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संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

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: राधा मोहन कुंज में श्रीमद् भागवत कथा का छाया उल्लास

बमबम यादव

Thu, Dec 1, 2022

श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में राधा मोहन कुंज मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन आज

अयोध्या। रामनगरी के जानकी घाट स्थित नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन शुक्रवार को समारोह पूर्वक होगा। कार्यक्रम के सप्तम दिवस पर व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज कर रहे है। यह महोत्सव श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित किया गया है। व्यासपीठ से राधामोहन शरण देवाचार्य जी ने कहा कि गिर्राज भगवान का पूजन करके इंद्र का मान मर्दन किया भगवान ने। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तो का सब कुछ सहन कर सकते है पर अपने भक्तो का अभिमान सहन नही कर सकते। देवों के राजा को अभिमान हो गया की हम सबसे बड़े देव है सब मेरी ही पूजा करे ब्रजबाशी कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को इंद्र का पूजन करते है। ब्रजबाशियों से भगवान ने कहा आज से इंद्रयज्ञ नही हम लोग अपने गोवर्धन का पूजन करे। मानो प्रभु चाहते की प्रकृति का पूजन होना चाहिए इस लिए इसलिए सभी ने गोवर्धन का पूजन किया। आगे कथा में जगद्गुरू जी ने रास लीला का दिव्य वर्णन जिसमे महारास में एक लाख गोपियों के बीच में अकेले गोबिंद ने रास किया। जिसको काम विजय लीला भी कहते है और अपने मामा कंस का वध  कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन किया था। यही वजह है कि इस तिथि को कंस वध के तौर पर भी जाना जाता है। कृष्ण जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मामा कंस का वध भी है। महंत राधामोहन शरण जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन लीलाओं से भरा हुआ है। उनके जन्म से लेकर अंतिम वक्त तक सभी कुछ उनकी लीला ही नजर आती है। कृष्ण जी का जन्म भी विकट परिस्थितियों में हुआ था जिसकी वजह दुष्ट मामा कंस ही था। एक भविष्यवाणी की वजह से राजा कंस अपने ही भांजे श्रीकृष्ण को मारना चाहता था, इसके लिए उसने कई प्रयास भी किए लेकिन आखिर में उसका अंत भगवान श्रीकृष्ण के हाथों से ही हुआ। गोबिंद का माता रुक्मणि जी के साथ गोविंद का विवाह संपन्न हुआ।आये हुए अतिथियों का स्वागत राधामोहन शरण देवाचार्य जी के शिष्य महंत सनत कुमार शरण ने किया। कथा में तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण, डाड़िया मंदिर के महंत महामंडलेश्वर गिरीश दास, राम हर्षण कुंज से जुड़े संत राघव दास, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक व भक्त मौजूद रहें।

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