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: रघुवंशी समाज द्वारा यह विशाल 2121 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ अयोध्याधाम में किया गया, जो काबिले तारीफ है इसके लिए संपूर्ण रघुवंशी समाज को साधुवाद: श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज

बमबम यादव

Mon, Feb 19, 2024

नवदिवसीय 2121 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ का हुआ समापन

महायज्ञ में अंतिम दिवस अखाड़ा परिषद पूर्व अध्यक्ष व हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत धर्मसम्राट ज्ञानदास महाराज बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे

श्रीराम महायज्ञ के संयोजक श्याम दास, लखन दास, संकटमोचन हनुमानकिला मंदिर के महंत परशुराम दास व तुलसीराम रघुवंशी द्वारा श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज समेत पधारे हुए अन्य-संत- महंतों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत- सम्मान किया गया

अयोध्या।  रामनगरी के परिक्रमा मार्ग स्थित बड़ी छावनी की बगिया में चल रहे नवदिवसीय 2121 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ का रविवार को विधि-विधान पूर्वक समापन हुआ। महायज्ञ में अंतिम दिवस अखाड़ा परिषद पूर्व अध्यक्ष व हनुमानगढ़ी के शीर्ष महंत धर्मसम्राट ज्ञानदास महाराज बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि यह पावन पुनीत अयोध्याधाम है। जो मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन जन्मस्थली है। जहां भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर सबका कल्याण किया। 5 वर्षों के बाद लंबे इंतजार बाद हमारे आराध्य श्रीरामलला सरकार अपने नूतन, भव्य, दिव्य मंदिर में विराजमान हुए। जो हम सबके लिए खुशी की बात है। इस खुशी का इजहार हम सब उत्सव, महोत्सव, महायज्ञ, श्रीरामकथा, भागवत कथा, लंगर, अन्नक्षेत्र, भंडारा आदि धार्मिक कार्यक्रम मनाकर कर रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में देश के रघुवंशी समाज द्वारा यह विशाल 2121 कुंडीय श्रीराम महायज्ञ अयोध्याधाम में किया गया। जो काबिले तारीफ है इसके लिए संपूर्ण रघुवंशी समाज को साधुवाद है। उन्होंने कहा कि वैदिक परंपरा में किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान में महायज्ञ को एक अनिवार्य अंग माना गया है। इससे देवताओं को आहुति देकर पुष्ट किया जाता है, साथ ही पर्यावरण भी शुद्ध होता है। जहां यज्ञ किया जाता हैं, वहां पर साक्षात देवताओं का वास होता है। यज्ञ में देवताओं का आह्वान किया जाता है। उन्हें अग्नि के माध्यम से मंत्र बोलते हुए आहुतियां दी जाती हैं। जो सूक्ष्म रूप में उन तक पहुंचती हैं तथा उन्हें बल प्रदान करती हैं। जिससे देवता प्रसन्न होते हैं। जहां तक अग्नि का धुआं जाता है, वहां तक वातावरण में सात्विकता और दैवीय ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है। यज्ञ से निकलने वाला धुआं वर्षा में भी सहायक होता है। श्रीराम महायज्ञ के संयोजक श्याम दास, लखन दास, संकटमोचन हनुमानकिला मंदिर के महंत परशुराम दास व तुलसीराम रघुवंशी द्वारा श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज समेत पधारे हुए अन्य-संत- महंतों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत- सम्मान किया गया। इस दौरान संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास, महंत सत्यदेव दास, पहलवान राजेश दास, पहलवान इन्द्रदेव दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, मुकेश दास, रामानंद दास, शिवम श्रीवास्तव, कल्लू दास भी मौजूद रहे। महायज्ञ के समापन पर विराट भंडारा आयोजित रहा। भंडारे में रामनगरी के सभी संत- महंतों ने सम्मिलित होकर प्रसाद ग्रहण किया।

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