: राष्ट्रवादी विचार धारा के संवाहक थे मंहत मनमोहन दास : बृजभूषण शरण
Wed, Oct 30, 2024
राष्ट्रवादी विचार धारा के संवाहक थे मंहत मनमोहन दास : बृजभूषण शरण
भाजपा के वरिष्ठ नेता व हनुमानगढ़ी के महंत मनमोहन दास के निधन परशोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंहअयोध्या। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व हनुमानगढ़ी के महंत मनमोहन दास के निधन पर आज उनके आश्रम में शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे भारतीय कुश्ती संघ को राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करनेवाले संघ के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने महंत मनमोहन दास जी के चित्र पर पुष्पांजलि दी व दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि महंत मनमोहन दास का निधन पार्टी के लिए अपूर्णनीय क्षति है। उन्होंने वैचारिक मूल्यों की राजनीति पर आधारित राजनीति की। सौम्य व्यक्तित्त्व, कुशल सांगठनिक क्षमता, ओजस्वी वक्ता और जनसमस्याओं उठाने वाले एक जुझारू नेता के रूप में सदैव याद किये जायेंगें।बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के कई नेताओं को उन्होंने पार्टी के सर्मपित कार्यकर्ता के रूप में तैयार किया। महंत मनमोहन दास वैचारिक रूप से बहुत ही मजबूत तथा राष्ट्रवादी विचार धारा के संवाहक थे। भाजपा के शानदार नेता पूर्व महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि पूज्य महराज जी एक समर्पित स्वयंसेवक, प्रतिबद्ध कार्यकर्ता तथा एक उत्कृष्ठ राजनीतिज्ञ थे। उनके निधन से पार्टी ने व मैने व्यक्तिगत रुप से एक महत्त्वपूर्ण नेतृत्वकर्ता एवं कुशल मार्गदर्शक को खो दिया है। पूर्व सांसद जी ने महाराज जी के शिष्य अभिषेक दास,धीरज दास से हालचाल जाना। शोक संवेदना व्यक्त करनेवाले में पहलवान इंद्र देव दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास जी महाराज, पहलवान मनीराम दास, सोनू सिंह, जेडी सिंह, नीलेश सिंह, अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।
: युग तुलसी पंडित रामकिंकर महाराज की शत जन्मजयंती का छाया उल्लास
Wed, Oct 30, 2024
युग तुलसी पंडित रामकिंकर महाराज की शत जन्मजयंती का छाया उल्लासआकाशगंगा की गैलेक्सी में रामायण और रामचरितमानस की चर्चा होगी, तो उसमें से युगतुलसी पंडित रामकिंकर महाराज एक होंगे: मुरारी बापूट्रस्ट कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी व अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राम कथा के मर्मज्ञ मुरारी बापू को रामकिंकर सम्मान से सम्मानित किया गयाअयोध्या। आकाशगंगा की गैलेक्सी में रामायण और रामचरितमानस की चर्चा होगी। तो उसमें से युगतुलसी पंडित रामकिंकर महाराज एक होंगे। दीदी मां को मानस पुत्री मानकर उन्होंने बहुत दुलार दिया। उक्त वक्तव्य श्रीरामकथा के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार देव मुरारी बापू ने युग तुलसी पंडित रामकिंकर महाराज की शत जन्मजयंती महोत्सव पर आयोजित समारोह में कही। वह परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीरामायणम आश्रम ट्रस्ट परिक्रमा मार्ग जानकीघाट, अयाेध्याधाम में अपना वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जो प्रेम नियम न तुड़वा दे वह प्रेम नहीं होता। एक घटना को याद करते हुए कहा कि चतुर्मास में मेरा मौन रहता है। लेकिन युग तुलसी ने एक कार्यक्रम में बोलने के लिए कहा। मैं उनके आदेश को टाल नहीं सका। पंडित रामकिंकर महाराज का शत जन्मजयंती महोत्सव श्रीरामायणम आश्रम की अध्यक्षा पंडित रामकिंकर महाराज की मानस पुत्री उत्तराधिकारी दीदी मां मन्दाकिनी श्रीरामकिंकर के संयोजन में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के तीसरे दिन बुधवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी महाराज को दीदी मां मंदाकिनी रामकिंकर और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राम कथा के मर्मज्ञ मुरारी बापू को रामकिंकर सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा की पंडित रामकिंकर उपाध्याय को युग तुलसी कहा जाता है। क्योंकि तुलसीदास के बाद कोई भी महापुरुष इतनी सरलता से भगवान श्रीराम के चरित्र को जन-जन तक नहीं पहुंचाया। कभी-कभी समाज में ऐसा लगता है। या यूं कहें तो भगवान राम के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है। लेकिन पंडित जैसे महापुरुष बार-बार यह सिद्ध कर दिए हैं कि प्रभु श्रीराम का अस्तित्व था है और हमेशा रहेगा। दीदी मां ने संत सम्मेलन और रामकिंकर उपाध्याय सम्मान समारोह में उपस्थित सभी संत-महंतों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के शताब्दी समारोह आप सब आए मैं सदा आभारी रहूंगी। मेरा जीवन गुरुदेव के विचारों के प्रचार हेतु समर्पित है। जीवन पर्यंत समर्पित रहेगा। इस अवसर पर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीराम वल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महामंडलेश्वर गिरीश दास, बड़े हनुमान के उत्तराधिकारी छविरामदास, खाकचौक के महंत अयोध्या दास, हनुमत निवास के महंत मिथिलेशनंदनी शरण, महंत सर्वेश दास, संत मिथिला बिहारी शरण, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। शाम के सत्र में मंदिर परिसर में हनुमान जयंती मनाई गई। चौथे दिन श्रीराम नाम मंत्र का अनुष्ठान होगा। समारोह के अंतिम दिन 1 नवंबर को पंडित रामकिंकर महाराज की जयंती मनाई जाएगी।
: सनातन धर्म के सद्ग्रन्थों को अध्यात्मदीप कहा गया: रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Wed, Oct 30, 2024
सनातन धर्म के सद्ग्रन्थों को अध्यात्मदीप कहा गया: रत्नेशप्रपन्नाचार्यसरायराशी पूरा बाजार में हनुमान जयंती के पावन अवसर पर व्यासपीठ से हनुमत कथा की अमृत वर्षा हो रहीअयोध्या। श्रीराम नाम को भी दीप कहा गया है ,सनातन धर्म के सद्ग्रन्थों को अध्यात्मदीप कहा गया है ।दीपावली पर हम दीप जलाकर बाहर -भीतर दोनों तरफ़ उजियारा कर लें।उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने हनुमत कथा के पंचम दिवस कही। सरायराशी पूरा बाजार में हनुमान जयंती के पावन अवसर पर व्यासपीठ से हनुमत कथा की अमृत वर्षा कर रहें आचार्य रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि दीपावली का पर्व ज्योति का पर्व है। यह अपने भीतर सुषुप्त चेतना को जगाने का अनुपम पर्व है। यह हमारे आभामंडल को विशुद्ध और पर्यावरण की स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश देने का पर्व है। भगवान महावीर ने दीपावली की रात जो उपदेश दिया उसे हम 'प्रकाश पर्व' का श्रेष्ठ संदेश मान सकते हैं। भगवान महावीर की यह शिक्षा मानव मात्र के आंतरिक जगत को आलोकित करने वाली है। तथागत बुद्ध की अमृतवाणी 'अप्प दीवो भव। आचार्य श्री ने कहा कि अर्थात्, 'आत्मा के लिए दीपक बनो' वह भी इसी भावना को पुष्ट कर रही है। इतिहासकार कहते हैं कि जिस दिन ज्ञान की ज्योति लेकर नचिकेता यमलोक से मृत्युलोक में अवतरित हुए वह दिन भी दीपावली का ही दिन था। यद्यपि लोकमानस में दीपावली एक सांस्कृतिक पर्व के रूप में अपनी व्यापकता सिद्ध कर चुका है। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि यह बात सच है कि मनुष्य का रुझान हमेशा प्रकाश की ओर रहा है। अंधकार को उसने कभी न चाहा, न कभी मांगा। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय। भक्त की अंतर भावना अथवा प्रार्थना का यह स्वर भी इसका पुष्ट प्रमाण है। 'अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें। इस प्रशस्त कामना की पूर्णता हेतु मनुष्य ने खोज शुरू की। उसने सोचा कि वह कौन-सा दीप है, जो मंजिल तक जाने वाले पथ को आलोकित कर सकता है। अंधकार से घिरा हुआ आदमी दिशाहीन होकर चाहे जितनी गति करे, सार्थक नहीं हुआ करती। प्रकाश ऊर्जा का एक रुप होता है जिसकी उपस्थिति द्वारा हम वस्तुओं को देखते है। वेद में यह स्पष्ट उल्लेख है कि हमारी माँग उस परमात्मा तक पहुँचे इसके लिए एक प्रकाश का सहारा लिया जाना आवश्यक है, एक ज्योति को माध्यम बनाना जरूरी है, क्योंकि प्रकृति से, ईश्वर से कोई भी याचना तब तक स्वीकार नहीं होती जब तक याचक अपना संबंध पहले प्रकाश से नहीं जोड़ लेता। प्रकाश मनुष्य और ईश्वर के बीच का संदेशवाहक है। इस मौके पर शिव प्रताप सिंह,प्रमोद कुमार सिंह “आशु” ,गोपाल सिंह,नन्दन सिंह, उदय प्रताप सिंह ,गोविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।