Friday 5th of June 2026

ब्रेकिंग

जानकीघाट बड़ा स्थान में संत समाज ने किया सम्मान समारोह, आध्यात्मिक व डिजिटल क्षेत्र में योगदान की सराहना

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होंगे सोनम वांगचुक, कहा- 'अगर अब नहीं, तो कब?'

गोविंदा के जयघोषों के बीच दिव्य कलशाभिषेक, सुगंधित द्रव्यों से महका अयोध्या धाम

देशी-विदेशी फूलों से महका मंदिर परिसर, भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु

आंजनेय सेवा संस्थान तत्वावधान में सजा घटा,हुई 1100 बत्ती की महाआरती

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य धारण करना ही धर्म है: रामानंदाचार्य  : पुरुषोत्तम मास पर रामनगरी के मणिराम दास छावनी स्थित धर्म मंडप में छाया रामकथा का उल्लास 

प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य धारण करना ही धर्म है: रामानंदाचार्य 

पुरुषोत्तम मास पर रामनगरी के मणिराम दास छावनी स्थित धर्म मंडप में छाया रामकथा का उल्लास 

अयोध्या।प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य धारण करना ही धर्म है।विपत्ति में ही हमारी वास्तविक परीक्षा होती है।जीवन समस्याओं का घर है।समस्याओं को देखकर कायर अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं और धर्मज्ञ संघर्ष करते हैं।श्रीराम का चरित्र हमें अवसाद से बचने की शिक्षा देता है।ये बहुमूल्य मानव जीवन भगवान का प्रसाद है इसे यूँ ही न गँवाये। यह उद्गार है जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज के है। वे पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर रामनगरी के मणिराम दास छावनी स्थित धर्म मंडप में अग्रवाल समाज सेवा ट्रस्ट एवं श्री लक्ष्मी नाथ सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा कह रहें हैं। सप्तम दिवस आचार्य श्री राम कथा को आगे बढ़ाते हुये कहते है कि मंथरा के कुसंग ने कैकेयी के हृदय को परिवर्तित कर दिया।जो कैकेयी श्रीराम से इतना प्रेम करती थी वही राम को वन भेज देती हैं।कुसंग अपना और पराये का भेद सिखा देता है।जहाँ यह भेद आया वहाँ केवल दुख मिलता है।अत: कुसंग से बचकर हमें निरन्तर सत्संग करना चाहिये। कथाव्यास जगद्गुरू जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का दिव्य चरित्र आज भी सबके हृदयों में गहरा उतरा हुआ है। विनम्रता मानवीय गुण है। इस गुण की उपज हमारे मन द्वारा हुई है। व्यक्ति की पालन-पोषण में परिवार के संस्कार और देश की संस्कृति का प्रभाव तो पड़ता ही है। इसीके फलस्वरूप उसके व्यवहार में विनम्रता का गुण भी पनपता है। विनम्रता से व्यक्ति में पात्रता आती है। उन्होंने कहा कि विनम्रता मानव का सबसे बहुमूल्य श्रृंगार है। कोई भी कार्य कठोरता से नहीं करवाया जा सकता है। उग्रता से बनते हुए काम भी बिगड़ जाते हैं। आप कितने भी पढ़े-लिखे हैं लेकिन आपके स्वभाव में विनम्रता नहीं है तो आप कितना भी शिक्षित हो सब व्यर्थ है। अतः समाज में विनम्र व्यक्ति ही सफल एवं शीर्ष तक पहुँचते है और संसार से जाने के बाद भी याद किए जाते हैं। वास्तव में विनम्रता मानव को महान बनाती है।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें