: श्रीसंतगोपाल मंडपम् में दक्षिणायन शैली से हो रहा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
Fri, Jul 5, 2024
व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहे कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज
अयोध्या। कांचीमठ प्रतिवादि भयंकर मूलगादी स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज की अध्यक्षता में अयोध्याधाम के नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों एवं वेदमंत्रों से पूरा मंदिर प्रांगण गुंजायमान है। अवसर श्रीरंगराघव भगवान के प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव का है। महोत्सव के उपलक्ष्य में नित्य शालिग्राम भगवान का सवा लाख अर्चन, 111 ब्राह्मण आचार्यों द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पारायण किया जा रहा है। गुरूवार को अग्नि प्रतिष्ठा, हवन-पूजन पाठ, धान्याधिवास का कार्यक्रम हुआ। व्यासपीठ पर विराजमान राष्ट्रीय कथाव्यास कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने कहह्या पांच वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है। तब वह साधक भगवान को प्राप्त करता है। जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर भगवान के धाम को प्राप्त हुआ। बिना गुरु कृपा व संतों की सन्निधि के भक्ति मार्ग की प्राप्ती संभव नही है। हिरण्यकश्यप ने घोर तप कर ब्रह्मा से वरदान भी प्राप्त किया। यदि साधक भक्तों के मन में अभिमान व्याप्त हो जाता है। तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग होकर पाप कर्म में लीन हो जाता है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ता है। प्रहलाद की दृढ़ भक्ति को देखकर भगवान उसे बचाने नरसिंह रूप धारण कर दुष्ट हिरण्यकश्यप का वध करते हैं। सुखदेव महाराज से कथा का श्रवण कर राजेंद्र परीक्षित का विश्वास और भी दृढ़ हो गया। अंत में कथा का प्रसाद वितरित हुआ। नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् के स्वामी कूरेशाचार्य महाराज व उघोगपति आईपी सिंह ने व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी। उन्होंने आए हुए संतों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सत्कार किया। सभी भक्तजन कथा का श्रवण कर आनंदित हो रहे हैं।
: बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सरयू नदी में कराया मुंडन
Thu, Jul 4, 2024
भगवान राम को समर्पित किया अपना बाल, हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन कर पुजारी हेमंत दास से लिया आशीर्वाद
अयोध्या। बुधवार को बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी रामनगरी अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने सरयू नदी में मुंडन कराया। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार का इंडिया गठबंधन में जाने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए शपत ली थी। सरयू से निकलकर पदयात्रा करते हुए सम्राट चौधरी राम मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने राम लाल को पगड़ी समर्पित की। उसके बाद हनुमानगढ़ी दर्शन किया। हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन कर पुजारी हेमंत दास महाराज का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने कहा कि पिछले 2 साल से अभियान चलाकर गठबंधन सरकार को हटाने का प्रयास किया स वहीं जब नीतीश कुमार 28 जनवरी को इंडी गठबंधन छोड़कर एनडीए की तरफ से हुए तभी तय किया था कि अयोध्या जाकर श्री राम के चरणों में समर्पित मुरैठा करेंगे। बिहार की जनता ने 75 प्रतिशत से अधिक सीटे जीताने का काम किया है । अगली बार फिर एनडीए एकजुट होकर 40 में 40 सीट पर जीत हासिल करेंगे और विधानसभा में 243 में 200 से ज्यादा सीट जीतेंगे। वहीं जन्मभूमि पथ पर बिहार के सैकड़ों समर्थकों के साथ डिप्टी सीएम और मंत्री व विधायकों की मौजूदगी में प्रोटोकॉल के नियमों को तोड़कर राम मंदिर पहुंचे। इस दौरान लगभग चार स्थानों पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस बल अधिकारियों के साथ मौजूद रहे, लेकिन समर्थकों का हुजूम जन्मभूमि पथ से होते हुए राम जन्मभूमि परिसर पहुंचा। इस दौरान राम मंदिर के पहले क्रॉसिंग पर पुलिसकर्मियों के साथ नोक झोंक भी हुई।
: भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है श्री राम जन्मभूमि मंदिर: रामदिनेशाचार्य
Thu, Jul 4, 2024
हरिधामगोपाल पीठ में श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर मनाया गया श्री रामजन्मोत्सव, चारों तरह छाया उल्लास
अयोध्या। रामनगरी के हरिधामगोपाल पीठ में भव्य श्रीरामकथा का आयोजन हो रहा है। जिसमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी के शिष्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के मुखारविंद श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस में आज राम जन्म महोत्सव मनाया गया। रामानंदाचार्य जी ने कहा कि लोक कल्याण के लिए होता है भगवान श्रीराम का जन्म। जहां सभी वेद वेदांत के परे परमात्मा कौशल्या पुत्र बनकर आते हैं निश्चित रूप से यह सनातन परंपरा के गौरव है। कथाव्यास ने कहा कि जब धारा पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्त अपने सारे संबंधों की रस्सी बनाकर भगवान के चरणाविंद से बांध देता है बांध कर खींच लेता है तो भगवान अपने आप को रोक नहीं पाते और अवतार ग्रहण कर लेते हैं। जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा। वह ब्रह्म जो बड़े-बड़े ज्ञानी महानी ध्यानी के ज्ञान गम में से परे होता है लेकिन जब कोई भक्ति मयी कौशल्या और बैराग्य रूपी दशरथ उस परमात्मा को प्राप्त करना चाहते हैं तब वह अवतार धारण करके पुत्र बनकर आ जाता है। कथा का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री जी कर रहें है। व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया। व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री रहे।