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: श्रीमद्भागवत भव तारक-उद्धारक ग्रन्थ: जगद्गुरू

बमबम यादव

Fri, Mar 3, 2023

रामानुजाचार्य जी ने कहा, यह जीवन ज्ञानार्जन, धनार्जन और पुण्यार्जन के लिए है।

अयोध्या। श्रीमद्भागवत भव तारक-उद्धारक ग्रन्थ है। किसी के साथ छल न करें, और आत्म छल भी न करें। अतः अपने आध्यात्मिक लक्ष्यों के प्रति जागरूक और सचेत रहें। उक्त बातें जगद्गुरू रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने सरायराशी पूराबाजार में आयोजित भागवत कथा के तृतीय दिवस में कही। उन्होंने कहा कि जो विचारशील नही है, जिसके पास सद्संकल्प नही है वह बड़ा दु:खी है, इसलिए सत्संग की महत्ता हमारी वैचारिक पवित्रता के लिए भी है। कथा श्रवण के बाद पवित्र अंतःकरण की निर्मिती होती है। उसके बाद आपमें पूर्णता आती है। जगद्गुरू जी ने कहा कि आप जो भी करेगे वो बहुत अच्छा और कलात्मक ढंग से करेंगे। आप मंत्र और मूल्य बन जायेंगे। समाज के लिए बड़े उदाहरण बन जायेंगे। भागवत आपको बल देगी कि आप बड़े और महनीय बन जायें। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि यह जीवन ज्ञानार्जन, धनार्जन और पुण्यार्जन के लिए है। धनार्जन के पूर्व ज्ञानार्जन आवश्यक है, क्योंकि ज्ञान से जीवन जीने की कला सीखी जा सकती है। यदि हमें भोगना या उपयोग करना ही नही आता तो अर्थ अथवा अन्य भौतिकीय साधन बड़ी समस्या बन जायेंगे। महाराज मनु की संतानों की कथा सुनाते हुए स्वामी जी ने कहा कि हमें नीति और नियमों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। आपके जप और साधन कभी न छूटे। उन्होंने कहा कि उत्तानपाद का आशय मन की दुर्बलता से है। जीवन में जब नीतियों का स्थान रुचियाँ ले लेती हैं तो व्यक्ति उत्तानपाद हो जाता है। सुनीति और सुरुचि का उद्धरण देते परिवार की उपादेयता भी प्रतिपादित की। स्वामीजी ने कहा कि भारत का अर्थ होता है -भा माने ज्ञान और प्रकाश ।जो ज्ञान रत है, प्रकाश रत है वही 'भारत है।तात्पर्य यह कि जहां के लोग ज्ञान और प्रकाश ,सत्य और धर्म में लगे रहते है उसी देश को भारत कहते हैं।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन कथा यजमान रामजीत सिंह आयोजक चंद्रभूषण सिंह,ज़िला पंचायत अध्यक्ष आलोक कुमार रोहित,पूर्व ज़िला पंचायत सदस्य अंकुर सिंह ने किया।

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