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: फलाहारी बाबा नहीं रहे, संतों में शोक की लहर

बमबम यादव

Sat, Apr 22, 2023

रामनगरी के प्रसिद्ध राजगोपाल मंदिर महंत कौशल किशोर शरण "फलाहारी बाबा" का हुआ साकेवास, अंतिम दर्शन शुरू

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह पहुंचे राजगोपाल मंदिर फलाहारी बाबा का किया नमन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्र भेज कर शोक व्यक्त किया

पूज्य फलाहारी बाबा की सनातन धर्म एवं संस्कृति की असीम सेवा अविस्मरणीय है: योगी आदित्यनाथ

अयोध्या। रामनगरी के प्रतिष्ठित पीठ श्री राजगोपाल मंदिर के महंत कौशल किशोर शरण फलहारी बाबा नहीं रहे। उन्होंने करीब 92 साल की उम्र मे लखनऊ के अस्पताल में आखिरी सांस लीं। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।अयोध्या के राज गोपाल मंदिर के महंत कौशल किशोर शरण फलहारी बाबा के साकेतवास से संत समाज में सहित उनके लाखों शिष्यों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका कल सुबह सरयू घाट पर अंतिम संस्कार होगा।
फलाहारी बाबा का पार्थिव शरीर अयोध्या के राजगोपाल मंदिर लाने के बाद अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। 23 अप्रैल को सुबह जल समाधि दिया जायेगा।
शोक संवेदना व्यक्त करने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह राजगोपाल मंदिर पहुंचे, जहां पर पूज्य फलाहारी बाबा को उन्होंने नमन कर रामनामा चढ़ाया। फलाहारी बाबा के शिष्य डा शरद जी ने यह जानकारी दी।

तो वही सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्र भेज कर शोक व्यक्त किया और कहा कि पूज्य फलाहारी बाबा की सनातन धर्म एवं संस्कृति की असीम सेवा अविस्मरणीय है।
अयोध्या के पड़ोसी जनपद बलरामपुर के ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले फलाहारी बाबा ने मुहल्ला स्वर्गद्वार के हनुमत सदन मंदिर में दशको हनुमान जी की कठिन साधना की। इस समय उनके दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता। कालांतर में अयोध्या के महंतों ने उन्हें राजगोपाल मंदिर की सम्पत्ति की रक्षा के लिए इस प्रसिद्ध मंदिर का महंत बना दिया। फकीर स्वभाव वाले फलाहारी बाबा इसके लिए अपने लोगों को मना तो नहीं कर सके पर यह दायित्व उनकी आत्मा सहज स्वीकार न कर सकी।
राम मंदिर के विवाद में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या के कई महंतों के साथ बुलाया गया। उनकी बेबाकी, ब्रह्मज्ञान को सुनने वाले उन्हें चकित होकर देखते रह जाते। कड़ी साधना से उपजा उनका ज्ञान बड़े से बड़े विेद्वानों को भी चकित करने वाला रहा। उनकी इसी ज्ञान से प्रभावित होकर हनुमत निवास के आचार्य डाक्टर मिथिलेशनंदिनी शरण और तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति तिवारी जैसे तर्कशील युवा महंतों ने उन्हें अपने गुरू के रूप में स्वीकार कर खुद को धन्य माना। शोक संवेदना व्यक्त करने वाले आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथली रमण शरण, हनुमत निवास के महंत मिथलेश नन्दनी शरण, हनुमानगढ़ी के महंत बलराम दास,पुजारी हेमंत दास, संत एमबीदास, सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रतिनिधि सोनू सिंह, अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी, धनश्याम पहलवान सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।

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