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: भगवान की लीला अपने भक्तों के कल्याण के लिए होती है: महंत गणेश दास

बमबम यादव

Tue, Aug 23, 2022

काठिया मंदिर में ठाकुर जी के पाटोत्सव का उल्लास चरम पर

हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास का महंत रामरतनदेवाचार्य ने किया स्वागत

अयोध्या। आपके दुख का कारण दुनिया से आपका बंधन है। पूरे संसार में सुख केवल आपको ठाकुर जी श्रीकृष्ण भगवान ही दे सकते है बंधनों से मुक्त करके श्री अवध धाम के वासुदेव घाट स्थित काठिया मंदिर में ठाकुर जी के पाटोत्सव पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में महंत गणेश दास जी महाराज नहीं कही। श्री महाराज जी ने  जीव जगत के बंधन और सुख-दुख के रहस्य को बताया। व्यासपीठ से गणेश दास महाराज ने पुतना उद्धार एवं श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। 

कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि भगवान जो भी लीला करते हैं वह अपने भक्तों के कल्याण या उनकी इच्छापूर्ति के लिए करते हैं। श्रीकृष्ण ने विचार किया कि मुझमें शुद्ध सत्वगुण ही रहता है, पर आगे अनेक राक्षसों का संहार करना है। इसलिए ब्रज की रज के रूप में रजोगुण संग्रह कर रहे हैं। पृथ्वी का एक नाम 'रसा' है। श्रीकृष्ण ने सोचा कि सब रस तो ले चुका हूं अब रसा पृथ्वी रस का आस्वादन करूं। पृथ्वी का नाम 'क्षमा' भी है। माटी खाने का अर्थ क्षमा को अपनाना है। भगवान ने सोचा कि मुझे ग्वाल-बालों के साथ खेलना है, किंतु वे बड़े ढीठ हैं। खेल-खेल में वे मेरे सम्मान का ध्यान भी भूल जाते हैं। कभी तो घोड़ा बनाकर मेरे ऊपर चढ़ भी जाते हैं। इसलिए क्षमा धारण करके खेलना चाहिए। अत: श्रीकृष्ण ने क्षमारूप पृथ्वी अंश धारण किया।

भगवान ब्रजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखे हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं। पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। अत: उसका कुछ अंश द्विजों (दातों) को दान कर दिया। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी 'मा ! कन्हैया ने माटी खायी है।' 'बालक माटी खायेगा तो रोगी हो जायेगा' ऐसा सोचकर यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। उन्होंने कान्हा का हाथ पकड़कर डांटा। मां के डांटने पर जब श्रीकृष्ण ने अपना मुंह खोला तो उसमें पूरी सृष्टि ही नजर आने लगी।पाटोत्सव के अवसर पर प्रतिदिन मंदिर परिसर में संतों का भंडारा भी किया जाता है।कथा में हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत माधव दास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास का महंत रामरतनदेवाचार्य ने स्वागत किया। इस अवसर पर ब्रह्म पीठाधीश्वर रामरतनदेवाचार्य महाराज सूरदास, मोहनदास सहित सैकड़ों संतो महंतों ने कथा श्रवण किया।

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