: राम स्नेही सम्प्रदाय के संतों ने शुरु किया रामनगरी में चातुर्मास अनुष्ठान
Thu, Jul 25, 2024
बड़ा रामद्वारा धाम के महंत हरिराम शास्त्री के नेतृत्व में सैकड़ों अनुयायियों कर रहें अनुष्ठान
श्रृंगार कुंज में अभ्यागत संतो का स्वागत मंदिर के महंत हरिजन दास ने किया
राम स्नेही सम्प्रदाय का अयोध्या से भी गहरा नाता है: महंत हरिराम शास्त्री
अयोध्या। रामानंदीय वैष्णव शाखा में राम स्नेही सम्प्रदाय के संतों की मंडली अयोध्या में चातुर्मास अनुष्ठान के लिए पहुंची है। यह संत मंडली संकल्पित अनुष्ठान का क्रम आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक पूर्ण करेगी। बड़ा रामद्वारा धाम के महंत हरिराम शास्त्री के नेतृत्व में सैकड़ों अनुयायियों के साथ यहां पहुंचे संतों की मंडली ने अनवरत अनुष्ठान का क्रम शुरू भी कर दिया है। प्रमोदबन स्थित श्रृंगार कुंज में शुरू इस अनुष्ठान का प्रथम चरण 27 जुलाई को पूरा होगा। वहीं 28 जुलाई से शिव पुराण का पारायण किया जाएगा। यहां पहुंचे अभ्यागत संतो का स्वागत मंदिर के महंत हरिजन दास ने किया।
इस मौके पर रामद्वारा धाम महंत शाखी ने बताया कि उनके सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य स्वामी रामचरण दास महाराज निर्गुण निराकार ब्रह्म के उपासक थे और शब्द ब्रह्म हारामह्न की उपासना करते थे। फिर भी उन्होंने किसी मत या सम्प्रदाय का खंडन मंडन नहीं किया। उन्होंने बताया कि उनके सम्प्रदाय का अयोध्या से भी गहरा नाता है। । बताते हैं बड़ी छावनी के प्रवर्तक आचार्य स्वामी रघुनाथ दास महाराज जो अयोध्या के प्रसिद्ध संतों में शामिल थे, उन्हीं की परम्परा के आचार्य हरिराम दास महाराज से मंत्र दीक्षा ली थी। बताया गया कि उन्होंने विश्राम सागर नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की जिसका पारायण राम स्नेही सम्प्रदाय के संत व अनुयाई करते हैं। इस परम्परा के अनुयाइयों का प्रमुख ग्रंथ प्रवर्तक आचार्य की अनुभव वाणी है, जिसे उनके साधना काल में उन्हीं के शिष्यों ने संकलित किया था। नित्य सत्संग, राम धुन व अनुभव वाणी का पारायण ही संतों की दिनचर्या बताया गया कि चातुर्मास के संकल्प के साथ यहां धूनी रमाते वाले संतों की दिनचर्या में प्रतिदिन प्रातः अनुभव वाणी का पारायण, राम धुन व सायं सत्संग ही है। बताया गया कि पहले चरण के सत्संग में ब्यावर के संत राम केवल दास महाराज द्वारा स्कंद पुराण के आधार पर अयोध्या महात्म्य पर चर्चा चल रही है जो कि 27 जुलाई तक होगी। पुनः 28 जुलाई से चार अगस्त तक शिव पुराण का पारायण व सत्संग होगा। छह अगस्त से 14 अगस्त तक नौ दिवसीय राम कथा प्रवचन और फिर चार सितम्बर से 10 सितम्बर तक संत खम्मा राम महाराज द्वारा विश्राम सागर का पारायण किया जाएगा। इसी तरह श्वांस से श्वांस की अखंड साधना भी चलती रहेंगी। इसी कड़ी में 11 से 17 सितम्बर तक श्रीमद्भागवत पारायण व शारदीय नवरात्र में श्रीरामचरित मानस व श्रीमद वाल्मीकि रामायण का नवाह्न पारायण होगा।
: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: संध्या
Wed, Jul 24, 2024
हनुमान बाग में महंत जगदीश दास महाराज के संयोजन में भव्य श्रीराम कथा का हुआ शुभारंभ
हनुमानगढ़ी से निकला शाही निशान जुलूस, हनुमान बाग में हुआ विधिवत पूजन
कार्यक्रम के संयोजक श्याम जी लाखोटिया जलाना पूना महाराष्ट्र के भक्तों द्धारा किया गया है
अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें श्रीराम कथा में प्रख्यात कथावाचिका संध्या जी ने कही। संध्या जी के श्रीमुख से हनुमान बाग मंदिर में आज से भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व हनुमानगढ़ी का विशेष शाही निशान जो हनुमानजी का प्रतिनिधित्व करती है,वह विशाल शाही जुलूस हनुमानगढ़ी से बैड़ बाजे के साथ निकली। जुलूस का भव्य स्वागत हनुमान बाग में हुआ। इसके बाद दूसरे सत्र में श्रीराम कथा की रसमयी वर्षा हुई।
व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए संध्या जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं।
संध्या जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है। यह महोत्सव हनुमान बाग सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के आयोजक श्याम जी लाखोटिया जालना पूना महाराष्ट्र ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत जगदीश दास जी महाराज कर रहें। कार्यक्रम में निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदरामदास, सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिन दास, नितेश शास्त्री आदि कर रहें।
: अयोध्या तीर्थ पर सात भव्य जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा सम्पन्न
Tue, Jul 23, 2024
संयम के पथ पर चलीं सात ब्रह्मचारिणी बहनें
अयोध्या। भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज अयोध्या में प्रातः काल श्रीजी के अभिषेक से प्रारंभ हुआ दिवस। सात ब्रह्मचारिणी बहनों ने संयम के पथ को अंगीकार किया, जिसमें सर्वप्रथम विशाल पाण्डाल में ब्रह्मचारिणी बहनों ने गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी को आर्यिका दीक्षा के लिए श्रीफल समर्पित किया। माताजी ने सभी के मस्तक पर केशलोंच प्रारंभ करने की विधि सम्पन्न की, जिसके अन्तर्गत अपने हाथों से अपने लम्बे-लम्बे केशों को उखाड़ना होता है। पाँच बहनों ने आर्यिका दीक्षा के व्रत अंगीकार किये एवं 2 महिलाओं ने क्षुल्लिका दीक्षा के व्रत ग्रहण किए। केशलोंच सम्पन्न होने के पश्चात् पूज्य गुरुमाँ ने सभी के मस्तक पर हाथ रखकर संस्कार आरोपित किए, व्रत ग्रहण करवाए एवं सभी ब्रह्मचारिणी बहनों को दीक्षा के पश्चात् नवीन नाम प्रदान किए एवं इन दीक्षार्थियों के माता-पिता बनाने का जैन आगम में विधान आया है, उस क्रम में शोभा पहाड़े के माता-पिता बनने का सौभाग्य सौ. पद्मा विकास पहाडे प्राप्त किया। दीक्षार्थियों को दीक्ष के पूर्व मंगल स्नान कराया गया। दीक्षा से पूर्व सभी ब्रह्मचारिणी बहनों ने मंच पर पंचामृत अभिषेक सम्पन्न किया एवं पूज्य माताजी से जैनेश्वरी दीक्षा के लिए अनुरोध किया कि मुझे संसार सागर से पार करने वाली जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करें व सभी परिवारजनों व समाज से क्षमायाचन की। विजय कुमार जैन मंत्री अयोध्या तीर्थ कमेटी ने बताया कि सर्वप्रथम दीक्षा के पश्चात् नवीन नाम प्रदान किये गये। शोभा पहाड़े को आर्यिका आर्षमती माताजी, ब्र. कु. इन्दु दीदी को आर्यिका हर्षमती माताजी, ब्र. कु. अलका दीदी को आर्यिका विनम्रमती माताजी, ब्र. कु. श्रेया दीदी को आर्यिका अनंतमती माताजी, ब्र. मधुबाला जी को आर्यिका विनीतमती माताजी, ब्र. राजबाला जी को क्षुल्लिका भव्यमती माताजी, ब्र. रेखा जी को क्षुल्लिका वैराग्यमती माताजी नाम प्रदान किये गये। सभी दीक्षार्थियों के मस्तक पर पूज्य गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी ने संस्कार प्रदान किए एवं आर्यिका दीक्षा के व्रत ग्रहण करवाए व दीक्षा के नियमों से उनको अवगत कराया। समस्त चर्या का विधान बताया एवं पिच्छी-कमण्डलु, वस्त्र,शास्त्र और माला नवीन दीक्षार्थियों को प्रदान किया गया, जिसे आये हुए भक्तगणों के द्वारा प्रदान किया गया। समस्त कार्यक्रम पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के निर्देशन में सम्पन्न किये गये। समस्त विधि-विधान प्रतिष्ठाचार्य श्री विजय कुमार जैन, पं. सतेन्द्र जैन, पं. अकलंक जैन के द्वारा सम्पन्न कराये गये। मंच संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन के द्वारा किया गया। सायंकाल में भगवन्तों की मंगल आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।सभी कार्यक्रम में मुख्यरूप से कैलाश चन्द्र जैन सर्राफ,अमरचंद जैन सर्राफ, ऋषभ जैन,अशोक चांदवड़,अशोक दोशी, कमल कासलीवाल, रोशन केलावत, अनिल जैन, सभाषचंद जैन, विजय जैन, बिजेन्ट जैन, संजय जैन,सीवान राजन जैन, पंकज जैन आदि मौजूद रहें।