: तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे: महंत जनार्दन दास
Sun, Aug 11, 2024
तुलसीदास जी की छावनी मंदिर में धूमधाम से मनाया गया गोस्वामी तुलसीदास जी जन्म जयंतीअयोध्या। प्रभु श्रीराम को जन-जन तक रामचरित मानस से पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास की जयंती रामनगरी अयोध्या में धूमधाम से मनाई गई। तुलसीदास जी की छावनी मंदिर में तुलसी के जन्मोत्सव पर सुबह से बधाईयां बजी। छावनी जैसे पवित्र स्थान पर आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। जिसमें पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया। तो वही देर शाम कवि सम्मेलन व गोस्वामी तुलसीदास जी जीवन चरित्र पर विद्धानों द्धारा गोष्ठी किया गया। यह आयोजन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दासजी महाराज के संयोजन में हुआ। तुलसी दास जी की छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास जी महाराज कहते है कि सावन माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसीदास जयंती मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे। रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने ही की थी। तुलसीदास की इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का काव्य रूप में वर्णन किया है। कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के साक्षात दर्शन हुए थे। तुलसीदास जी ने कवितावली, दोहावली, हनुमान बाहुक, पार्वती मंगल, रामलला नहछू आदि कई रचनाएं कीं। उनके दोहे भी जन-जन की जुबां पर आज भी हैं। उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश दिए हैं। उनके दोहों से अच्छी सीख मिलती हैं। इस मौके पर महंत सत्यदेव दास, महंत रामकरन दास, नन्हें भाई सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: जिसका मन काबू में नहीं उसकी भक्ति किसी काम की नही: शिवांश
Sat, Aug 10, 2024
हनुमान बाग मंदिर में रामकथा का उल्लास चरम पर, मंदिर में झूलनोत्सव अपने शबाब पर, हनुमान बाग मंदिर दुल्हन की तरह सजीअयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों व्यासपीठ से श्रीराम कथा कथा की अमृत वर्षा वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथावाचक आचार्य शिवांश मिश्र जी कर रहें हैं। यह महोत्सव हनुमान बाग के भजनानंदी संत महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा के पंचम दिवस शिवांश जी ने कहा कि आप उन लोगों को मिलते हैं जो दीन हीन हो कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं उनको आप मिलते हैं जो अपने पद का, अपने धन का, अपने सौंदर्य के मद में डूब जाता है उसको आप नहीं मिलते हो जब तक हमारे ह्रदय इन उपाधियों से छुटकारा नहीं पा लेता तब तक हमारा ह्रदय शुद्ध नहीं होगा और जब तक ह्रदय शुद्ध नहीं होगा तब तक हमे भगवान मिलने वाले नहीं है। आचार्य जी कहते हैं कि जब व्यक्ति अपने हृदय को शुद्ध कर लेगा विनम्रता से तो कही जाकर शुद्ध ह्रदय में भक्ति पैदा होगी। जिस प्रकार सत्संग सुनने के लिए हम अपनी चप्पल जूते बाहर उतार कर आते हैं उसी प्रकार अपने जीवन में भक्ति पाने के लिए हमें अपने सारे पद प्रतिष्ठ सभी उपाधियों को जीवन से उतार देना चाहिए। जब तक हम भगवान की प्रसन्नता के लिए कार्य नहीं करेंगे तब तक हमे भगवान मिलने वाले नहीं। आचार्य शिवांश जी कहते हैं कि भगवान को प्राप्त करने का एकमात्र मूल्य है अपने हृदय को भगवान को पाने की उत्कंठा मैं लगाना हमें अपने हृदय में भगवान को पाने की उत्कंठा होनी चाहिए। जब तक उत्कंठा नहीं होगी तब तक भगवान मिलने वाले नहीं है। ज्ञान के बलबूते पर हम भगवान को नहीं पा नही सकते। जो दशरथ जी थे वह ज्ञान स्वरूप थे और कौशल्या माताजी भक्ति स्वरूप थीं। भगवान जब भी कभी किसी को मिलेंगे तो वह केवल भक्ति के माध्यम से ही मिलेंगे। तो वही हनुमान बाग के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं के भव्य प्रसाद वितरण किया जा रहा है। जिसमें पूढ़ी,सब्जी व मीठा तो चावल राजमा हलुवा आदि प्रसाद से भक्तों की सेवा हो रही है।यह महोत्सव हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अध्यक्षता में हो रहा।महोत्सव की देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें। कार्यक्रम में मुख्य रुप से आरडी खन्ना, बीरभान अरोड़ा, मनोहर लाल शर्मा, बीडी गुप्ता, बलदेव शर्मा,राजकुमार महाजन, रमेश गुप्ता, नितेश शास्त्री आदि रहें।
: श्री राम कथा मानव जीवन का आचार संहिता, व्यवहार संहिता और भव पार संहिता है: प्रभंजनानन्द शरण
Thu, Jan 18, 2024
भक्ति, श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक है सियाराम किला झुनझुनिया बाबा का आश्रम
सियाराम किला के प्रथम आचार्य की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में नवाह पारायण पाठ, विशाल अन्नक्षेत्र के साथ वैदिक आचार्य डाल रहें यज्ञ कुंड में आहुतियां
अयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है। वही इन दिनों अयोध्या जी में भगवान रामलला का भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है जिसको लेकर पूरे देश ही नही पूरे विश्व में रामनाम का डंका बज रहा है। हर कोई रामरस में गोता लगा रहा है। तो वही सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम आचार्य पीठाधीश्वर मिथिला शरण जी महाराज के प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पौष शुक्ल द्वादशी 22 जनवरी को होगी। कार्यक्रम में व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण महाराज कर रहें है। कथा के प्रथम दिवस स्वामीजी ने कहा कि श्री राम कथा मानव जीवन का आचार संहिता व्यवहार संहिता और भव पार संहिता है श्री रामचरितमानस में जो आस्तिकता धार्मिकता व्यवहारिकता प्रभु भक्ति उदात एवं दिव्य भावनाओं और उच्च नैतिक आदर्श का वर्णन मिलता है वह अन्यत्र कहीं अत्यंत ही दुर्लभ है मानव के आदर्श चरित्र का यथार्थ वर्णन अगर कहीं जानना है तो श्री राम कथा को अवश्य सुनें। उन्होंने कहा कि संसार का संयोग अनित्य है और वियोग नित्य है संसार के जिन भौतिक वस्तुओं को हम महत्व देते हैं उन वस्तुओं का एक ही काम है कि वह परमात्मा से हमें दूर रखने का कार्य करती है । संसार स्वयं असत्य है और संसार से हमारा संबंध भी असत्य है । यह संसार मेहंदी के पत्ते की तरह ऊपर से तो हरा दिखता है पर यह परमात्मा की लाली से परिपूर्ण है। स्वामी प्रभंजनानन्द शरण ने कहा कि सुख के लिए केवल निरंतर प्रयास ही पर्याप्त नहीं है अपितु उचित दिशा में प्रयास हो यह भी आवश्यक है दुख भगवान के द्वारा दिया गया कोई दंड नहीं है यह तो हमारे कर्मों का फल है जीवन में सुखी होने की चाहत तो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है पर उसके प्रयास सदैव विपरीत दिशा में होते हैं यदि आप सच में सुखी होना चाहते हैं तो फिर उन रास्तों का त्याग क्यों नहीं करते जिन रास्तों से दुख आता है आपकी सुख की चाहत तो ठीक है पर रासता ठीक नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें सियाराम किला पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण जी महाराज ने कहा कि मन में कोई बोझ मत रखिए मस्त रहिए अस्त व्यस्त नहीं रहिए खुश रहिए मुस्कुराते रहिए दूसरों से घृणा करने में अपना समय और ऊर्जा नष्ट ना करें प्रेम एवं आनंद के लिए पहले ही बहुत कम समय है जो समय एवं ऊर्जा हम किसी से घृणा निंदा में लगाते हैं वह प्रेम में लगाइए जीवन स्वर्ग तुल्य हो जाएगा। आज कथा के शुभारंभ में कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह शामिल हुए और संतों का आशीर्वाद लिये।