Monday 7th of September 2026

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: जिसके हृदय में मंगलमय भगवान की स्मृति होती है, उसके जीवन में हर दिन उत्सव ही है: महंत जगदीश दास

बमबम यादव

Tue, Jan 23, 2024

भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होने के साथ ही पूरा हनुमान बाग मंदिर दीपों से जगमग हो गया, संतों ने पटाके चलाकर खुशियां मनाई

अयोध्या। राम ही भारत का धर्म हैं। धर्म की मूर्ति भी राम हैं। महर्षि वाल्मीकि कहते हैं- रामोविग्रहवान धर्मः। राम में ही धर्म है, राम में ही रस है। राम को बार-बार जप लिया, तो आप धर्म से परे नहीं जाएंगे। आप में वैराग्य रहेगा, मर्यादाएं रहेंगी, त्याग रहेगा। आप किसी का अहित नहीं करेंगे। राम धर्म ही हैं। जिसके हृदय में मंगलमय भगवान की स्मृति होती है, उसके जीवन में हर दिन उत्सव ही होता है। बाहर और भीतर की संपदा उसके साथ होती है। उक्त बातें हनुमान बाग पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज की है। भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होने के साथ ही पूरा हनुमान बाग मंदिर दीपों से जगमग हो गया। प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर हनुमान बाग द्धारा विशाल भंडारा का चलाया जा रहा है। भंडारे में रामभक्तों को प्रसाद ग्रहण कराते हुए महंत जगदीश महाराज ने कहा कि जिसने गुरु और भगवान के वचनों को अपने हृदय में धारण किया है, वह चाहे कैसी भी स्थिति में हो, आनंद में रहता है। श्रीराम जैसा दयालु कोई नहीं। उन्होंने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उन्होंने सभी को आगे बढ़कर नेतृत्व करने का अधिकार दिया। सुग्रीव को राज्य दिलाना उनके दयालु स्वभाव का ही प्रतीक है। श्रीराम ने हर जाति, हर वर्ग के व्यक्तियों के साथ मित्रता की, हर संबंध को हृदय से निभाया। प्रभु श्रीराम ने ईश्वर होकर भी हमेशा संन्यासी की तरह जीवन जिया। प्रेमत्व का जीवंत उदाहरण हैं प्रभु श्रीराम। उन्होंने अपने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग और समर्पण का भाव रखा। श्रीराम एक कुशल प्रबंधक थे। वे सभी को साथ लेकर चलने वाले थे। श्रीराम की श्रेष्ठ नेतृत्व क्षमता के कारण ही लंका जाने के लिए पत्थरों का सेतु बन पाया।
हनुमान बाग में चल रहा दिव्य भंडारा पूरे एक माह चलेगा जो नित्य प्रति दिन अलग अलग भोजन द्धारा रामभक्तों की सेवा करेंगे। व्यवस्था की देखरेख पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री आदि लोग लगे है।

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