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: राम व्यक्ति नहीं, संपूर्ण जीवन चरित्रः स्वामी<br />चिदम्बरानन्द

बमबम यादव

Mon, Jan 22, 2024

कहा, हमारे पूर्वजों ने मंदिरों को टूटते देखा हैं, अब हमारी पीढ़ी इसे बनते देख रही

अयोध्या। रामनगरी में आज बड़े श्रद्धा भाव के भगवान राम लला प्रतिष्ठित हो गये। चारों तरफ अयोध्या वासी खुशियाँ मना रहे है। मंदिर मंदिर मंगल गीत गाये जा रहें है। चहुंओर मंगल ध्वनियां बज रही है। राम महल वैदिक भवन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित श्रीराम की अमृत वर्षा हो रही है। रामकथा में व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन ट्रस्ट, मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज करा रहें है। कथा के आज छठवें दिवस व्यासपीठ से कथा स्वामी चिदम्बरानन्दजी महाराज ने बोलना शुरू किया तो लोग भावुक हुए, कभी गहरी सोच में पड़ गए। श्रीराम का चरित्र सुनकर कभी तालियां बजने लगतीं तो कभी जय श्रीराम का उ‌द्घोष होने लगता। उन्होंने कहा कि राम व्यक्ति नहीं, संपूर्ण जीवन चरित्र हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने सिखाया कि व्यक्ति नहीं, लोकहित ही सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने मंदिरों को टूटते देखा हैं, अब हमारी पीढ़ी इसे बनते देख रही है। यह सुन कुछ बुजुर्गों व महिलाओं की आंखें छलछला आईं तो युवा जय श्रीराम का उद्‌घोष करने लगे।
उन्होंने कहा कि 2024 श्रीराम वर्ष के रूप में जाना जाएगा। सौ करोड़ रामायण की रचनाएं हुईं। हर कवि राम को नायक बनाना चाहता रहा है। महाभारत में भी राम चरित्र है। राम का प्रमुख गुण शील है, इसीलिए राम - जैसा भाई, राम जैसा बेटा, राम जैसा मित्र तो सभी चाहते हैं। रावण ने कहा था कि अगर शत्रु भी हो तो राम जैसा। राम के मार्ग को अपनाकर हम जीवन का मार्ग पार कर सकते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज ने लोगों से पूछा कि राम के राजतिलक पर सभी खुश थे सिर्फ दो लोग नाखुश थे, वह कौन थे। लोगों के उत्तर सुनने के बाद उन्होंने कहा कि खुद राम और दूसरी मंथरा। राम सोच रहे थे कि यह वंश को कैसी परपंरा है कि बड़े भाई को राज्य और छोटे को सेवक बनाया जाता है। ज्येष्ठ पुत्र को राजा बनाना अयोध्या की राज परपंरा थी। इसे राम ने तोड़कर लोकतंत्र की स्थापना की। राजमहल छोड़कर राम झोपड़ी तक पहुंचे। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक न पहुंचा जाए तब तक राजा बनने के मायने नहीं।

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