: महामंडलेश्वर गंगादास महाराज काे संताें ने भावभीनी श्रद्धांजलि
बमबम यादव
Fri, Mar 29, 2024
महाराजश्री ने मठ का सर्वांगीण विकास किया, आजीवन आश्रम की उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे: श्रीमहंत केशवदास
अयोध्या। रामनगरी में स्वर्गद्वार स्थित प्रसिद्ध पीठ श्रीलालद्वारा पंजाबी आश्रम के पूर्वाचार्य श्रीमहंत महामंडलेश्वर गंगादास महाराज काे संताें ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अयाेध्याधाम के विशिष्ट संत-महंताें ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। संताें ने पूर्वाचार्य के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस माैके पर साकेतवासी महंत के कृपापात्र शिष्य व श्रीलालद्वारा पंजाबी आश्रम पीठाधीश्वर श्रीमहंत केशवदास महाराज ने कहा कि महाराजश्री ने मठ का सर्वांगीण विकास किया। आजीवन आश्रम की उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। सरलता ताे उनमें देखती ही झलकती थी। वह गाै और संत सेवी थे। गुरूदेव के समय से ही आश्रम में गाै, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। सभी उत्सव, समैया, त्याेहार परंपरागत रूप से हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जा रहा है। महाराजश्री अब हमारे बीच में नही हैं। उनके बारे में जितना कहा जाए वह कम ही हाेगा। लेकिन उनकी यश-कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। उन्हीं की देन है कि आज मंदिर की गणना अयाेध्याधाम के प्रमुखतम पीठाें में हाेती है। जहां ठाकुरजी की सेवा भली-भांति चल रही है। यह प्राचीन मंदिर है, जिसकी गणना अयाेध्यानगरी के प्रमुखतम पीठाें में हाेती है। गुरूदेव के बतलाए हुए मार्ग का अनुसरण कर आगे बढ़ रहा हूं। काफी संख्या में संताें ने प्रसाद ग्रहण किया। महामंडलेश्वर केशवदास महाराज ने पधारे हुए संत-महंताें का स्वागत-सत्कार किया। इस अवसर पर निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महंत गौरीशंकर दास, संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास, महंत रामकुमार दास,बावन मंदिर महंत वैदेहीवल्लभ शरण, डॉ. महेश दास, हनुमत सदन के महंत अवधकिशाेर शरण, हनुमत हरिराम सदन महंत रामलाेचन शरण, महंत पवनकुमार दास, पहलवान राजेश दास, महंत प्रियाप्रीतम शरण, महंत राकेश शरण, महंत राजीवलाेचन शरण, महंत रामप्रवेश दास, महंत रामलखन शरण, महंत किशाेरी शरण, डॉ. देवेश दास, अभिषेक दास, राजन दास, सूरज दास, नंदकुमार मिश्र आदि संत-महंत, भक्तगण माैजूद रहे।
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