: बड़े सरकार पुजारी रामशंकर शरण महाराज शिद्दत से शिरोधार्य हुए
Sat, Nov 26, 2022
रसिक उपासना परम्परा की शीर्षस्थ पीठ विअहुति भवन में विवाह महोत्सव शुरु
अयाेध्या। श्री राम लला की जन्मस्थली अयोध्या के रसिक उपासना परम्परा की शीर्षस्थ पीठ विअहुति भवन में सीता राम विवाह का उत्सव महीने में कुछ पंचमी को छोड़ कर के बाकी सभी पंचमी को भगवान का विवाह बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन इसका मुख्य पर्व अगहन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और यह पर्व अनंत श्री बड़े सरकार पुजारी रामशंकर शरण महाराज की पुण्यतथि से प्रारंभ होता है और इस अवसर पर अयोध्या के संतो महंतों ने श्री महाराज जी के 52 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। परंपरा के अनुसार इस मंदिर में विवाह उत्सव बड़े ही परंपरा के अनुसार मनाया जाता है और यह परंपरा बड़े सरकार ने ही स्थापित की है जो निरंतर चलती आ रही है।
अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने साकेतवासी बड़े सरकार के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस माैके पर विअहुति भवन के वर्तमान महंत वैकुंठ शरण महाराज ने कहा कि श्री बड़े सरकार अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। वह भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। साथ ही साथ गाै और संत सेवी भी रहे। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। वह आजीवन मंदिर के उत्तराेत्तर विकास में लगे रहे। आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। इस अवसर पर मणिराम दास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, दिगंबर अखाड़ा महंत सुरेश दास, लक्ष्मणकिला धीश महंत मैथिलीरमण शरण, जगद्गुरू स्वामी रामदिनेशाचार्य, बड़ाभक्तमाल महंत अवधेश कुमार दास, महंत अयोध्या दास, तिवारी मंदिर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, खाकचाैक श्रीमहंत बृजमाेहन दास, महंत जनार्दन दास, दशरथगद्दी महंत बृजमाेहन दास, महंत अवधकिशाेर शरण, महंत रामलाेचन शरण, महंत अर्जुन दास, महंत रामकुमार दास, महंत रामप्रिया शरण, महंत प्रियाप्रीतम शरण, स्वामी छविराम दास, विअहुति भवन के भोला बाबा पाठक जी, पुजारी विद्याभूषण, पार्षद पुजारी रमेश दास आदि उपस्थित रहे।
: रामार्चा पूजन के साथ किशोरी जी के मायके में विवाह महोत्सव शुरु
Sat, Nov 26, 2022
जानकी महल की ऐतिहासिक फुलवारी लीला शनिवार को, संतो का प्राप्त होगा सानिध्य
अयोध्या।वैष्णव नगरी अयोध्या श्री सीताराम विवाहोत्सव के उल्लास में डूबने लगी है। रामनगरी के मंदिरों में श्री सीताराम विवाहोत्सव का पर्व विधिविधान पूर्वक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्यम हर्षोल्लास से मनाया जाता है। अयोध्या के संत राम विवाह की तैयारी में मग्न नजर आ रहे हैं।मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम व जनकनंदिनी माता सीता के विवाह का मुख्य उत्सव अगहन शुक्ल पंचमी 28 नवंबर को होगा।पराम्बा जगदंबा भगवती जानकी के मायके के रूप में प्रचलित जानकी महल की स्थापना जानकी वर विहार कुंज के रूप में की गई थी। दूल्हा-दुल्हिन सरकार के रूप में विराजित युगल सरकार की नयनाभिराम जोड़ी की अष्टायाम सेवा उनके परिकर करते हैं। यहां प्रतिवर्ष नयनाभिराम विवाहोत्सव होता है। जिसका शुभारंभ शुक्रवार को सुबह रामार्चा पूजा से प्रारंभ हो गया है। जानकी महल के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि रामार्चा पूजन के साथ अभिभावकों से प्रारंभ हो गया है सायं कालीन सत्र में रामलीला का अद्भुत प्रदर्शन हुआ जिसको देख सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। 26 नवंबर को फुलवारी का कार्यक्रम होगा जिसमें अयोध्या के सभी संत महंत शामिल होंगे और 28 नवंबर को बारात निकाले जाएंगे रात्रिकालीन सत्र में विवाह संपन्न होगा।
: श्रीमद् भागवत कथा मानव जीवन में हृदय के संशयों को करती है दूर : राधामोहन शरण
Sat, Nov 26, 2022
राधा सर्वेश्वर भगवान की भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का हुआ शुभारंभ
अष्टोत्तरशत श्रीमद् भागवत कथा के पूर्व मंदिर से निकली शोभायात्रा, हुआ पूजन अर्चन
अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के जानकी घाट स्थित नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आज समारोह पूर्वक शुभारंभ हो गया। अष्टोत्तरशत श्रीमद् भागवत कथा के पूर्व मंदिर से कलश यात्रा निकली, जो नगर भ्रमण करते हुए यात्रा पुनः मंदिर वापस आई। व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज कर रहे है। कथा के प्रथम दिवस देवाचार्य जी महाराज ने मद्भागवत कथा प्रेमियों को प्रथम दिवस की कथा में प्रवेश कराते हुए प्रथम स्कंध के प्रथम श्लोक सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पयादि हेतवे तापत्रय विनाशाय श्री कृष्ण वयं नम: की व्याख्या करते हुए भक्तों को सुखदेव जी के जन्म की कथा का वृतांत सुनाया। जगद्गुरू जी ने कहा कि कल्प कोटि काशी बसे मथुरा कल्प हजार, एक निमिश सरयू बसे तुलय न तुलसी दास। द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी ने कहा कि सुखदेव जी माता के गर्भ से जन्म लेते ही वन में चले गए। ऐसे सर्वभूत श्री सुखदेव जी जिन्हें ये भी नहीं पता की स्त्री और पुरुष में क्या भेद है। जिनके पिता श्री वेद व्यास जी उन्हें मिलने के लिए जंगल गए और पुत्र-पुत्र कहते हुए थक गए तब तरु यानि वृक्षों ने कहा की कौन किसका पुत्र और कौन किसका पिता? वेद व्यास जी आप जिनको अपना पुत्र कह रहे है वो तो कभी आपका पिता था। ऐसे शब्दों को श्रवण करने से वेद व्यास जी को सत्य का ज्ञान हो गया और वो सुखदेव जी को बिना साथ लिए ही वापस चले आए। आगे के प्रसंगों के माध्यम से परीक्षित जी के जन्म प्रसंग कुंती स्तुति भीष्म स्तुति राजा परीक्षित जी का सुखदेव जी की सभा में आगमन सधोमुक्ति का वर्णन किया। देवाचार्य जी ने श्री मद्भागवत कथा का परिचय देते हुए कहा कि श्री मद्भागवत कथा मानव जीवन का आधार है। श्री मद्भागवत ह्रदय के संशयों को दूर करती है। इस दौरान हरिनाम संकीर्तन कर ठाकुर जी का गुणगान किया। ठाकुर जी की आरती तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास महाराज व हनुमानगढ़ी के महंत रामकरन दास ने किया। कथा के शुभारंभ से पूर्व यजमान ने व्यासपीठ का पूजन किया। इस महोत्सव की व्यवस्थापक द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी के कृपापात्र शिष्य महंत सनत कुमार शरण लगे हुए है। कार्यक्रम के संयोजक व व्यवस्थापक महंत सनत कुमार शरण ने कहा कि पूज्य गुरुदेव श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महराज जी के पावन सानिध्य में अयोध्या की धरा पर श्री राधा सर्वेश्वर भगवान की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ आज हुआ। महोत्सव का मुख्य उत्सव 28 नवंबर को होगा जिसमें भगवान राधा मोहन की प्राण प्रतिष्ठा व गुरुदेव भगवान की महंताई समारोह होगा।