: दरवाजे पर आई बारात बिना दुल्हन हुई वापस
Thu, Feb 23, 2023
रात में खाना खाने के बाद दूल्हे ने शादी से किया इनकार, हुआ हंगामा
बीकापुर-अयोध्या। बीकापुर कोतवाली क्षेत्र में शादी करने आई बारात रात में खाने के बाद दूल्हे द्वारा शादी से इंकार करने पर वापस हो गई,जबकि बारात से चुपके से भाग रहे दूल्हे व परिजनों को गांव व लड़की के घर वालों द्वारा दौड़ा कर पकड़ लिया गया। जिसपर वर पक्ष ने जमकर हंगामा काटा गया। दूल्हे के सगे संबंधियों ने औरतों से बदसुलूकी भी की। भोजन का स्टाल गिरा दिया। इस दौरान बारात में आए लोग लौट गए। चोरी चुपके भाग रहे दूल्हे व उनके सगे संबंधियों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई। काफी देर तक मान-मनौव्वल का दौर चला। सुबह होने पर लड़की के पिता ने बीकापुर कोतवाली में मामले की तहरीर दे दी। दोपहर तक दूल्हे, उसके पिता, भाई व चाचा समेत 9 को पुलिस ने नामजद करते हुए एक अज्ञात व्यक्ति पर केस दर्ज कर लिया। लड़की के पिता ने दी तहरीर में बताया है कि मेरी बेटी का विवाह आनंद पुत्र जितेन्द्र कनौजिया पता जमोली पोस्ट कूड़ेभार जिला सुल्तानपुर के साथ तय हुआ था। बुधवार को दूल्हे के पिता जितेंद्र व भाई परमानन्द, देवानन्द व चाचा पवन, उनकी पत्नी, बिचौलिया माता प्रसाद उसकी पत्नी आरती व वीरेंद्र मास्टर व उनके अन्य साथी दरवाजे पर बारात लेकर पहुंचे थे। लड़की के पिता ने बताया कि मैंने वर पक्ष को पहले ही बता दिया था कि मेरी बेटी के सिर में बाल कम हैं। इसी बात को मुद्दा बनाकर वर पक्ष ने दरवाजे पर ही अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू कर दी। जब हमने दहेज में इन्हें इनके मन मुताबिक कैश देने से मना किया तो इन्होंने मेरे घर के अंदर आकर मेरी बेटी व अन्य औरतों के साथ हाथापाई व गाली-गलौज की। खाने के सारे स्टाल तोड़ दिए। खाना फेंक किया।मेरे किसी मेहमान व घर वालों ने खाने को हाथ भी नहीं लगाया था। शादी टूटने की वजह से मेरी पुत्री सदमे में चली गई है। मेरी दोनों छोटी और बड़ी बेटी की हालत बहुत खराब है। पुलिस ने दूल्हे आनंद, जितेंद्र, परमानन्द, देवानन्द, पवन, उनकी पत्नी, माता प्रसाद, आरती, वीरेंद्र मास्टर व एक अज्ञात पर केस दर्ज किया है।
: राम भारत की संस्कृति के उच्चतम प्रतिमान: रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Thu, Feb 23, 2023
जानकी महल ट्रस्ट में श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण कथा का छाया उल्लास
अयोध्या। राम भारत की संस्कृति के उच्चतम प्रतिमान है। वो शील, संयम, सदाचार और मर्यादा की उत्कृष्ट प्रतिमा है। उक्त बातें जानकी महल ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण कथा के चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से जगद्गुरू रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कही। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति प्रणाम, आदर और शीश झुकाने वाली संस्कृति है। हम सभी को सम्मान देने वाले प्राणी हैं। चरित्र सबसे मूल्यवान वस्तु है जो ज्ञान, तप, शील और सद्गुणों से उन्नत होता है। चिन्तन और आचरण से चरित्र पुष्पित और पल्लवित होता है। जिनके पास शुभ विचार है, उनका चरित्र भी उन्नत होता है। प्रयास यह रहे कि आपका चरित्र दृष्टांत, गाथा और उदाहरण बन जाए। जगद्गुरु जी ने कहा कि वाल्मीकीय रामायण के आरम्भ में राम के चरित्र की चर्चा है। देवर्षि नारद परमात्मा के मन हैं और सद्ग्रन्थों के मूल में प्रेरक सत्ता भी नारद ही हैं। सबसे उन्नत चीज चरित्र है और हमारी भारतीय संस्कृति में राम जैसा चरित्र किसी के पास नही है। श्रेष्ठता, दिव्यता व उच्चता के मानकों के प्रतिमान भगवान श्रीराम हैं।
उन्होंने कहा कि नैतिकता मूल वस्तु है, आप महान हैं, लेकिन शील सम्पन्न नही हैं तो आपकी महानता व्यर्थ है। मन की उत्पत्ति काम से हुई है, इसलिए वह काम से मुक्त नहीं हो पाता। मन को काम से मुक्त कर लेना जीवन का बड़ा पुरुषार्थ है। कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।
: हमारा प्रेम तभी सार्थक होगा जब हम भगवान से प्रेम करेंगे: साक्षी गोपाल दास
Thu, Feb 23, 2023
महोत्सव की अध्यक्षता प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग के भजनानंदी संत महंत जगदीश दास कर रहें
अयोध्या। ब्रह्मा जी ने देखा कि भगवान श्री राम जी पृथ्वी पर प्रकट होने वाले हैं तो ब्रह्मा जी ने जामवंत के रूप में पृथ्वी पर आ गए और अग्निदेव जी नील के रूप में आ गए और वायु देव जी हनुमान जी के रूप में आ गये। साठ हजार वर्षों के बाद महाराजा दशरथ के महल में किलकारी सुनाई दी। उक्त बातें प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में आयोजित श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा में श्रीमान साक्षी गोपाल दास प्रभु जी अध्यक्ष इस्कॉन मंदिर धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र ने कही। उन्होंने कहा कि दशरथ जी ने महर्षि विशिष्ट जी को बच्चों के नामकरण के लिए बुलाया और जब महर्षि विशिष्ट जी ने श्री राम जी का नामकरण किया तो दशरथ जी ने महर्षि विशिष्ट जी से राम नाम का मतलब पूछा तब महर्षि विशिष्ट जी ने बताया कि राम का मतलब जो आनंद देने वाला है आपका पुत्र सबको आनंद देगा। जो भी इनके संपर्क में आएगा। साक्षी गोपाल दास ने बताया कि महर्षि विशिष्ट जी ने भरत का नामकरण किया फिर दशरथ जी ने भरत का मतलब पूछा फिर महर्षि विशिष्ट जी ने बताया भरत का मतलब है भरण पोषण करने वाला। जो हमारी आत्मा का भरण पोषण करेगा और हमारी आत्मा को क्या चाहिए हमारी आत्मा को चाहिए प्रेम। इस संसार में सभी प्राणी चाहते हैं प्रेम और यही प्रेम ही हमारी आत्मा की असली खुराक है। मानव जीवन का अगर कोई लक्ष्य है तो है वह है भगवान से प्रेम करना। चैतन्य महाप्रभु जी कहते हैं कि जब तक हमारी आत्मा को प्रेम नहीं मिलेगा तब तक हमें आनंद मिलने वाला नहीं है।और हमारा प्रेम भी तभी सार्थक होगा जब हम भगवान को प्रेम करेंगे। भरत जीसभी को राम जी के प्रेम से भर देंगे। श्री लक्ष्मण जी के बारे में पूछा तो बताया कि लक्ष्मण का मतलब क्या है जिसका दिव्य लक्ष्य हो। और लक्ष्मण जी का सबसे बड़ा लक्ष्य है भगवान श्री राम जी के चरणों का सेवक बनना। श्रीराम जी लक्ष्मण जी जिनके बिना नहीं चलते थे और लक्ष्मण जी श्री राम जी जी के बिना नही चलते हैं। यह महोत्सव हनुमान बाग के भजनानंदी संत महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री कर रहें है। इस मौके पर राजरानी, चरणदास, ममता अग्रवाल ,विनोद अग्रवाल, गीता शर्मा ,राजीव मोहन ने दीप प्रज्वलित कर और प्रभु जी को माल्यार्पण करके आशीर्वाद प्राप्त किया।