: शिद्दत से शिरोधार्य हुए आचार्य स्वामी सीताराम शरण
बमबम यादव
Sun, Mar 9, 2025
शिद्दत से शिरोधार्य हुए आचार्य स्वामी सीताराम शरण
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के पूर्वाचार्य स्वामी सीताराम शरण की 27वीं पुण्यतिथि पर संतों ने दी श्रद्धांजलि
गुरुदेव अपने त्याग, तपस्या और वैराग्य से अयोध्या के एक युग को रोशन किया: किलाधीश श्रीमहंत मैथिली रमण शरण
अयोध्या। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला के पूर्वाचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज की 27 वीं पुण्यतिथि श्रद्धा एवं उल्लास के वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित संत-महंतो व जन प्रतिनिधियों के अलावा शिष्य परम्परा के श्रद्धालुओं ने आचार्य प्रवर को नमन कर उनके चित्र पट पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए लक्ष्मण किलाधीश श्रीमहंत मैथिली रमण शरण जी ने बताया कि गुरुदेव अपने त्याग, तपस्या और वैराग्य से अयोध्या के एक युग को रोशन किया। वे 1957 में श्री लक्ष्मण किलाधीश बने और 40 वर्षों की लंबी अवधि तक यश-कीर्ति का विस्तार करते हुए 1997 में इस संसार से भगवान के धाम को चले गए। श्रीश्री माँ आनन्दमयी, धर्म सम्राट करपात्री जी से लेकर प्रभुदत्त ब्रह्मचारी और धीरेन्द्र ब्रह्मचारी से लेकर चन्द्रा स्वामी तक रसिक उपासना के भाव का गहरा जुड़ाव था।
उनमें विद्वता एवं रसिकता दोनों एक साथ विद्यमान रही। वह भगवान श्रीसीताराम एवं श्रीराम से जुड़े प्रसंगों को मधुर भाव से सुनाकर भाव विभोर कर देते थे। वह रामकथा की शास्त्रीय भावधारा के उत्तर भारत के विशिष्ट विद्वान थे।किलाधीश श्रीमहंत मैथिली रमण शरण जी कहते है कि अयोध्या त्याग एवं तपस्या की भूमि है और उसके अनमोली रत्न थे गुरुदेव स्वामी सीताराम शरण। वह महाराजश्री की 27वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे। किलाधीश जी की अध्यक्षता में महाराजश्री के चित्रपट पर पुष्पांजलि एवं आरती कर उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। श्रीरामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि रामानंदीय वैष्णव समाज को गौरवान्वित करने वाले विशिष्ट संतों में एक थे आचार्य सीताराम शरण। हनुमत निवास के महंत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज ने कहा कि स्वामी सीताराम शरण महाराज के मोहक स्वर की स्मृतियाँ आज तक धूमिल नहीं हुई हैं। उनके व्यापक प्रभाव और स्वीकार्यता के बीच उन्होंने अपने धार्मिक स्वरूप के अनुरूप संयम सदा बनाये रखा। जिसके परिणामस्वरूप राजनीति और अफसरशाही उनके सात्त्विक तेज को कभी प्रभावित न कर पाई। जब भी समय और समाज की आवश्यकता पर वे कुछ बोलते तो प्रदेश या केन्द्र दोनों ही सत्ताओं ने उसका मान रखा।
जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश्वर प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि स्वामी सीताराम शरण विशिष्ट संत थे। आचार्य सीताराम शरण भगवान श्रीसीताराम की कथा के मात्र प्रवक्ता न होकर उसमें प्रतिपल जीते थे। करपात्री महाराज, स्वामी अड़गड़ानंद जैसे सिद्ध संतों का उनके विशेष लगाव रहा। कार्यक्रम की देखरेख कर रहें आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने कहा कि रामकथा के विद्वान संतों की चर्चा बिना परमपूज्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज के पूरी नहीं हो सकती।उन्होंने कहा कि प्रवचन, गायन, सेवा, संस्कार आदि अनेक पहलुओं से आचार्य श्री की विशिष्टता रेखांकित होती है।सभी अतिथियों की अगवानी उत्तराधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने की। इस मौके पर हनुमत सदन के महंत अवध किशोर शरण, महंत बलराम दास, सदगुरु कुटी के महंत छोटू शरण, महंत रामभद्र शरण, पुजारी हेमंत दास, महंत वीरेंद्र दास, गोण्डा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, पूर्व जिपं सदस्य गिरीश पाण्डेय डिप्पुल, जिपं सदस्य करुणाकर पाण्डेय, उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष अतुल सिंह, पार्षद प्रियेश दास, निलेश सिंह,बृजभूषण शरण सिंह के अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी, हनुमत किला गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण, महंत प्रिया प्रीतम शरण, महंत अंजनी शरण, महंत अमित दास सहित अन्य ने श्रद्धांजलि दी।
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