: गुरू एक सच्चा पथ प्रदर्शक होता है : मामा दास
बमबम यादव
Mon, Jul 22, 2024
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी का मामा दास ने किया पूजन
अयोध्या। सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा के दिन वेदों के रचयिता वेदव्यास जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। उक्त बातें अयोध्याधाम स्थित प्रतिष्ठित पीठ श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी के शिष्य समाजसेवी संत मामा दास महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास को जगत का प्रथम गुरु माना जाता है। गुरु पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा का यह पर्व महर्षि वेद व्यास को समर्पित है क्योंकि आज के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं। गुरु पूर्णिमा मुख्यतः हमारे गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का दिन है। ये गुरु औपचारिक आध्यात्मिक शिक्षक, वंश धारक या कोई भी व्यक्ति हो सकते हैं। जो ज्ञान और बुद्धि प्रदान करते हैं। हमारे जीवन पथ पर मार्गदर्शन करते हैं। हमें अंधकार से उजाले की ओर ले जाते हैं। गुरू एक सच्चा पथ प्रदर्शक होता है। जो हमें सच्चाई के मार्ग पर ले जाता है। वह हमेशा हमारी भलाई के बारे में सोचता है। मामा दास ने कहा कि मंदिर में गुरू पूर्णिमा हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। इसमें दूर- दराज से भक्तगण सम्मिलित हुए। जिन्होंने गुरु की पूजा कर जीवन धन्य बनाया। सर्वप्रथम मंदिर में हनुमानजी का भोग लगाकर आरती-पूजन किया गया। फिर मैंने अपने अपने पूज्य गुरूदेव का पूजन-अर्चन कर आरती उतारी। तदुपरांत शिष्यगणों ने बारी-बारी से गुरूदेव का पूजन किया। पूजन-अर्चन का सिलसिला देरशाम तक चलता रहा। शिष्यगणों ने भेंट स्वरूप उपहार भी प्रदान किया।
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