: भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है श्री राम जन्मभूमि मंदिर: मृदुल कांत शास्त्री
बमबम यादव
Fri, Jun 28, 2024
बड़ा भक्त माल मंदिर में श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर मनाया गया श्री रामजन्मोत्सव, चारों तरह छाया उल्लास
गौ राष्ट्र रक्षा एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि व काशी विश्वनाथ मुक्ति हेतु नव दिवसीय श्री हनुमान चालीसा, श्री सुंदर कांड पाठ व अखंड श्री हरिनाम संकीर्तन के साथ हो रही श्रीराम कथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री बड़ा भक्त माल मंदिर में गो सेवा मिशन के तत्वावधान में गौ राष्ट्र रक्षा एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि व काशी विश्वनाथ मुक्ति हेतु नव दिवसीय श्री हनुमान चालीसा, श्री सुंदर कांड पाठ व अखंड श्री हरिनाम संकीर्तन के साथ विशाल श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है।व्यासपीठ से कथा की रसधार आचार्य मृदुल कांत शास्त्री श्रीधाम वृंदावन कर रहें है। कथा के तृतीय दिवस शास्त्री जी ने आज राम जन्म महोत्सव मनाया गया। आचार्य मृदुल कांत जी ने कहा कि लोक कल्याण के लिए होता है भगवान श्रीराम का जन्म। जहां सभी वेद वेदांत के परे परमात्मा कौशल्या पुत्र बनकर आते हैं निश्चित रूप से यह सनातन परंपरा के गौरव है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन भूमि है।कथाव्यास ने कहा कि जब धारा पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्त अपने सारे संबंधों की रस्सी बनाकर भगवान के चरणाविंद से बांध देता है बांध कर खींच लेता है तो भगवान अपने आप को रोक नहीं पाते और अवतार ग्रहण कर लेते हैं। जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा। वह ब्रह्म जो बड़े-बड़े ज्ञानी महानी ध्यानी के ज्ञान गम में से परे होता है लेकिन जब कोई भक्ति मयी कौशल्या और बैराग्य रूपी दशरथ उस परमात्मा को प्राप्त करना चाहते हैं तब वह अवतार धारण करके पुत्र बनकर आ जाता है। कथा की अध्यक्षता बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास व पावन सानिध्य स्वामी श्रीकृष्णानन्द जी महाराज भूरी वाले अध्यक्ष गोसेवा मिशन कर रहें है। कथा के संयोजक भगवती प्रसाद जी केड़िया कोलकाता के है। गो सेवा मिशन पूरे भारत में हजारों गौशाला संचालित करता है। इस मौके पर बड़ा भक्त माल मंदिर के शिष्य परिकर सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
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