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: निष्काम भक्ति की पराकाष्ठा है प्रभु के प्रति केवट का प्रेम: बसंत विजय

बमबम यादव

Sat, Nov 11, 2023

महंत जगदीश दास महाराज की अध्यक्षता में बह रही राम राज्याभिषेक की कथा का रसधार, हनुमान बाग में छाया रामकथा का उल्लास

अयोध्या। श्रीराम चरणों की कृपा पाने वाले सरल सहज भक्तों की श्रेणी में प्रभु श्री राम के अत्यंत प्रिय भक्त जिनकी भक्ति में कुछ भी पाने की कामना नहीं है ऐसे भक्त की भक्ति से ही भगवान प्रसन्न होते हैं भक्त और भगवान एक दूसरे के पूरक हैं। भक्त से ही भक्ति का प्रचार प्रसार होते आया है इसीलिए कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े यह उक्ति चरितार्थ होती है।राम राज्याभिषेक की कथा के पंचम दिवस श्री सिद्ध हनुमान बाग में अपार जन समूह को भगवान के भक्त का जीवंत उदाहरण देते हुए कर्नाटक के कृष्णा गिरि स्थित श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम के पीठाधीश्वर स्वामी वसंत विजय महाराज ने भक्त और भगवान के बीच के मर्म को सुनाया। कथा प्रसंग की विशद व्याख्या करते हुए पूज्य श्री ने केवट के पावन चरित्र को सुनाते हुए कहा कि वास्तव में सच्चा भक्त तो वही है जिसे भगवान से कुछ पाने की इच्छा न हो क्योंकि स्वार्थ सिद्ध करने के लिए की हुई भक्ति तो सौदा हो गया। निः स्वार्थ भक्ति कर भगवान को पाने का सहज साधन है ऐसे ही कुछ सत्कर्मों से पूरित केवट हुए। प्रभु श्रीसीताराम पिता के वचन को मान वनगमन करते हैं। मार्ग में चलते हुए गंगा पार उतरने के लिए केवट से नाव की याचना करते हैं। भगवान के वचन सुन केवट ने उनके मर्म को अन्तर्मन में सोच विचार कर कहा की चरणों की रज मिल जाए तो मै आपको गंगा पार उतार दूं। सौरभ जी ने राम केवट प्रसंग का बड़ा ही मार्मिक भजन सुनो रघुनाथ तुमको पार अब कैसे उतारूं मैं सुना अपार जन समूह को भावविभोर व अश्रुपूरित किया। भगवान ने केवट के प्रेम से भरे वचनों को सुन प्रसन्न हो चरण पखारने की स्वीकृति दी मानो प्रभु ने उसके सम्पूर्ण जीवन की भक्ति को धन्य कर दिया हो। बड़ी उत्सुकता से चरण रज पा कर मानो जगत की अनमोल सम्पदा पा ली हो। करकमल और चरणकमल पाने के अतिरिक्त केवट की कोई कामना नहीं रह गई।
भगवान की इच्छा में ही अपना कल्याण मानकर भक्ति मार्ग पर चलने से ही भगवान प्रसन्न होकर भक्त के आधीन हो जाते हैं।
प्रतिष्ठित पीठ हनुमान बाग में दीपावली के पावन अवसर पर श्रीराम राज्याभिषेक महाकथा एवं देवी पद्मावती की कुमकुम अर्चना महालक्ष्मी मंत्र का दिव्य भव्य अनुष्ठान अपने पूरे चरम पर है। इस महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज कर रहें है। व्यवस्था में सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री लगें है।

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