: शिद्दत से शिरोधार्य हुए करतलिया बाबा
Sun, Feb 25, 2024
38वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी के संत धर्माचार्यों ने आचार्य श्री किया श्रद्धा सुमन अर्पित
पुष्पांजलि अर्पित करते संत साधक
पूज्य महाराज श्री भले ही स्थूलत: हमारे बीच न हों पर उनकी साधना-सिद्धि की तरंगें अभी भी आश्रम में व्याप्त हैं और एक बड़े आध्यात्मिक परिकर को बराबर प्रेरित करती हैं: बालयोगी
अयोध्या। करतलिया बाबा को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। वे आराध्य में लीनता की मिसाल थे। रविवार को सरयू के संत तुलसीदासघाट स्थित सिद्ध पीठ श्री करतलिया बाबा के आश्रम में उनकी 38वीं पुण्यतिथि मनाई गई और इसी के साथ ही उनकी स्मृति फलक पर हुई जहां संत धर्माचार्यो ने आचार्य श्री के व्यक्तित्व पर वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित की। रामनगरी के सिद्व पीठों में शुमार श्री करतलिता बाबा आश्रम के संस्थापक सिद्व सन्त परमपूज्य श्री करतलिया बाबा जी महाराज की 38वीं पुण्यतिथि आज बड़े धूमधाम से समापन हुआ। कार्यक्रम के समापन में मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें रामनगरी समेत पूरे भारत से आये संत धर्माचार्य सहित परिकरों ने आचार्य श्री श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया।मंदिर में वृहद भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें आये हुए संतो महंतो का मंदिर के महंत बालयोगी रामदास जी ने परम्परागत तरीके से स्वागत किया।
करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास जी महाराज के अनुसार बाबा भले ही स्थूलत: हमारे बीच न हों पर उनकी साधना-सिद्धि की तरंगें अभी भी आश्रम में व्याप्त हैं और एक बड़े आध्यात्मिक परिकर को बराबर प्रेरित करती हैं। बाबा की पुण्यतिथि बालयोगी रामदास के संयोजन में मनाया गया। जिसमें अखंड पाठ का समापन हुआ।इसी कड़ी में देर शाम दिव्य मां सरयू आरती सेवा संस्थान के तत्वावधान में मां सरयू की भव्य फूल बगले की झांकी और 51 सौ बत्ती की महाआरती का आयोजन किया गया। इसके बाद पुण्यतिथि महोत्सव का समापन किया गया। इस मौके पर खाक चौक के महंत विजय रामदास जी महाराज, महंत सच्चिदानंद दास जी महाराज, केदार यादव वाराणसी, राधेश्याम यादव वाराणसी, राजेंद्र यादव वाराणसी, श्रीमहंत बृजमोहन दास,महंत परशुराम दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, महंत जनार्दन दास, महंत गिरीश दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत कन्हैया दास,महंत धर्म दास, महंत रामकुमार दास, महंत जयराम दास, नागा साधु राजू दास, आनंद दास, रवि नागा, कमल दास,पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय पवन, दान बहादुर सिंह, मशहूर डेंटल सर्जन डॉक्टर अनुराग आनंद सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।
: भजनानन्दी सन्तपरम्परा के ध्वजावाहक थे करतलिया बाबा
Sun, Feb 25, 2024
करतलिया बाबा की ईश्वरीय शक्ति ही इनकी परमनिधि एवं मां सरयू का पूजन एवं श्रीराम का भजन ही इनकी आराधना थी: बालयोगी रामदास
38वीं पुण्यतिथि पर मंदिर में अखंड राम चरित मानस का हुआ शुभारंभ, रविवार को रामनगरी के संत पुष्पांजलि अर्पित कर नमन करेंगे
अयोध्या। साधना शुचिता और वैराग्य के अमृतपुंज भगवान महाबीर की आध्यात्मिक स्थली श्रीअयोध्याजी के मर्यादित आश्रमों में सिद्धपीठ श्री करतलिया बाबा आश्रम का नाम शुमार है। करतलिया आश्रम आज भी करतलिया बाबा की तपोस्थली के रुप में सुविख्यात है। बाबा की चौथी पीढ़ी वर्तमान परम्परावाहक महंत रामदास बालयोगी उक्त विरासत को समेटे हुए है।
संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी के सिद्ध संतो में एक थे करतलिया बाबा। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित करतलिया बाबा आश्रम के संस्थापक आचार्य करतलिया बाबा की 38वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई जा रही है। करतलिया बाबा मां सरयू के अनन्य उपासक थे। बाबा की पुण्यतिथि बालयोगी रामदास के संयोजन में मनाया जा रहा है। जिसमें शनिवार को अखंड पाठ का आयोजन किया गया जिसका समापन रविवार को होगा। 38वीं पुण्यतिथि का मुख्य आयोजन रविवार को होगा। जिसमें करतलिया बाबा की मूर्ति का पंचामृत अभिषेक वैदिक आचार्यों द्धारा किया जायेगा इसके बाद रामनगरी के संत धर्माचार्य आचार्य श्री पुष्पांजलि अर्पित कर नमन करेगे। कार्यक्रम का समापन वृहद भंडारे के साथ होगा। कार्यक्रम में शामिल होने आये मंदिर श्रीमहंत विजयराम दास जी महाराज, महंत श्री रामेश्वर दास जी महाराज, राम प्रसाद पाण्डेय व केदार यादव रहें। करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने कहा कि पूज्य करतलिया बाबा की 38वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है जो महंत विजयराम दास जी महाराज के दिशानिर्देशन व महंत रामेश्वर दास जी महाराज के देखरेख में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पूरे भारत से करतलिया बाबा के शिष्य परिकर मंदिर आ गये है।
: धर्म-शास्त्रों को समाज में गलत ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा, जिसके कारण विघटन हो: प्रखर जी
Sun, Feb 25, 2024
धर्म-शास्त्र हजारों वर्षों से समाज को प्रेरित करने का कार्य कर रहें, जो हमें जीवन दर्शन का बोध कराते हैं: डा राघवाचार्य
व्यासपीठ का पूजन करते साधक
श्री लक्षचण्डी महायज्ञ में यज्ञाचार्य पं० लक्ष्मीकान्त दीक्षित व काशी के आचार्यत्व में अरणी मंथन हुआ
अयोध्या। अयोध्या के सर्वांगीण विकास एवं विश्वकल्याणार्थ गोला घाट, मां सरयू के पावन गोद में आयोजित हो रहे विराट भव्य 100 कुण्डीय श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्रीराम यज्ञ के दौरान 1700 कर्मनिष्ठ ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ स्थल पर निर्मित 40 पाठशालाओं में दुर्गा सप्तशती एवं गणपत्थर्वशीर्ष पाठों का कम जारी है। इस अनुष्ठान को यज्ञ सम्राट महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज का पावन सानिध्य एवं श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज का संयोजकत्व प्राप्त है। महायज्ञ के प्रवचन पण्डाल (ज्ञान मण्डपम्) में आज सन्त सम्मेलन के दौरान उपस्थित महापुरुषों एवं विद्वत्जनों द्वारा समाज में वर्णाश्रम को लेकर जो भ्रान्तियाँ विद्यमान हैं, उनको दूर करने का प्रयास किया गया। स्वामी प्रखर जी महाराज ने इस विषय पर अपने सम्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में लोग मनमाने ढंग से शास्त्र की व्याख्या करने लगे हैं एवं आज हमारे धर्म-शास्त्रों को समाज में गलत ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसके कारण समाज में विघटन हो रहा है। इसके लिए हमें धर्म-शास्त्रों को अध्ययन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के आयोजन होते रहेंगे तो समाज निश्चित रूप से जागरुक होकर समाजिक कुरीतियों से विमुख होता जाएगा।
महायज्ञ के संयोजक डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारे धर्म-शास्त्रों में वर्णाश्रम की जो व्यवस्था दी गई है, यदि हम उसका अनुपालन करेंगे तो हमारा वर्तमान एवं भविष्य, दोनों ही सुरक्षित रहेगा। स्वामी जी ने कहा कि मनमाना आचरण तो पशु (जानवर) करते हैं, मानव के आचरण के लिए तो हमारे धर्म-शास्त्र हजारों वर्षों से समाज को प्रेरित करने का कार्य कर रहें हैं, आवश्यकता है तो उनको समझने की। हमारे धर्म-शास्त्रों के अनुसार चार वर्ण-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र, समाज के आधारभूत स्तम्भ हैं तथा ऐसे ही चार आश्रम-ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं सन्यास, हमें जीवन दर्शन का बोध कराते हैं। सम्मेलन में उपस्थित जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज, डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी जी, रामकृष्ण रामायणी जी महाराज, अरविन्द पाण्डेय जी, पद्मश्री उदयन जी (इण्डोनेशिया) एवं डॉ० सुभाष तिवारी जी ने भी सम्बोधित किया।
इण्डोनेशिया से पधारे पद्मश्री उदयन जी ने बताया कि कैसे आज भी इण्डोनेशिया में भारत की संस्कृति को सुरक्षित रखा गया है, आज भी वहाँ ब्राह्मण त्रिकाल संध्या करते हैं, धोती धारण करके ही मन्दिर दर्शन करते हैं, उनके आधुनिक विद्यालयों में रामायण एवं श्रीमद्भगतगीता भी पाठ्यकम का ही भाग है। उन्होंने अन्त में कहा कि भारतीय संस्कृति से सुख एवं समृद्धि का मूल तो भारत है लेकिन उससे फलित इण्डोनेशिया भी हो रहा है। कल दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक उनके दल के द्वारा महायज्ञ के लीला मण्डपम् (सभागार) में श्रीरामलीला का भी मंचन किया जाएगा।
यज्ञ में आहुति के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है, अग्नि व्यापक होती है लेकिन यज्ञ के निमित्त उसको प्रकट करने के लिए वैदिक पद्धति है जिसे अरणी मंथन कहते हैं। आज श्री लक्षचण्डी महायज्ञ की विशाल यज्ञशाला में यज्ञाचार्य वेदमूर्ति पं० लक्ष्मीकान्त दीक्षित, काशी के आचार्यत्व में अरणी मंथन द्वारा अग्नि स्थापना की गई। आज से प्रतिदिन के लिए सायं के समय हवन कार्य भी आरम्भ करा दिया गया है। यह जानकारी श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव माता चिदानन्दमयी जी ने दिया। इस अवसर पर राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, कमल किशोर चौधरी, प्रवीन नेमानी, मनीष गर्ग, आनन्द बंसल, अजय बंसल, अमित मित्तल, नरेन्द्र शर्मा, सुषमा अग्रवाल, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, राम मोहन बेड़िया, प्रदीप गुप्ता, अर्पित गर्ग, राजीव अग्रवाल, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, अनिल अग्रवाल, अजेन्द्र अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल,, राजकुमार जिन्दल, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, सुनील नेमानी, राधेश्याम सोनी, अरुण काजरिया, प्रमोद अग्रवाल, पनव अग्रवाल, सर्वेश गुप्ता मनोज भदौरिया, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, इन्दू शुक्ला, कनिष्क मेहता, गौरी शंकर भारद्वाज, सीताराम बडोनी आदि हजारों भक्तजन उपस्थित रहे।