: श्रीलालसाहेब दरबार के पूर्वाचार्यों को संतों ने किया नमन
बमबम यादव
Sun, Dec 10, 2023
महंत जानकी जीवन शरण व महंत रामकृपाल शरण की पुण्यतिथि पर शिद्दत से किया गया याद
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या की प्रतिष्ठित पीठ मंदिर श्रीलालसाहेब दरबार रामकोट के पूर्वाचार्य महंत जानकी जीवन शरण, महंत रामकृपाल शरण व महंत जानकी शरण महाराज को पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया गया। इस अवसर पर शनिवार को मंदिर परिसर में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। सभा में अयोध्यानगरी के विशिष्ट संत-महंतों ने पूर्वाचार्यों के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संतों ने उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस मौके पर श्रीलाल साहेब दरबार के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामनरेश शरण महाराज ने बताया कि मठ में पूर्वाचायों की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई है। अयोध्याधाम के संत-महंतों ने उन्हें श्रद्धा से याद किया। पूर्वाचार्य अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। वह गौ और संत सेवी रहे। जिन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। उन्हीं सबके पुण्य-प्रताप का फल है कि आज मठ की गणना रामनगरी के प्रमुखतम पीठों में हो रही है। मंदिर दिन-प्रतिदिन उत्तरोत्तर समृद्धि की ओर अग्रसर है। जहां पर सभी उत्सव, समैया और त्यौहार परंपरागत रूप से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जा रहा है। यहां गौ, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। पुण्यतिथि पर काफी संख्या में संत- महंत, भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण पाया। अंत में भिवानी के महंत रामाश्रय शरण महाराज, तपोवन मंदिर रांची महंत ओमप्रकाश शरण एवं लालसाहेब दरबार के महंत रामनरेश शरण ने आए हुए संत-महंतों का स्वागत-सत्कार किया। आश्रम के पूर्वाचार्यों को श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में वेद मंदिर के महंत रामनरेश दास, विश्वविराट मंदिर के श्रीमहंत सिद्धबाबा नरसिंह दास, तपोवन मंदिर रांची के महंत ओमप्रकाश शरण, छत्तीसगढ़ आश्रम महंत रामेश्वर दास, श्रीरामाश्रम के महंत जयराम दास, सरयूकुंज महंत राममिलन शरण, श्रीरामकृष्ण मंदिर के महंत गणेशानंद दास, व्यास श्याम दास, महंत रामनारायण दास, रमैया बाबा स्थान के महंत रविशंकर शरण, शेषावतार मंदिर के महंत अशोक दास, गहोई मंदिर महंत रामलखन शरण, महंत भरत दास, महंत अमर दास, महंत राममोहन शरण, महंत अवधकिशोर शरण, रामायणी गोवर्धन दास, गंगादास, कविराज दास, संतदास, सूरज दास, भानुप्रताप, नंदकुमार मिश्र आदि संत- महंत एवं भक्तगण रहे।
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