: श्रावण कुंज में हुआ भगवान विष्णु के सहस्त्रार्चन संग रुद्राभिषेक
बमबम यादव
Fri, Nov 15, 2024
श्रावण कुंज में हुआ भगवान विष्णु के सहस्त्रार्चन संग रुद्राभिषेक
श्रावण कुंज मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर हुआ भंडारा
हनुमानगढ़ी से जुड़े समाजसेवी महंत मामा दास जी संतों का किया अभिनन्दन
अयोध्या। हिंदी महीने का सबसे पवित्र कार्तिक मास अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। इस मास के अंतिम पर्व देव दीपावली से ठीक पहले गुरुवार को बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर मंदिरों व घरों में भगवान विष्णु स्वरूप भगवान शालिग्राम का तुलसी से सहखार्चन किया गया। नगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्रावण कुंज मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कार्तिक कल्पवास करने वालों ने विधिवत पूजन के साथ अपना अनुष्ठान पूरा किया,इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। इसके साथ भगवान शिव का भी अभिषेक कर पूजन किया गया। ऐसी किंवदंती है कि भगवान शंकर द्वारा त्रिपुरासुर का वध करने के उपरांत भगवान विष्णु ने उनका सहस्त्र कमल दल से उनका पूजन किया था। इस दौरान एक पुष्प की संख्या कम होने पर उन्होंने अपने कमल रुपी नेत्र भगवान शिव को चढ़ा दिया। उसी समय भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने भगवान विष्णु को अपने हृदय से लगा लिया। इस मिलन को बैकुंठ चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
तीर्थ नगरी अयोध्या में कार्तिक कल्पवास की परम्परा के निर्वहन के लिए यहां लाखों श्रद्धालुओं ने भी मां सरयू के पुण्य सलिल में डुबकी लगाई और फिर नागेश्वर नाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके साथ सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन पूजन करते है।महंत रामेश्वरी शरण ने बताया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है सभी को सेवाभावी होना चाहिए उन्होंने संतों महंतों का आभार व्यक्त किया और आए हुए अतिथियों स्वागत सत्कार महंत मामा दास जी महराज ने किया।
हनुमानगढ़ी से जुड़े श्रावण कुंज के महंत मामा दास बताते हैं कि वाल्मीकि रामायण में कार्तिक मास का वृहद वर्णन है। कार्तिक महीना भगवान कृष्ण को बहुत प्रिय है इसीलिए सब जनमानस लोग स्नान कर दीपदान करते हैं। महंत मामा दास जी ने कहा की मंदिर का संचालन महंत रामेश्वरी शरण बड़े ही सेवा भाव से कर रही है और अभी तक मंदिर में जितने उत्सव सवैया मनाए जाते थे वह सब समय-समय पर मनाई जा रहे हैं। पूर्व के आचार्यों ने मंदिर की जो व्यवस्था बनाई है वही व्यवस्था सुचार रूप से चल रही है और आगे भी चलती रहेगी इसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा मंदिर में संत सेवा गौ सेवा समान रूप से चलती रहेगी।
हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत सूर्य भान दास कहते है कि भगवान से प्रार्थना है कि ऐसी कृपा बनी रहे और जीवन के अंतिम क्षण तक प्रभु सेवा का अवसर मिलता रहे। उन्होंने कहा कि पांच सौ साल की प्रतीक्षा के बाद राम मंदिर निर्माण को देखना भी बड़ा सौभाग्य है। हमारे पुरखों ने अनवरत संघर्ष की ज्वाला प्रज्वलित रखी लेकिन वह राम मंदिर की आस लिए दुनिया से सिधार गये।इस अवसर पर बावन मंदिर के महंत वैदेही बल्लभ शरण, हनुमान बाग मंदिर के महंत जगदीश दास, निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदराम दास, महंत कृष्ण कुमार दास, उपेंद्र दास, सूर्यभान दास,लवकुश दास, अभिषेक दास, पहलवान मनीराम दास, नितिन दास,सुनील दास, रोहित शास्त्री सहित सैकड़ों लोगों मौजूद रहे।
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