: 22 जनवरी को सनातन व हिंदू धर्म का महान पर्व : कमल भाई
बमबम यादव
Sat, Jan 20, 2024
उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज के आर्शीवाद से चार हजार लोगों के रहने, खाने-पीने की गई है समुचित व्यवस्था
अयोध्या। भगवा सेना भारत गरवी गुजरात व संत सेवा समिति कर्णावती के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमल भाई रावल ने शुक्रवार को उदासीन आश्रम रानोपाली में आयोजित प्रेसवार्ता दौरान कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय, विहिप केंद्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज द्वारा उन्हें रामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सभी आमंत्रित साधु-संत, श्रद्धालु, भक्तगण के लिए रहने, खाने-पीने की व्यवस्था हेतु दायित्व सौंपा गया था। उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज के आर्शीवाद से चार हजार लोगों के रहने, खाने-पीने की समुचित व्यवस्था की गई है। एक पैकेट में दो लड्डू, एक सरयू नदी का जल, दो कलावा, एक सुपारी, अक्षत रहेगा। इस प्रकार से प्रसाद के रूप में ऐसे 20 हजार पैकेट 20 जनवरी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को देंगे। जो प्राण प्रतिष्ठा के दिन राममंदिर परिसर में प्रसाद रूप में वितरित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी सनातन एवं हिंदू धर्म के लिए महान पर्व है। इसलिए मांस और मदिरा की सारी दुकानें उस दिन बन्द रहे। व्यसन करने वाले व्यसन न करने का संकल्प ले और इस पवित्र और ऐतिहासिक पर्व के सहभागी बनें। आने वाले दिनों में भगवा सेना भारत और गरवी गुजरात संत सेवा समागम समिति द्वारा संत सेवा भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें साधु- संतों, श्रद्धालु, भक्तगणों को रहने खाने-पीने की व्यवस्था की जायेगी। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान से जो अयोध्या आ गया है। उसे रहने एवं खाने-पीने की व्यवस्था न हो। तो वह हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। उसकी सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे और आवास, भोजन की व्यवस्था उपलब्ध करायेंगे। 15 सौ संतों के विश्राम व भोजन की व्यवस्था हमारे तरफ से की गई। लंगर 14 जनवरी से चल रहा है। जो 23 जनवरी तक चलेगा। आमंत्रित संतों के लिए तकिया, कंबल, चद्दर की चार हजार किट राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंप चुके हैं। उदासीन आश्रम प्रेसवार्ता में उदासीन आश्रम महंत डॉ. स्वामी भरत दास, उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा महंत महेश्वर दास, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी, जूना अखाड़ा हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी, श्रीमहंत पुष्करानंद मध्य प्रदेश, सुतीक्ष्ण मुनि, स्वामी माधवानंद, धर्मदास मौजूद रहे।
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