Thursday 7th of May 2026

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आईएमए की आड़ में बदनाम अस्पताल संचालक ने ओढ़ी ईमानदारी की चादर, सोशल मीडिया से पोस्ट गायब होते ही तेज हुई चर्चाएं

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सुचना

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गुलदस्ते में लिपटी “इमेज वॉशिंग” ! : आईएमए की आड़ में बदनाम अस्पताल संचालक ने ओढ़ी ईमानदारी की चादर, सोशल मीडिया से पोस्ट गायब होते ही तेज हुई चर्चाएं

गुलदस्ते में लिपटी “इमेज वॉशिंग” !

आईएमए की आड़ में बदनाम अस्पताल संचालक ने ओढ़ी ईमानदारी की चादर, सोशल मीडिया से पोस्ट गायब होते ही तेज हुई चर्चाएं

'क्या फोटो से धुल जाती है बदनामी?”पोस्ट गायब, चर्चाएं तेज

"अब जनता चेहरा नहीं, चरित्र पढ़ती है”,जनता की अदालत में रिकॉर्ड भी देखे जाते हैं

अयोध्या। रामनगरी में इन दिनों “गुलदस्ता कूटनीति” पूरे शबाब पर दिखाई दे रही है। नवागत जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी से शिष्टाचार मुलाकातों का दौर जारी है और विभिन्न संगठन फूलों के गुलदस्तों के साथ प्रशासनिक गलियारों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। लेकिन इस बार एक तस्वीर ने शहर में व्यंग्य, सवाल और चर्चाओं का नया बाजार गर्म कर दिया।

दरअसल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रतिनिधिमंडल के साथ अयोध्या के चर्चित और विवादों से घिरे निजी अस्पताल, शहर के बदनाम निर्मला हॉस्पिटल के संचालक भी जिलाधिकारी से मिलने पहुंच गए। मुलाकात के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए गुलदस्ता भेंट किया और कैमरे के सामने ऐसी सहजता दिखाई मानो चिकित्सा जगत में सेवा, ईमानदारी और नैतिकता का नया अध्याय लिख दिया हो।

मुलाकात के बाद तस्वीर सोशल मीडिया पर बड़े गर्व के साथ साझा की गई। पोस्ट का अंदाज ऐसा था जैसे अस्पताल नहीं, कोई संत सेवा आश्रम संचालित किया जा रहा हो। फोटो में मुस्कान इतनी आत्मविश्वास भरी थी कि देखने वालों को लगा मानो वर्षों की चर्चित शिकायतें और विवाद गुलदस्ते की खुशबू में स्वतः समाप्त हो गए हों।

“क्या फोटो से धुल जाती है बदनामी?”

लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया अब सिर्फ तस्वीरों के भरोसे नहीं चलती। कुछ जागरूक पत्रकारों और स्थानीय लोगों ने पुराने मामलों और अस्पताल की चर्चित कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

लोगों ने तंज कसते हुए पूछा —

“क्या सिर्फ जिलाधिकारी के साथ फोटो खिंचवा लेने से अस्पताल की पुरानी बदनामी धुल जाती है?”

किसी ने लिखा —

“गुलदस्ता बड़ा असरदार निकला, सालों की शिकायतें मिनटों में साफ हो गईं।”

वहीं एक अन्य टिप्पणी में कहा गया —

“लगता है अस्पताल में इलाज के साथ अब इमेज वॉशिंग पैकेज भी शुरू हो गया है।”

पोस्ट गायब, चर्चाएं तेज

पूरा मामला तब और दिलचस्प हो गया जब सोशल मीडिया पर चमक रही वह पोस्ट अचानक गायब हो गई। पोस्ट हटते ही शहर में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया।

लोग पूछने लगे —

“अगर सब कुछ पाक-साफ था तो तस्वीर हटाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?”

कुछ लोगों ने इसे “डैमेज कंट्रोल” बताया, तो कुछ ने व्यंग्य करते हुए कहा कि सवालों की गर्मी देखकर सोशल मीडिया की “आईसीयू पोस्ट” वेंटिलेटर पर चली गई।

“अब जनता चेहरा नहीं, चरित्र पढ़ती है”

रामनगरी में अब यह चर्चा आम हो चली है कि कुछ लोग सामाजिक और पेशेवर संगठनों की आड़ लेकर अपनी छवि सुधारने में जुटे हैं। आईएमए जैसे प्रतिष्ठित मंच के साथ खड़े होकर खुद को सेवा और नैतिकता का प्रतीक दिखाने का प्रयास भले किया जा रहा हो, लेकिन जनता अब चेहरे से ज्यादा चरित्र पढ़ने लगी है।

शहर के बुद्धिजीवी भी चुटकी लेने से पीछे नहीं हैं। एक वरिष्ठ नागरिक ने मुस्कुराते हुए कहा —

“पहले अस्पतालों में मरीज भर्ती होते थे, अब इमेज भी आईसीयू में भर्ती की जा रही है।”

वहीं एक अन्य व्यक्ति ने तंज कसा —

“गुलदस्ता तो ठीक है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि अस्पताल की साख का इलाज किस वार्ड में होता है?”

जनता की अदालत में रिकॉर्ड भी देखे जाते हैं

फिलहाल यह पूरा मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग कह रहे हैं कि प्रशासनिक मुलाकातें अपनी जगह हैं, लेकिन जनता की अदालत में सिर्फ फोटो नहीं, पुराने रिकॉर्ड भी देखे जाते हैं।

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