: हनुमान बाग में इन दिनों बह रही श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा की रसधार
बमबम यादव
Sat, Jan 25, 2025
हनुमान बाग में इन दिनों बह रही श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा की रसधार
व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन श्रीत्रिदंडी अहोबिल रामानुज जीयर स्वामीजी करा रहें
महोत्सव में 120 वैदिक आचार्य कर रहे पारायण पाठ तो हो रहा राष्ट्र उन्नति यज्ञ, अध्यक्षता कर रहें श्रीमहंत जगदीश दास अयोध्या। श्री राम जी और लक्ष्मण जी ने यज्ञ की रक्षा की। विश्वामित्र जी ने राम जी से कहा कि मिथिला नरेश का निमंत्रण आया है धनुष समारोह में जाना है। राम जी को धनुष का महत्व बताते हुए वशिष्ठ ऋषि जी ने बताया कि यह बहुत ही विशाल धनुष है और इसको उठाने के लिए काफी लोग लगते है। यह शिवजी का धनुष है। श्री राम जी धनुष की इतनी महिमा सुनकर श्री राम जी को उसे देखने की जिज्ञासा उत्पन्न हो गई। उक्त उद्गार श्रीत्रिदंडी अहोबिल रामानुज जीयर स्वामीजी ने कही। वे प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में इन दिनों श्रीमद् वाल्मीकि रामायण कथा कह रहे है। कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए जीयर स्वामीजी ने बताया कि सतयुग में गौतम ऋषि जी अपनी पत्नी अहिल्या के साथ वन मैं एक आश्रम मैं रहते थे। ब्रम्हा जी ने सृष्टि को बनाने के लिए जो उपकरण पैदा किए थे और बाद मैं जो उपकरण बच गए थे उससे ब्रह्मा जी ने एक सुंदर स्त्री को पैदा किया जिसका नाम था अहिल्या। ब्रह्माजी चाहते थे की इस कन्या का विवाह उसके साथ किया जाए जिस पे काम का कोई प्रभाव न हो , फिर गौतम ऋषी जी से अहिल्या के साथ शादी ब्रह्मा जी ने ही करवा दी। एक बार स्वर्ग का राजा इंद्र गौतम ऋषि जी की अनुपस्थिति में गौतम ऋषि जी के आश्रम में आ गए और उनकी पत्नी के साथ संग किया तो यह बात जानकर गौतम ऋषि ने अहिल्या को श्राप दे दिया अहिल्या गौतम ऋषि से क्षमा मांगने लगी और उनके श्राप से बचने का उपाय पूछने लगी तो अपनी पत्नी पर दया करके गौतम ऋषि जी ने बताया कि जब त्रेतायुग में भगवान श्री राम जी जी का स्पर्श पाकर तुम इस श्राप से मुक्त हो जाओगे।फिर अहिल्या बोली अभी तो सतयुग चल रहा है इसका बाद द्वापर आएगा फिर त्रेता युग आएगा आप मुझे जल्दी ही इस श्राप से बचने का कोई उपाय बताएं फिर गौतम ऋषि जी ने दया दिखाते हुऐ उन्होंने अपने तप से द्वापरयुग के स्थान पर त्रेता युग को कर दिया। 5 हजार सैनिक उठाते थे शिव धनुष को और फिर उसकी पूजा की जाती थी। दान लेने वाला दान देने वाले के अधीन होता है। बहुत ही भव्य श्री राम सीता जी का विवाह का महोत्सव मनाया गया। महोत्सव की अध्यक्षता कर रहे महंत जगदीश दास का अभिनन्दन कथा के संयोजक ने किया। कथा से पूर्व मंदिर में 120 वैदिक आचार्य वाल्मीकि रामायण का पारायण पाठ सामूहिक रुप से किया।इसके बाद विश्व कल्याण व राष्ट्र उत्थान हेतु यज्ञ कुंड में आहुतियां डाली गई। इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दक्षिण भारत से सौकड़ों रामभक्त आये है। सौमित्र स्वामीजी व यज्ञाचार्य गिरीधराचार्य स्वामीजी कार्यक्रम की देखरेख कर रहें। व्यवस्था में हरि स्वामी के साथ हनुमान बाग मंदिर के सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री व नितेश शास्त्री लगे हुए है।Tags :
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