: हनुमान बाग में सीताराम विवाह महोत्सव की धूम
Sun, Nov 27, 2022
हनुमान बाग से जुड़े भक्तों का मंदिर में लगा जमावड़ा, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदास व श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास के साथ हनुमानगढ़ी के नागा मामा दास करेंगे श्री राम बारात की अगुवाई
अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के जिन चुनिंदा मंदिरों में उत्सव बिल्कुल शाही अंदाज से मनाया जाता है हनुमान बाग उनमें से एक है। श्री हनुमान बाग में उत्सव मनाने का अपना एक अलग अंदाज है। महंत जगदीश दास महाराज के सानिध्य से उत्सव में चार चांद लग जाता है। हनुमान बाग में सीताराम विवाह महोत्सव बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। इस बार विवाह महोत्सव और भी दिव्य भव्य रुप में मनाया जा रहा है। सोमवार 28 नवंबर को मंदिर से निकलने वाली राम बारात की अगुवाई जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदास व श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास के साथ हनुमानगढ़ी के नागा मामा दास कर रहे है। साथ ही हनुमानगढ़ी के सौकड़ों वरिष्ठ नागा साधु संत बारात की शोभा होगें। बाराती के लिये विशेष पोशाक बनाये गये है। इनके साथ बारातियों के स्वागत सत्कार के लिए कलकत्ता से विशेष कारीगर बुलायें गये है। जो विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर बारातियों की मेजबानी करेंगे। कार्यक्रम में मुख्य रुप से विजय टेकरीवाल, शिव सावरगी, बीके सिंह, राम गुप्ता, गौरीशंकर मोहता समेत हनुमान बाग सेवा संस्थान से जुड़े सभी भक्त शामिल हुए है। पूरे कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री, गोलू शास्त्री लगे हुए है।
: श्रीगुरू रामानंद वैष्णव भजनानंद आश्रम के महंत बने विष्णु दास
Sun, Nov 27, 2022
अयाेध्याधाम के विशिष्ट संत-महंत व धर्माचार्यों ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता दी
अयाेध्या। रामनगरी के वासुदेवघाट माेहल्ले में स्थित श्रीगुरू रामानंद वैष्णव भजनानंद आश्रम का नया महंत विष्णु दास महाराज काे बनाया गया। रविवार को मंदिर परिसर में एक महंताई समाराेह का आयाेजन हुआ। समाराेह में अयाेध्याधाम के विशिष्ट संत-महंत व धर्माचार्यों ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर, तिलक देकर महंती की मान्यता प्रदान किया। साथ ही साथ महज्जरनामा पर हस्ताक्षर भी किया। बता दें कि आश्रम के महंत रहे रामसनेही दास तपसी महाराज का कुछ दिन पहले साकेतवास हाे गया था। तब से मठ की गद्दी खाली चल रही थी। जिस पर संताें ने विष्णु दास महाराज काे आसीन किया। अपने ताजपाेशी से नवनियुक्त महंत अभिभूत दिखे। रविवार को साकेतवासी महंत रामसनेही दास महाराज का त्रयाेदश भंडारा भी रहा। जिस पर काफी संख्या में संत-महंत एवं भक्तगणों ने प्रसाद पाया। इस अवसर पर नये महंत विष्णु दास महाराज ने कहा कि उन्हें जिस पद की बागडाेर साैंपी गई है। उस पद की गरिमा वह हमेशा अक्षुण्ण बनाए रखेंगे। उनके द्वारा ऐसा काेई कार्य नही किया जायेगा, जिससे महंत पद की छवि धूमिल हाे। सदैव पद की गरिमा बनाकर चलेंगे। साथ ही साथ आश्रम का सर्वांगीण विकास करेंगे। मठ में गाै, संत, विद्यार्थी एवं अतिथि सेवा पर विशेष ध्यान देंगे। मंदिर काे नित्य नई ऊंचाइयों पर पहुंचायेंगे।अंत में नवनियुक्त महंत ने आए हुए संत-महंतों का स्वागत-सम्मान किया।अखिल भारतीय श्री पंच तेरा भाई त्यागी खाक चौक अयोध्या व संकट मोचन हनुमान किला के महंत परशुराम दास महाराज ने बताया कि विष्णु दास को सनातन परंपरा के अनुसार श्री गुरु रामानंद वैष्णो भजनान्द आश्रम का अयोध्या के संतो महंतों ने कंठी चद्दर तिलक देकर महंत नियुक्त किया। जिससे कि वह मंदिर की सेवा निरंतर संचालित करते रहे। समाराेह में संकटमोचन हनुमानकिला मंदिर के श्रीमहंत परशुराम दास, बड़ाभक्तमाल महंत स्वामी अवधेश कुमार दास, डाड़िया मंदिर महंत गिरीश दास, तुलसीदास छावनी महंत जनार्दन दास, वैदेही भवन महंत रामजी शरण, राधाकुंज मंदिर के महंत सनत कुमार दास, परमहंस आश्रम के राम उजागर दास, पंजाबी मंदिर के महंत राम सुंदर दास, महंत राम जी शरण, राम हर्षण कुंज के संत राघव दास, नागा राम लखन दास, महात्यागी लक्ष्मीदास कोटा राजस्थान, महंत राम बालक दास राजस्थान, महंत जगदीश दास बापू गुजरात भावनगर, सुंदर दास बापू गुजरात सहित सैकड़ों संत महंत एवं भक्तगण ने महाराज जी को कंठी चद्दर दे करके मंदिर की बागडोर सौंपी।
: रामनगरी में विराजेंगे भगवान राधा मोहन, भव्य प्राण प्रतिष्ठा सोमवार को
Sun, Nov 27, 2022
श्री राधा मोहन कुंज में भगवान के विराजने के साथ श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज की होगी महंताई
रामनगरी समेत पूरे भारत से आये संत धर्माचार्य साधुशाही परंपरानुसार देगें कंठी, चद्दर, तिलक
अयोध्या। श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के तृतीय दिवस श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज ने व्यासपीठ से सृष्टि के वर्णन में बताया कि भगवान ब्रह्मा क्रत सृष्टि का दिव्य वर्णन ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचने का दृढ़ संकल्प लिया और उनके मन से मरीचि, नेत्रों से अत्रि, मुख से अंगिरा, कान से पुलस्त्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ठ, अंगूठे से दक्ष तथा गोद से नारद उत्पन्न हुये। कथाव्यास ने कहा कि ब्रह्मा जी ने आदि देव भगवान की खोज करने के लिए कमल की नाल के छिद्र में प्रवेश कर जल में अंत तक ढूंढा। परंतु भगवान उन्हें कहीं भी नहीं मिले। ब्रह्मा जी ने अपने अधिष्ठान भगवान को खोजने में सौ वर्ष व्यतीत कर दिये। अंत में ब्रह्मा जी ने समाधि ले ली। उन्होंने कहा कि इस समाधि द्वारा उन्होंने अपने अधिष्ठान को अपने अंतःकरण में प्रकाशित होते देखा। शेष जी की शैय्या पर पुरुषोत्तम भगवान अकेले लेटे हुए दिखाई दिये। ब्रह्मा जी ने पुरुषोत्तम भगवान से सृष्टि रचना का आदेश प्राप्त किया और कमल के छिद्र से बाहर निकल कर कमल कोष पर विराजमान हो गये। इसके बाद संसार की रचना पर विचार करने लगे।जगद्गुरू जी ने कहा कि ब्रह्मा जी ने दस प्रकार की सृष्टियों की रचना की महत्तत्व की सृष्टि, भगवान की प्रेरणा से सन्त्वादि गुणों में विषमता होना ही इसका गुण है। अहंकार की सृष्टि,इसमें पृथ्वी आदि पंचभूत एवं ज्ञानेन्द्रयि और कर्मेन्द्रिय की उत्पत्ति होती है। भूतसर्ग की सृष्टि, इसमें पंचमाहा भूतों को उत्पन्न करने वाला तन्मात्र वर्ग रहता है। इन्द्रियों की सृष्टि, यह ज्ञान और क्रियाशील शक्ति से उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि सात्विक सृष्टि, अहंकार से उत्पन्न हुए इन्द्रियाधिष्ठाता देवताओं की सृष्टि है। मन इसी सृष्टि के अंतर्गत आता है।अविद्या की सृष्टि इसमें तामिस्त्र, अन्धतामिस्त्र, तम, मोह, माहमोह, पांच गांठें हैं। वैकृत की सृष्टि, यह छह प्रकार के स्थावर वृक्षों की है। इनका संचार जड़ से ऊपर की ओर होता है। तिर्यगयोनि की सृष्टि, यह पशु पक्षियों की सृष्टि है। इनकी 28 प्रकार की योनियां मानी गयी हैं। मनुष्यों की सृष्टि, इस सृष्टि में आहार का प्रवाह ऊपर मुंह से नीचे की ओर होता है। देवसर्ग वैकृत की सृष्टि− इनके अतिरिक्त सनत्कुमार आदि ऋषियों का जो कौमार सर्ग है यह प्राकृत वैकृत दोनों है। द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी के कृपापात्र शिष्य महंत सनत कुमार शरण जी ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का मुख्य उत्सव आज यानि 28 नवंबर सोमवार को समारोह पूर्वक होगा। जिसमें रामनगरी अयोध्या के संत धर्माचार्यों के द्धारा गुरुदेव की महंताई समारोह भी होगा। आये हुए अतिथियों का स्वागत श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट करेगा। आज की कथा में तुलसी दास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, डांडिया मंदिर के महंत महामंडलेश्वर गिरीश दास,राम हर्षण कुंज के संत राघव दास,नागा कृष्ण कांत दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।