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: श्रीरंगराघव भगवान का नयनोन्मीलन, शयनाधिवास एवं प्राणप्रतिष्ठा समारोह पूर्वक हुआ

बमबम यादव

Sun, Jul 7, 2024

व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा कर रहें जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज

अयोध्या। रामनगरी के नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम में कांची प्रतिवादि भयंकर मठ के स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज की अध्यक्षता में चल रहे श्रीरंगराघव भगवान का प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव अपने उल्लास पर पहुंचा चुका है। महोत्सव के क्रम में शनिवार को भगवान का नयनोन्मीलन, शयनाधिवास एवं प्राणप्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ। नित्य की भांति शालिग्राम भगवान का सवा लाख, 111 ब्रह्माणों द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पारायण किया गया। श्रीमद्भागवत कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए व्यासपीठ पर विराजमान राष्ट्रीय कथाव्यास जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के सभी संस्कार गर्गाचार्य यथा समय पूर्ण कराते हैं। बचपन से ही प्रभु कृष्ण अनेको राक्षसों का संहार करते हैं। वह माखन चोरी लीला के माध्यम से जन्म जन्मांतरों के पाप को चुराकर पुण्य उदित करने हेतु गोपियों के घर जाकर माखन चोरी लीला करते हैं। प्रभु गोचारण करने वन में गए। उन्होंने गौ माता के महत्व को बताया कि गाय संपूर्ण विश्व की माता है। गौ सेवा से ही गोविंद प्रसन्न होते हैं। यमुना के विषाक्त जल को पवित्र करने के लिए कालिया नाग को प्रभु शरण में लेकर दूर भेंज देते हैं। ब्रज में प्रभु श्रीकृष्ण के जन्म लेने से नित्य उत्सव मनाया जाता है। श्रीकृष्ण का दर्शन पाकर सभी बृजवासी अपने को धन्य समझते है। गिरिराज धरण की लीला के द्वारा प्रभु प्रकृति के पूजन का महत्व बताते हैं। प्रभु श्रीगोवर्धन पर्वत की पूजा सभी ब्रज वासियों से कराते हैं। इंद्र ने सामंत मेघों के द्वारा ब्रज में घोर वृष्टि कराया। सभी ब्रजवासियों के देखते-देखते भगवान कनिष्ठा अंगुली में सात कोस लंबे चौड़े गिरिराज पर्वत को उठा लेते हैं। घबराकर इंद्र प्रभु चरणों में शरणागति करते हैं। वह शरण में आए इंद्र को अपना लेते हैं। श्रीसंतगोपाल मंडपम के पीठाधिपति स्वामी कूरेशाचार्य महाराज ने व्यासपीठ की दिव्य आरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरण किया गया।

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