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: रामायणम में शिष्य परिकरों ने निवेदित की अपनी श्रद्धा

बमबम यादव

Sat, Jul 27, 2024

जन्म शताब्दी के पावन अवसर पर 11 हजार 111 हनुमानचालीसा के पाठ की हुई पूर्णाहुति

सवा अरब राम नाम लेखन का लक्ष्य भी पूर्णता की ओर अग्रसर

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में गुरु पूर्णिमा के मौके पर लाखों की संख्या में अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान के बाद राम जन्मभूमि हनुमानगढ़ी सहित प्रमुख मंदिरों में पूजन अर्चन किया इसके बाद सभी भक्त अपने गुरुओं की आराधना की। गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा है जिस का निर्वाह आज भी लोग अपने गुरुओं के दर्शन पूजन और सेवा कर करते हैं। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार राम कथा की अध्यात्मिक ऊर्जा स्थली पद्मभूषण से सम्मानित युग तुलसी पं. रामकिंकर जी की तपोभूमि रामायणम आश्रम में मंदाकिनी रामकिंकर जी के पावन सानिध्य में बड़े ही धूमधाम के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों का जमावड़ा रहा। महोत्सव से दूर दराज से हजारों भक्तों ने अपनी हाजिरी लगाई।पूर्णिमा पर प्रातःकाल युग तुलसी के विग्रह का भव्य अभिषेक पूजन हुआ। मंदाकिनी रामकिंकर जी ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के मौके पर व्यास की पूजा और व्यास की तिथि है आज शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं और गुरु से आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा कि जब मंत्र की सृष्टि गुरु शिष्य के हृदय में स्थापित करता है तब उसका स्वरूप ब्रह्मा का होता है पालन पोषण और विस्तार को लेकर जब ज्ञान देता तो गुरु का स्वरूप विष्णु का होता है और जब गुरु सभी शक्ति शिष्य को प्राप्त कराने के लिए इज्जत करता है तो सिर्फ उसका शुरू पारब्रह्म परमेश्वर का हो जाता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि गुरु की बात मानने वाले शिष्य को उसकी मुक्ति को संशय नहीं रहता आज के दिन गुरु पूर्णिमा है जो गुरु के लिए है लोग आश्रम में जा कर के अपने गुरुओं की पूजा करते हैं गुरु की महत्वता और कृपा आप पूर्ण रुप से शिष्य को मिली और शिष्य का कल्याण हो इसलिए गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। रामायणम की गुरु पूर्णिमा इस बार युगतुलसी का जन्म शताब्दी वर्ष होने के चलते और अधिक भाव-भावना से ओतप्रोत रहा। युग तुलसी जी की कृपापात्र शिष्या मंदाकिनी रामकिंकर के संयोजन में 20 जुलाई को 11 हजार 111 हनुमानचालीसा के पाठ की पूर्णाहुति हुई।तो वही सवा अरब राम नाम लेखन का लक्ष्य भी पूर्णता की ओर अग्रसर हुआ।

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