: राजू दास के बयान पर भड़के बालयोगी रामदास
Fri, Jan 24, 2025
राजू दास के बयान पर भड़के बालयोगी रामदासकरतलिया बाबा आश्रम पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास ने कहा, सतही लोकप्रियता पाने के लिए उलजलूल बयान देते रहते है राजूदासउनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, इलाज की है जरुरतअयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ श्री करतलिया बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास महाराज राजूदास के बयान भड़क गए।उन्होंने राजू दास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह साधु के रुप में बकवास करके हमेशा उलजलूल बयान देकर सतही लोकप्रियता पाना चाहते है। बता दें कि प्रयागराज महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की मूर्ति लगाई गई है। इसे लेकर हनुमानगढ़ी से जुड़े राजू दास की ओर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर पूरे देश में घमासान मचा है।बालयोगी ने कहा कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी। यह साधु की भाषा नहीं है। राजूदास का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, उनको इलाज की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने मुलायम सिंह यादव की सराहना करते हुए कहा कि इस दुनिया में मुलायम सिंह से अच्छा नेता कोई नहीं। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता है।महंत बालयोगी रामदास महाराज ने कहा किइतनी घटिया भाषा का प्रयोग करने वाले साधु नही हो सकते है? अभी तक ये जेल क्यों नहीं गये? राजू दास के ऊपर श्रद्धेय नेता जी के ऊपर गलत टिप्पणी करने के लिए जल्द से जल्द करवाई होनी चाहिए। बालयोगी जी ने कहा कि जो अभद्र भाषा का प्रयोग किया है वह बर्दाश्त के लायक नहीं है. क्योंकि, मुलायम सिंह यादव सपा कार्यकर्ता के आराध्य हैं. उनके रोल मॉडल हैं. कुंभ मेला में उनकी प्रतिमा जो स्थापित की गई है वह इसलिए है कि जो भी समाजवादी पार्टी का नेता कार्यकर्ता वहां पहुंचे, वह अपने इस नेता से भी प्रेरणा ले, देश और समाज के हित में कुछ काम करने की सोचे. लेकिन, राजू दास ने उनकी प्रतिमा को लेकर जो अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए टिप्पणी की है वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कि पद्म विभूषण भारत के पूर्व रक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व मुलायम सिंह यादव पर सोशल मीडिया पर कथित साधु राजू दास की गई अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
: सवा लाख श्रीरामरक्षा स्त्राेत पाठ का हुआ भव्य शुभारंभ
Thu, Jan 23, 2025
सवा लाख श्रीरामरक्षा स्त्राेत पाठ का हुआ भव्य शुभारंभरथ पर सवार होकर शाेभायात्रा में प्रतीकात्मक रुप से निकले श्रीरामलला, बजरंगबली एवं सात विशेष रामरक्षा यंत्रश्रीरामरक्षा यंत्र जनमानस का कल्याण करेगा: महंत कमलनयन दासमणिरामदास छावनी के श्रीराम सत्संग भवन में 250 वैदिक आचार्यो ने किया रामरक्षास्तोत्र पाठप्रथम वर्षगांठ पर हम लाेग 41 दिनों का उत्सव मना रहे हैं: डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्रीअयोध्या। नव्य भव्य मंदिर में भगवान रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ के पावन अवसर पर प्रभु श्री रामलला पाटोत्सव प्रथम वार्षिक महोत्सव की खुशी में बुधवार को प्रात:काल मणिरामदास छावनी से गाजे-बाजे संग भव्य शाेभायात्रा निकाली गई। जाे अपने गंतव्य मणिरामदास छावनी के श्रीराम सत्संग भवन पहुंची। वहां वैदिक मंत्राेच्चार से धर्मध्वजा का एवं मंडल पूजन किया गया। उसके बाद 250 विद्वानों पंडितों ने सवा लाख श्रीरामरक्षा स्त्राेत का पाठ आरंभ किया। शाेभायात्रा में आगे रथ पर श्रीरामलला, बजरंगबली और सात विशेष रामरक्षा यंत्र विराजमान रहा। दूसरे रथ पर मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास और महंत राजूदास की माैजूदगी रही। यह कार्यक्रम श्रीरामलला अयाेध्याजी सेवा समिति के तत्वाधान में हाे रहा है। जिसे रामलला महाेत्सव का नाम दिया गया। जाे 41 दिनों तक अनवरत चलेगा। इस क्रम में 51 विद्वान पंडित मणिरामदास छावनी में प्रतिदिन 21 साै रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करेंगे। रामलला महाेत्सव के आयाेजक और श्रीरामलला अयोध्याजी सेवा समिति अध्यक्ष डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने बताया कि 22 जनवरी 2024 को श्रीरामजन्मभूमि पर भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। बुधवार को प्राण प्रतिष्ठा का एक वर्ष पूर्ण हो गया। रामलला की प्रतिष्ठा के प्रथम वर्षगांठ पर हम लाेग 41 दिनों का उत्सव मना रहे हैं। रामरक्षा स्तोत्र के पाठ संग महाेत्सव का शुभारंभ हो चुका है। इस माैके पर धर्मध्वजा संग दिव्य शाेभायात्रा निकली। मंडल पूजन किया गया। अयोध्या के विद्वान पंडिताें ने रामरक्षा स्तोत्र का पाठ किया। सायंकाल संत-महंतों का समागम और राममंदिर आंदाेलन के बलिदानी कारसेवकाें काे नमन किया गया। रात्रि में सात बजे से देर रात्रि तक भजन संध्या का कार्यक्रम हुआ, जिसमें मुख्य आकर्षण इंदाैर के प्रख्यात गायक सुधीर व्यास रहे। श्री शास्त्री ने बताया कि अनुष्ठान के क्रम में सात विशेष रामरक्षा यंत्र अभिमंत्रित किया जायेगा। जिसमें पहला यंत्र श्रीरामलला, दूसरा हनुमानगढ़ी में बजरंगबली काे समर्पित किया जायेगा, तीसरा रामरक्षा यंत्र मणिरामदास छावनी में तो चाैथा पीएम मोदी एवं पांचवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काे दिया जायेगा। छठां यंत्र समिति काे तथा सातवां यंत्र धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग हाेगा। प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री काे रामरक्षा यंत्र श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्यगाेपाल दास के द्वारा दिया जाएगा। वर्षगांठ महाेत्सव पर रामलला काे 56 भाेग लगा व जयपुरी रजाई समर्पित की गई। वहीं श्रद्धालुओं में पाैष बड़ा का प्रसाद वितरित किया गया। महंत कमलनयन दास ने कहा कि श्रीरामरक्षा यंत्र जनमानस का कल्याण करेगा। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास ने कहा कि हम सबकी पीढ़ी बहुत ही साैभाग्यशाली हैं। जाे हम सबने रामलला का भव्य मंदिर और उसमें रामलला काे विराजमान हाेते देखा। हम लाेग भव्य मंदिर में रामलला के विराजमान हाेने प्रथम वर्षगांठ महाेत्सव मना रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व एवं खुशी की बात है। संत सम्मेलन में जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, महंत तुलसीदास, डॉ सुनीता शास्त्री, बड़े हनुमान मंदिर के अधिकारी छविराम दास, राजस्थान से संत चंवर सिंह सहित बड़ी संख्या में नगरी के साधु संत व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
: राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: जीयर स्वामी
Wed, Jan 22, 2025
राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: जीयर स्वामीप्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में छाया वाल्मीकि रामायण कथा का उल्लास, 120 वैदिक आचार्य कर रहें पाराणय पाठअयोध्या। राम के सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र उकेरकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्गुणों से युक्त आदर्श चरित्र की स्थापना रामकथा का मुख्य प्रयोजन है। उक्त बातें श्री त्रिदंडी अहोबिला रामानुज जीयर स्वामीजी ने प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा के तृतीय दिवस में कही। उन्होंने कहा कि राम परिवार के वैचारिक, भाषिक एवं क्रियात्मक पराक्रम का वर्णन करना ही वाल्मीकि रामायण का प्रधान हेतु रहा है। जीयर स्वामी ने कहा कि रामचरित्र के महासागर में डूबे, राम जल से आकंठ भीगे, करुणा-प्रेम, भक्ति जैसे सकारात्मक रसों से आप्लावित वाल्मीकि तमसा नदी के तट पर स्नान की इच्छा से आए। उनके हृदय में रामभक्ति का समुद्र लहरा रहा था। सारी सृष्टि ही मानो राममय हो गई थी। राम के दैविक गुण, मानवीय वृत्तियाँ, दया, उदारता, अहिंसा, अक्रोध, परदुःख, कातरता अभी भी उनके मन-मस्तिष्क पर छाई हुई थी कि शांत रस का सामना वीभत्स एवं हिंसा वृत्ति से हुआ। शीतल भूमि पर एकाएक दग्धता का अनुभव हुआ, जब सामने ही एक बहेलिए ने हिंसक भावों को प्रकट करते हुए निरपराध, मूक, प्रेमालाप करते हुये क्रौंच पक्षी को स्वार्थवश बाण से आहत कर दिया। अभी-अभी तो नारद से राम बाण, राम के शर संधान की कथा सुनी थी कि राम ने शौर्य, पराक्रम, दयालुता, उदारता आदि भावों का संरक्षण करते हुए दुष्टों के नाश एवं सज्जनों के परित्राण हेतु शस्त्र उठाए थे। कथा से पूर्व मंदिर में 120 वैदिक आचार्य वाल्मीकि रामायण का पारायण पाठ सामूहिक रुप से किया।इसके बाद विश्व कल्याण व राष्ट्र उत्थान हेतु यज्ञ कुंड में आहुतियां डाली गई। इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दक्षिण भारत से सौकड़ों रामभक्त आये है। सौमित्र स्वामीजी व यज्ञाचार्य गिरीधराचार्य स्वामीजी कार्यक्रम की देखरेख कर रहें। महोत्सव की अध्यक्षता सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग के महंत जगदीश दास ने किया। व्यवस्था में हरि स्वामी के साथ हनुमान बाग मंदिर के सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री व नितेश शास्त्री लगे हुए है।