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: जैन सम्प्रदाय कर रहा अहिंसा परमोधर्म को चरितार्थ: गणिनीप्रमुख ज्ञानमती

बमबम यादव

Sun, Feb 23, 2025
जैन सम्प्रदाय कर रहा अहिंसा परमोधर्म को चरितार्थ: गणिनीप्रमुख ज्ञानमती जैन मंदिर में 1800 प्रतिमाओं को मिलेगा भगवान का स्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का 2 मार्च से होगा भव्य शुभारंभ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ कार्यक्रम होगा अपने शिखर पर अयोध्या नगरी प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव आदि पाँच भगवन्तों की भी जन्मभूमि अयोध्या।जहाँ पूरे देश और दुनिया में अयोध्या को भगवान राम की नगरी से जाना जा रहा है, वहीं भारत देश की प्राचीनतम संस्कृति में यह अयोध्या नगरी प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव आदि पाँच भगवन्तों की भी जन्मभूमि है। ऐसी महान तीर्थभूमि पर जैन धर्म की सर्वोच्च शिखर पर जैन मंदिर है जिसका भव्य सौदर्यीकरण हो रहा है। जो अयोध्या के विभिन्न स्थानों पर दर्शनीय एवं वंदनीय है। जैन मंदिर में भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति का परिसर 6 एकड़ विशाल प्रांगण में अपनी अद्वितीय आभा बिखेरता हुआ जैनधर्म की प्राचीनता और इसके इतिहास को जगजाहिर कर रहा है। यहाँ 31 फुट विशाल भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा होने से इस तीर्थ को "बड़ी मूर्ति" के नाम से जन-जन में पहचाना जाता है। ऐसे बड़ी मूर्ति परिसर का ऐतिहासिक विकास सर्वोच्च जैन साध्वी दिव्यशक्ति गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी की पावन प्रेरणा से सन् 1993-1994 से सतत चल रहा है। प्रगतिशील विकास के इस पायदान पर यह तीर्थ वर्ष 2025 में नये-नये जैन मंदिर के साथ अयोध्या का एक मानद् तीर्थ बनकर प्रगट हो रहा है। यहाँ के विशाल मंदिर के गगनचुंबी शिखर और श्वेत आभा से आने वाले हर भक्त और पर्यटकों का मन भक्ति गंगा में डूबता है और भक्तों को जैनधर्म का स्वरूप भी जानने को प्राप्त होता है। ऐसे ही इन रचनाओं में वर्तमान में जैनधर्म का चिन्ह माना जाने वाला "तीनलोक" का स्वरूप वास्तव में बनकर प्रगट हुआ है। लगभग 50 फुट ऊंची श्वेत मकराना मार्बल की आभा से यह रचना पूरे अयोध्या की एक अद्वितीय रचना बनकर जैनधर्म का मर्म समझाने के लिए तैयार है। इस रचना में जहाँ ब्रह्म स्थान अर्थात् मोक्ष की सत्य परिकल्पना जानने को मिलेगी, वहीं स्वर्ग के स्थान, मनुष्य और तिर्यंच लोक का स्थान और उसके साथ ही नरक में रहने वाले पापी जीवों के स्थान भी क्रमशः स्वर्गलोक, मध्यलोक एवं नरक लोक के रूप में देखने को प्राप्त होगा। ऐसे इस तीनलोक रचना में सिद्ध भगवन्तों की 727 जिनप्रतिमाएं विराजमान होंगी तथा इसी के साथ भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर तक की अन्य 1008 प्रतिमाओं का भी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव अर्थात् प्राणप्रतिष्ठा श्री दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी के तत्त्वावधान में फाल्गुन शु. तृतीया से सप्तमी अर्थात् 2 मार्च से 6 मार्च तक राष्ट्रीय स्तर पर सम्पन्न होगा। उक्त महोत्सव सर्वोच्च जैन साध्वी गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी की पावन प्रेरणा एवं साधना का प्रतिफल है, जो उनके दिव्य सान्निध्य में सम्पन्न होगा। सम्पूर्ण कार्यक्रम को प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनमती माताजी का मार्गदर्शन एवं तीर्थ के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी का कुशल निर्देशन प्राप्त हो रहा है। विशेषरूप से इस आयोजन में कमेटी द्वारा आचार्य भद्रबाहुसागर जी महाराज को ससंघ आमंत्रित किया गया है। जिनके सान्निध्य में उक्त महोत्सव सम्पन्न होगा। साथ ही देश के चिरपरिचित क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी महाराज एवं श्रवणबेलगोला के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति जी महाराज भी अपना सान्निध्य प्रदान करेंगे। इस पंचकल्याणक महोत्सव में देश के लगभग सभी प्रान्तों से पाँच हजार भक्तजन शामिल होने की संभावना है। ये सभी भक्तजन इन्द्र और इन्द्राणी का रूप धारण करके शुद्ध पारम्परिक पूजन वस्त्र धोती-दुपट्टा एवं साड़ियों में इन्द्र-इन्द्राणी का रूप धारण करके अनुष्ठान को सम्पन्न करेंगे। विद्वान् के रूप में इस अनुष्ठान को प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन, पं. ऋषभसेन जैन उपाध्ये, पं. सतेन्द्र जैन, पं. अकलंक जैन आदि विद्वत् जन सम्पन्न करायेंगे। इस प्रकार अयोध्या में एक साथ 1800 प्रतिमाओं के गर्भकल्याणक, जन्मकल्याणक, दीक्षाकल्याणक, केवलज्ञानकल्याणक और मोक्षकल्याण के साथ इन सारी प्रतिमाओं को मंत्रोच्चार एवं पूर्ण विधिविधान के साथ दिनाँक 6 मार्च को प्रातः भगवान का स्वरूप प्राप्त होगा। अयोध्या के इतिहास का यह एक उत्कर्ष काल है, जब एक साथ जैन तीर्थंकर एवं सिद्ध भगवन्तों की 1800 प्रतिमाएं पूजनीय बनकर प्रतिष्ठापित की जायेंगी।उक्त आयोजन में विशेषरूप से 3 मार्च को जन्मकल्याणक मनाया जायेगा, जिसमें विशाल ऐतिहासिक शोभायात्रा के साथ पूरे अयोध्या नगर में भगवान की जन्म की खुशियाँ मनायी जायेंगी। इसी प्रकार 4 मार्च को भगवान का केशलोंचपूर्वक सम्पूर्ण गृहबंधन छोड़कर दीक्षा का परिदृश्य देखने को मिलेगा। पुनः 5 मार्च को तीनोंलोकों का ज्ञान प्राप्त करने वाले दिव्य आत्माओं के समान भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति होगी और 6 मार्च की प्रातःकाल ध्यानमुद्रा के साथ समस्त आठों कर्मों का नाश करते हुए भगवान अपनी आत्मा को शरीर से पृथक् करते हुए सदैव के लिए अजर-अमर बनकर भगवत्ता का स्वरूप प्राप्त करेंगे और मोक्षकल्याणक मनाया जायेगा। इस महोत्सव में समस्त इन्द्र-इन्द्राणियों में प्रमुख माने जाने वाले सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म-अर्पिता जैन-लखनऊ विशेष पुण्यार्जन करेंगे। साथ ही भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य- ज्ञानेशचंद जैन-सौ. अलका जैन-लखनऊ को, महायज्ञनायक अनुपम-सौ. सोनाली जैन-प्रयागराज, ईशान इन्द्र अभय डोटिया-हेमा जैन डोटिया-मुम्बई, सानत्कुमार इन्द्र सुनील कुमार-मीनाक्षी जैन सर्राफ मेरठ, माहेन्द्र इन्द्र विनोद-शकुन्तला जैन, उत्तमनगर-दिल्ली एवं धनकुबेर का सौभाग्य सौरभ-दीपिका जैन-बहराइच को व अन्य अनेक स्थानों से पधारे इन्द्र-इन्द्राणियों को समस्त अनुष्ठान करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इन्हीं आयोजनों में 4 मार्च को प्रसिद्ध गीतकार संगीतकार रूपेश जैन द्वारा संगीत संध्या एवं 5 मार्च को रंगशाला ग्रुप-इंदौर की साधना मादावत द्वारा भारतीय संस्कृति की प्राचीनता पर आधारित वर्तमान नव पीढ़ी के लिए अत्यन्त प्रेरक नाटिका भी प्रस्तुत की जायेगी। महोत्सव के लिए कमेटी द्वारा सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं राज्यपाल आदि विशिष्ट अतिथियों को भी आमंत्रण प्रेषित किया है।इस महोत्सव की तैयारियों में कार्याध्यक्ष अनिल कुमार जैन, उपाध्यक्ष आदीश कुमार जैन सर्राफ, महामंत्री श्री अमरचंद जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन तथा अन्य पदाधिकारियों में जितेन्द्र जैन, योगेश जैन, निधेश जैन, परमेन्द्र जैन, पंकज जैन, नमन जैन, अंकुर जैन, कमलेश जैन आदि सैकड़ों कार्यकर्तागण जुड़कर कार्यक्रम को सफल कर रहे हैं।

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