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: अपनी बेबाकी, सरलता व सहजता से राष्ट्रीय फलक पर हुए शिरोधार्य

बमबम यादव

Fri, May 10, 2024

फलाहारी बाबा को तर्कशील युवा महंतों ने उन्हें अपने गुरू के रूप में स्वीकार कर खुद को धन्य माना

अयोध्या। संतों की सराह कही जाने वाली रामनगरी अयोध्या में अनेक भजनानंदी संत हुए है जिन्होंने नगरी ही नही सम्पूर्ण भारत वर्ष में रामभक्ति धारा की अलक जगाईं। ऐसे ही एक संत हुए कौशल किशोर शरण जो फलाहारी बाबा के नाम से सुविख्यात हुए।

अयोध्या के पड़ोसी जनपद बलरामपुर के ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले फलाहारी बाबा ने स्वर्गद्वार के हनुमत सदन मंदिर में दशको हनुमान जी की कठिन साधना की। एक समय उनके दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता। कालांतर में अयोध्या के महंतों ने उन्हें राजगोपाल मंदिर की सम्पत्ति की रक्षा के लिए इस प्रसिद्ध मंदिर का महंत बना दिया। फकीर स्वभाव वाले फलाहारी बाबा इसके लिए अपने लोगों को मना तो नहीं कर सके पर यह दायित्व उनकी आत्मा सहज स्वीकार न कर सकी।राम मंदिर के विवाद में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या के कई महंतों के साथ अयोध्या बुलाया गया। उनकी बेबाकी, ब्रह्मज्ञान को सुनने वाले उन्हें चकित होकर देखते रह जाते। कड़ी साधना से उपजा उनका ज्ञान बड़े से बड़े विद्वानों को भी चकित करने वाला रहा। उनकी इसी ज्ञान से प्रभावित होकर हनुमत निवास के महंत मिथिलेशनंदिनी शरण और तिवारी मंदिर के महंत गिरीशपति तिवारी जैसे तर्कशील युवा महंतों ने उन्हें अपने गुरू के रूप में स्वीकार कर खुद को धन्य मानते थे। महंत कौशल किशोर शरण फलाहारी बाबा की प्रथम पुण्यतिथि शनिवार को समारोह पूर्वक मनाई जाएगी जिसमें रामनगरी ही नही बल्कि उनके चाहने वाले संत साधक हजारों की तादात में अपनी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। जन्म जन्मांतर के पुण्य अर्जित होते है तो संत समाज का दर्शन और सानिध्य प्राप्त होता है। यह शुभ अवसर संतसेवी गौ सेवी ब्राह्मण व दरिद्र नारायण की सेवा करने वाले और सेवा को ही धर्म मानने वाले श्री राजगोपाल मंदिर के पूर्वाचार्य महंत कौशल किशोर शरण जी फलाहारी बाबा के प्रथम पुण्यतिथि पर संत नमन करेंगे।

राजगोपाल मंदिर से जुड़े फलाहारी बाबा के कृपापात्र शिष्य डा सर्वेश्वर दास शरद जी ने बताया कि सनातन परंपरा का यह वैभव है कि हम प्रतिदिन गुरुदेव भगवान की पूजा करते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर संतो के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होगे हैं। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया गया है। शरद जी ने कहा कि पुण्यतिथि महोत्सव राजगोपाल मंदिर के वर्तमान महंत सीताराम शरण के देखरेख में हो रहा है।

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