: संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे महंत मिथिलाशरण व महंत किशोरीशरण: महंत करुणानिधान शरण
बमबम यादव
Thu, Apr 13, 2023
सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम व द्धितीय आचार्य को संत धर्माचार्यों ने किया नमन

पूर्वाचार्यों की परम्परा को प्राणपण से आगे बढ़ाकर गौरवान्वित है सियारामकिला
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो भगवद भजन में ही अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिये। उन संतों में एक थे परम पूज्य महंत मिथिलाशरण महाराज व पूज्य महंत किशोरीशरण महाराज। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित प्रतिष्ठित पीठ सियाराम किला झुनकी घाट के प्रथम आचार्य महंत मिथिलाशरण जी महाराज की 33वीं व द्धितीय आचार्य महंत किशोरीशरण जी महाराज की 24वीं पुण्यतिथि आज बड़े ही श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इन दिग्गज आचार्यों से मात्र सियाराम किला ही नही सम्पूर्ण रामनगरी आलोकित है।
रामनगरी में साधना एवं सिद्धि के पर्याय स्वामी जानकीशरण जी महाराज झुनकी बाबा के शिष्य मिथिलाशरण जी को गुरु परम्परा के प्रति समर्पित पहुंचे हुए साधक यशश्वी महंत के रुप में याद किया जाता है। सियाराम किला के रुप में एक धार्मिक संस्था को भव्यता देने वाले पूज्य मिथिलाशरण जी को जब लगा कि उनका शरीर थक रहा है, तो उन्होंने महंती छोड़ने में एक पल की भी देरी नही की और अंतिम श्वांस लेने के 6 वर्ष पूर्व ही उन्होंने महंती अपने शिष्य किशोरीशरण जी को प्रदान की। यह निर्णय सियाराम किला की गौरवपूर्ण परम्परा में चार चांद लगाने वाला रहा। गुरु भक्त के रुप में पूज्य किशोरीशरण जी आज भी स्मरणीय है, तो स्थान की मर्यादा के अनुरुप साधु सेवी के रुप में उनका कोई सानी नहीं है।
इन दोनो आचार्य के पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर में रामनगरी के विशिष्ट संतो ने आचार्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किये। यह सारा कार्यक्रम मंदिर के वर्तमान महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के पावन सानिध्य व मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज के देखरेख में सम्पादित हुआ। कार्यक्रम में आज प्रातःकाल पूज्य महाराज श्री की चरण पादुका पूजन व भव्य अभिषेक किया गया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ।आये हुए अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से किया गया।
महंत किशोरीशरण जी महाराज के शिष्य एवं उत्ताराधिकारी वर्तमान महंत करुणानिधान शरण जी महाराज के अनुसार पूर्वाचार्यों ने सियाराम किला को परिपूर्ण धार्मिक केंद्र के तौर पर स्थापित करने में कोई कसर नही छोडी पर उनका प्रताप था वे मठ मंदिर के बजाय प्रभु भक्ति एवं चरित्र निर्माण के पक्षधर थे, आज हम पूर्वाचार्यों की इस परम्परा को प्राणपण से आगे बढ़ाकर गौरवान्वित है। इस अवसर पर आचार्य पीठ लक्ष्मणकिला श्रीमहंत मैथिली रमण शरण,जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीमहंत सियाकिशोरी शरण, महंत जनार्दन दास,महंत रामकुमार दास, महंत रामनरेश दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत राम दास, महंत मनीष दास, महंत हरिभजन दास, महंत रामजीशरण, करुणानिधान भवन के अधिकारी राम नारायण दास,अग्रवाल सभा से जुडे उत्तम बंसल, सुदीप भूषण सिंह, अभिषेक अग्रवाल, अन्जनी गर्ग, अनुभव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन