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: तीनों तापों को हरने वाली है श्रीराम कथा: रामदिनेशाचार्य

बमबम यादव

Sun, Jan 21, 2024

जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य जी ने कहा, जिस पर प्रभु की कृपा होती है उन्हें ही यह कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है

अयोध्या। भगवान रामलला के भव्य ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर रामनगरी के हरिधाम गोपाल पीठ में चल रहे श्रीराम कथा व शिव प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के छटवें दिन कथाव्यास जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने श्रीराम का राज्याभिषेक वनवास और राम केवट संवाद की कथा सुनाई। कहा कि श्रीराम कथा दैहिक दैविक और भौतिक तीनों तापों को हरने वाली है। जिस पर प्रभु की कृपा होती है उन्हें ही यह कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम विवाह के समय पूरी अयोध्या आनंद में डूबी हुई। कुछ दिनों बाद राजा दशरथ ने श्रीराम का राज्याभिषेक करने का निर्णय लिया। उधर देवता चितित है कि यदि श्रीराम राजा बन गए तो देवताओं की रक्षा कौन करेगा। राक्षसों का संहार कौन करेगा। देवता माता सरस्वती के पास जाते हैं। माता सरस्वती मंथरा की मति फेर देती हैं। मंथरा के बहकाने पर कैकेयी श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लेती हैं । श्री राम कथा की यही विशेषता है कि भरत राज्य पाकर भी उसे स्वीकार नहीं करते हैं। उन्होंने 14 वर्ष तक श्रीराम के खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राज्य चलाया। राम सीता और लक्ष्मण के वनगमन के समय गंगा पार जाने के लिए श्रीराम केवट को बुलाते हैं। केवट शर्त लगाता है कि जब तक आपके चरण नहीं धो लूंगा आपको पार नहीं उतारूंगा। भगवान भक्त केवट की बात मान लेते हैं।कथा में दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के बिंदुगाद्यायाचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, श्रीरामबल्भाकुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास,
मंगल भवन सुंदर धाम के महंत कृपालु रामभूषण दास, कामधेनु आश्रम के महंत आशुतोष दास सहित बड़ी संख्या में रामनगरी के संत धर्माचार्यो ने शिरकत कर अपने अपने विचारों से श्रीरामकथा में भगवान राम के चरित्र का गुणगान किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन हरिधाम गोपाल पीठ के शिष्य परिकरों ने किया। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्था गौरव दास कर रहें है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान नरेश कुमार गर्ग व उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता गर्ग ने किया।

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