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: श्रीराम की नगरी हुई रामेश्वर

बमबम यादव

Thu, Feb 27, 2025
श्रीराम की नगरी हुई रामेश्वर आचार्य पीठ लक्ष्मणकिला के कैलाश बिहारी सर्वेश्वर महादेव और पूर्वाचार्यों के सम्मुख नर्मदेश्वर महादेव का हुआ अभिषेक-पूजन महाशिवरात्रि शिव भक्तों व सनातन धर्मियों के लिये अति महत्वपूर्ण: सूर्य प्रकाश शरण अयोध्या। श्रीहरि की साकेत नगरी अयोध्या बुधवार को भगवान राम के भी ईश्वर यानी 'रामेश्वर' को समर्पित हो गई। भोर के तीन बजे से ही हर-हर महादेव के महाघोष और भोले शंकर के जयकारों के बीच शिव भक्तों का सैलाब पहले सरयू नदी के घाट पर और इसके बाद शिव मंदिरों उमड़ पड़ा। प्रातः से ही सरयू में डुबकी लगाकर भक्त अपने आराध्य भोलेनाथ के दर्शन को आतुर दिखे। शिवरात्रि पर अयोध्या में जुटने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार ने सुरक्षा चक्र को काफी मजबूत कर दिया था। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आचार्य पीठ लक्ष्मणकिला में शास्त्रोक्त विधि विधान से अति प्राचीन कैलाश बिहारी सर्वेश्वर महादेव एवं पूर्वाचार्यों के सम्मुख नर्मदेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन किया। लक्ष्मणकिला में यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। परंपरा का निर्वाहन करते हुए लक्ष्मणकिला धीश श्री महंत मैथिलीरमण शरण महाराज व उनके कृपापात्र शिष्य अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण द्वारा महाशिवरात्रि पर अति प्राचीन कैलाश बिहारी सर्वेश्वर महादेव और पूर्वाचार्यों के सम्मुख नर्मदेश्वर महादेव का अभिषेक-पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्तों तथा सनातन धर्मियों के लिये महत्वपूर्ण माना गया। है। इस दिन विश्वभर में फैले शिवानुरागी शिव भक्त अत्यंत श्रद्धा-विश्वास के साथ जलाभिषेक, दुग्धभिषेक, विल्वपत्राभिषेक तथा अन्यान्य विधियों से शिव पूजन और व्रत रखकर मनाते हैं। महाशिवरात्रि पर लक्ष्मणकिला समेत देश भर के द्वादश ज्योर्तिलिंग के साथ-साथ सभी शिव मंदिरों में विशेष पूजन अनुष्ठान का कार्य संपन्न हुआ। इस दिन भगवान शिव को गंगा जल चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर ऊं नमः शिवाय मंत्र से पूजा करनी चाहिए। शिव की उपासना और व्रत रखने से शुभफल मिलते हैं। शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है। बीमारी से परेशान होने पर और प्राणों की रक्षा के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। लक्ष्मी अपने श्री स्वरूप में अखंड रूप से केवल भगवान शिव की कृपा से ही जीवन में प्रकट हो सकती हैं। शादी में आ रही बाधा दूर करने के लिए शिव-शक्ति की पूजा करें।  

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