मा, पार्षद पुजारी रमेश दास,नागा अर्जुन दास,भाजपा नेता गिरीशपति त्रिपाठी, छोटे पांडेय, डां सी बी सिंह,संत विमलकृष्ण दास,संत दिवाकराचार्य, दीपक शास्त्री,सुरेश स्वामी,प्रदिप्त जी, डां रमेन्द्र द्विवेदी, अनिरुद्ध तिवारी,महंत कृपालु महाराज आदि समलित हुऐ। यात्रा का समापन शनिवार को गीता जयंती तीन दिसंबर को आयोजित यज्ञ के साथ होगा। इस दौरान अनेक संत धर्माचार्य संत महंत तथा राम भक्त उपस्थित रहेंगे।
: श्रीमद भगवत कथा तो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है: महंत राधामोहन शरण देवाचार्य
Fri, Dec 2, 2022
व्यास पीठ से पुतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को जगद्गुरु जी ने श्रवण कराया
जहाँ धर्म न हो, संस्कार न हो, अपनी परम्पराओं का निर्वाहन न हो वहां नस्ल ख़राब हो जाती है: स्वभु द्वाराचार्य
कथा महोत्सव को सम्बोधित करते जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य साथ में तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, महंत रामकरन दास, डाड़िया मंदिर के महंत महामंडलेश्वर गिरीश दास व महंत सनत कुमार शरण
अयोध्या। श्री राधा मोहन कुंज के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का धूमधाम से समापन हुआ। श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज ने पुतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर महाराज श्री ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की सुंदर कथा श्रोताओं को श्रवण कराई। कथा के विश्राम दिवस पर हजारों की संख्या में भक्तों ने महाराज श्री के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। देवाचार्य जी ने व्यासपीठ से कहा कि कथा आपको सम्पूर्ण भागवत कथा का फल देती है। ये हमारे करोड़ो जन्मो का पुण्य ही है की हमे श्रीमद भागवत कथा सुनने का अवसर प्राप्त हुआ है। क्यूंकि आप बस मानव जीवन को प्राप्त करके ही श्रीमद भगवत कथा का श्रवण कर सकतें है। श्रीमद भगवत कथा का ये ग्रन्थ तो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि जिस जीव के दिल में इच्छा होती है की वो ईश्वर के बारे में जाने वो इस श्रीमद भगवतकथा के माध्यम से ईश्वर के बारे में जान पाता है। जो व्यक्ति सिर्फ माया के पीछे भागता है वो व्यक्ति उस कुंए के मेंढक की तरह है जिसने कभी उस कुए के बाहर की दुनिया देखी ही नहीं। व्यास जी ने कहा कि वो कथा को सिर्फ एक कहानी की तरह सुनता है या फिर जब तक उसको सुनने का मन करता है तब तक कथा पंडाल में रहता है उसके बाद निकल जाता है। लेकिन वेद व्यास जी ने खुद भागवत कथा में लिखा है की अगर सातो दिन तक पूरी निष्ठा और ध्यान से आप श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करते है तो वो आपको मोक्ष की प्राप्ति कराती है। महाराज श्री ने बताया की जिस धरती पर पानी की कमी हो वहां की फसल ख़राब हो जाती है और जहाँ धर्म न हो जहाँ संस्कार न हो, जहां अपनी परम्पराओं का निर्वाहन न हो वहां नस्ल ख़राब हो जाती है। भगवान ने जो हमे ये साँसे दी है वो किसी का बुरा करने के लिए नहीं किसी को बुरा कहने के लिए नहीं, अपनी ज़िन्दगी को यूँ ही व्यर्थ करने के लिए बल्कि ये साँसे भगवान का नामजाप करने और भगवान की भक्ति के लिए दी है। ये सांस बहुत अनमोल है इन्हे आपको कोई उधार नहीं देगा इसलिए इन्हे व्यर्थ ना जाने दे। जगद्गुरू जी ने कहा कि भक्ति करने की कोई उम्र नहीं होती जिस समय आपका जन्म हुआ था उससे पहले आपकी मृत्यु तय है किस जगह आपकी मौत होगी किस कारण से होगी वो सब पहले से तय है। अगर आप चाहो की आप अपनी मौत को टाल लोगे उस पर जीत प्राप्त कर लोगे ऐसा कभी नहीं हो सकता आप अपनी मृत्यु को कभी हरा नहीं सकते क्यूंकि मृत्यु जीवन का सत्य है। इस लिए जीवन में हरीनाम बहुत जरूरी है। इसी के साथ राधा मोहन कुंज में चल रहे महोत्सव का भी समापन हो गया।आये हुए अतिथियों का स्वागत राधामोहन शरण देवाचार्य जी के शिष्य महंत सनत कुमार शरण ने किया।कथा विश्राम दिवस में जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य,तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, महंत रामकरन दास, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण, डाड़िया मंदिर के महंत महामंडलेश्वर गिरीश दास, राम हर्षण कुंज से जुड़े संत राघव दास, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक व भक्त मौजूद रहें।
श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज का आशीर्वाद लेते महंत सनत कुमार शरण व महंत राम जी शरण